UP: जिला जेल में 11 कैदी HIV संक्रमित मिले..., कारण जान अधिकारी भी रह गए हैरान; मऊ में 2404 मरीज
यह मामला यूपी के मऊ जिले का है। जिला अस्पताल में जांच के बाद एचआईवी के मरीजों को लेकर प्रशासन भी हैरान है। इसमें अधिकत मरीजों की संख्या उनकी है, जो 15 साल से कम हैं।
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जिला जेल में स्वास्थ्य जांच में 11 कैदी एचआईवी संक्रमित पाए गए हैं। इनमें से सात कैदियों ने सड़क किनारे और मेले में शरीर पर टैटू बनवाए थे। इसके बाद से इनकी तबीयत खराब होने लगी थी। अन्य पीड़ित कैदी नशे के आदी हैं।
आशंका जताई जा रही है कि एक ही इंजेक्शन से नशे की डोज बार-बार लेने से संक्रमित हो गए। वहीं, जिला अस्पताल के एआरटी सेंटर में टैटू से दो मरीजों में एचआईवी की पुष्टि हो चुकी है।
जेल अधीक्षक आनंद शुक्ला ने बताया कि जेल में कैदियों की जांच में 11 में एचआईवी की पुष्टि हुई है। पांच मरीज संदिग्ध हैं। इनकी जांच बाकी है। बलिया जिले के सात मरीज हैं, जबकि मऊ के तीन हैं। काउंसिलिंग में पता चला कि सात कैदियों ने अपने शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर टैटू बनवाए थे।
बलिया के एक कैदी ने बताया कि उसने ददरी मेले में पीठ और हाथ पर टैटू बनवाया था। जेल अधीक्षक ने बताया कि संक्रमितों में कई नशे के आदी हैं, जो एक ही इंजेक्शन का प्रयोग बार-बार करते थे। बीते वर्ष जिला जेल में संक्रमितों की संख्या नौ थी। लेकिन टैटू बनवाने से संक्रमित होने का मामला इस साल काउंसिलिंग में सामने आया।
30 मरीजों की उम्र 15 साल से कम
जिला अस्पताल में संचालित एंटी रेट्रो वायरल थेरेपी (एआरटी) सेंटर के फार्मासिस्ट शिवेंद्र सिंह ने बताया कि वर्तमान में जिले में 2404 लोग एचआईवी संक्रमित हैं। इनमें तीस मरीज ऐसे हैं, जो 15 वर्ष से कम उम्र के हैं। दो मरीजों की पुष्टि तीन माह पहले हुई, जिन्होंने सड़क किनारे टैटू बनवाए थे।
फार्मासिस्ट शिवेंद्र सिंह ने बताया कि हर साल 15 से 20 महिलाएं एचआईवी संक्रमित हो रही हैं। काउंसिलिंग में पता चला कि चार साल में संक्रमित मिलीं 68 महिलाओं मे से 20 में संक्रमण की वजह सड़क किनारे टैटू बनवाना रहा। सभी महिलाओं का सुरक्षित प्रसव कराया गया।
सावधानी ही बचा सकती है बीमारी से
आईएमए के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. संजय सिंह ने बताया कि टैटू के लिए नई सुई (निडिल) का इस्तेमाल करना चाहिए। टैटू बनवाने में 0.3 प्रतिशत संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। यदि सुई किसी संक्रमित के खून के संपर्क में आई है तो इससे दूसरे व्यक्ति में संक्रमण हो सकता है। एचआईवी दूषित रक्त के संपर्क में आने और संक्रमित इंजेक्शन साझा करने से फैलता है। संक्रमण से बचने के लिए सावधानी और सतर्कता जरूरी है।