फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mau News ›   गोदामों में डीएपी है और न ही यूरिया

गोदामों में डीएपी है और न ही यूरिया

Fri, 16 Nov 2018 10:36 PM IST
Updated Fri, 16 Nov 2018 10:36 PM IST
विज्ञापन
गोदामों में डीएपी है और न ही यूरिया
मऊ। जिले की 92 साधन सहाकरी समितियों पर इन दिनों ताले लटके हैं। इन गोदामों में न तो डीएपी है और न ही यूरिया। किसान रबी फसलों की बुवाई की तैयारी में लगे हैं। ऐसे में उनके सामने दिक्कतें पैदा हो रहीं। यूरिया की कालाबाजारी की शिकायतें भी आ रही हैं। साधन सहाकरी समितियों के सचिवों को आठ सालों से वेतन नहीं मिला है। इसलिए अपने वेतन भुगतान की मांग को लेकर सचिव अनिश्चित कालीन हड़ताल पर हैं। सचिवों की हड़ताल ने समस्या को विकराल बना दिया है।
विज्ञापन

जिले में कुल 92 न्याय पंचायतों में साधन सहाकारी समितियां स्थापित हैं। जिले के किसान इन समितियों पर मिलने वाले उर्वरकों पर ज्यादा भरोसा करते हैं। इसलिए उर्वरकों के लिए किसान इन साधन सहकारी समितियों पर ही निर्भर रहते हैं। वैसे कृषि विभाग के भी जिले के नौ ब्लाकों पर कृषि बीज भंडार हैं। यहां पर भी उर्वरकों की बिक्री की व्यवस्था है। लेकिन बहुत कम मात्रा में। साधन सहकारी समितियों का रबी सीजन में डीएपी का लक्ष्य इस साल 8200 मीट्रिक टन है। एआर के दावे पर भरोसा करें तो इसके सापेक्ष अब तक केवल 3800 मीट्रिक टन डीएपी ही वितरित की जा सकी है।
विज्ञापन

उधर रबी सीजन में बुवाई के समय हालांकि यूरिया की खपत कम होती है फिर भी 3000 मीट्रिक टन यूरिया तो गेहूं की बुवाई के समय ही केवल साधन सहकारी समितियों के गोदामों से बिकती है। इसके अलावा गेहूं की पहली सिंचाई से लेकर अंतिम सिंचाई में फरवरी तक यूरिया की खपत होती है। इस समय जिले की किसी भी साधन सहकारी समिति की गोदाम में यूरिया नहीं है। बुवाई के समय किसान डाई के साथ यूरिया मिलाकर प्रयोग करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

एआर कोआपरेटिव का दावा है कि 2000 एमटी यूरिया बफर गोदाम में है। लेकिन सचिवों की हड़ताल की वजह से वह गोदामों नहीं पहुंच पा रही है। यदि सचिवों की हड़ताल खत्म भी हो जाती है तो उसके बाद कम से कम 20 दिन बाद ही यूरिया की खेप जिले में आ सकती है क्योंकि जब तक बफर गोदाम में यूरिया का स्टार रहेगा, विभाग और यूरिया मंगाने लिए आर्डर नहीं दे सकेगा। इस बाबत सहायक निबंधक विनय कुमार सिंह का कहना है कि सचिवों की हड़ताल की वजह से ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed