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देवलास मेले में अब नहीं लगेगा टैक्स
Updated Sat, 23 Sep 2017 11:35 PM IST
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अमिला। जनपद का सुप्रसिद्ध मेला देवल बाबा जी की तपोभूमि देवलास में डाला छठ पर एक सप्ताह तक (दिन-रात) लगने वाले मेले में दूकानदारों को अब कोई टैक्स नहीं पड़ेगा। मेले में टैक्स से होने वाली आय की भरवाई जिला पंचायत अध्यक्ष के पुत्र अपने पास से करेंगे। जिला पंचायत का टैक्स जिला पंचायत अध्यक्ष- उर्मिला जायसवाल ने फ्री कर दिया है।
जिला पंचायत की सरकारी फीस 22 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति जिला पंचायत अध्यक्ष के पुत्र आलोक जायसवाल ने अपने पास से जमा करने की घोषणा किया है। इससे देवलास क्षेत्र के दूकानदारों से लेकर क्षेत्रीय लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। इतना ही नहीं जिला पंचायत अध्यक्ष के बेटे ने मेला में लगने वाले संसाधनों और अन्य व्यवस्था का खर्च स्वयं वहन करने की बात कही है। उन्होंने ऐसा कर एक मिसाल पेश किया है। ऐसे में सबसे बड़ी राहत छोटे और मझोले दूकानदारों को होगा। उन्होंने ने बताया कि इसके पूर्व जिला पंचायत से टेंडर होने के पश्चात मनमानी धनराशि ठेकेदारों द्वारा वसूली की जाती थी। इस वसूली के साथ ही दूकानदारों का उत्पीड़न भी होता था। जिला पंचायत अध्यक्ष उर्मिला ने इसे तत्काल बंद करने का आदेश दिया। एक सप्ताह तक लगने वाले मेला से अब तक लाखों की अवैध तरीके से वसूली की जाती रही है। यह मनमानी वसूली वर्जों से की जाती रही है। जबकि व्यवस्था दूकानदार स्वयं करते थे। मेले में आने वाले लोगों का मानना था कि यह कार्य इस तपोभूमि की गरिमा को ठेस पहुंचाने की कोशिश जैसा था। जिला पंचायत अध्यक्ष ने मेले की सभी प्रकार की बेहतर व्यवस्था करने का दावा किया है।
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जिला पंचायत की सरकारी फीस 22 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति जिला पंचायत अध्यक्ष के पुत्र आलोक जायसवाल ने अपने पास से जमा करने की घोषणा किया है। इससे देवलास क्षेत्र के दूकानदारों से लेकर क्षेत्रीय लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। इतना ही नहीं जिला पंचायत अध्यक्ष के बेटे ने मेला में लगने वाले संसाधनों और अन्य व्यवस्था का खर्च स्वयं वहन करने की बात कही है। उन्होंने ऐसा कर एक मिसाल पेश किया है। ऐसे में सबसे बड़ी राहत छोटे और मझोले दूकानदारों को होगा। उन्होंने ने बताया कि इसके पूर्व जिला पंचायत से टेंडर होने के पश्चात मनमानी धनराशि ठेकेदारों द्वारा वसूली की जाती थी। इस वसूली के साथ ही दूकानदारों का उत्पीड़न भी होता था। जिला पंचायत अध्यक्ष उर्मिला ने इसे तत्काल बंद करने का आदेश दिया। एक सप्ताह तक लगने वाले मेला से अब तक लाखों की अवैध तरीके से वसूली की जाती रही है। यह मनमानी वसूली वर्जों से की जाती रही है। जबकि व्यवस्था दूकानदार स्वयं करते थे। मेले में आने वाले लोगों का मानना था कि यह कार्य इस तपोभूमि की गरिमा को ठेस पहुंचाने की कोशिश जैसा था। जिला पंचायत अध्यक्ष ने मेले की सभी प्रकार की बेहतर व्यवस्था करने का दावा किया है।
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