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खास होगी संस्थान की पंचवर्षीय शोध परियोजना

Sun, 29 Dec 2019 11:45 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sun, 29 Dec 2019 11:45 PM IST
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three days seminar
वृंदावन(मथुरा)। वृंदावन शोध संस्थान की पंचवर्षीय शोध परियोजना ‘युग-युगीन श्रीकृष्ण : व्याप्ति और संदर्भ’ कई मायनों में खास होगी। इसके लिए संस्थान के द्वारा विविध स्तरों पर प्रयास करते हुए महत्वपूर्ण जानकारियां तथा अलग-अलग कार्यक्रमों में श्रीकृष्ण संस्कृति के महत्व को दर्शाने वाले दुर्लभ संदर्भ संकलित किये जा रहे हैं। रविवार को संस्थान के अध्यक्ष आरडी पालीवाल ने बताया कि साहित्य के साथ ही जीवन के विविध पक्षों से श्रीकृष्ण का जुड़ाव भारत के अलग-अलग अंचलों में विविधताओं के साथ देखा जा सकता है। श्रीकृष्ण संस्कृति की अपनी विशेषता है कि इसकी व्याप्ति आज अंतर्राष्ट्रीय पटल पर दृष्टिगोचर है।
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मध्य प्रदेश के छतरपुर परिक्षेत्र में विद्यमान पांडुलिपियों का दुर्लभ संग्रह डिजिटल रूप में वृंदावन शोध संस्थान को प्राप्त हुआ है। हित परमानंद शोध संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष आचार्य विष्णुमोहन नागार्च ने यह दुर्लभ निधि वृंदावन शोध संस्थान के अध्यक्ष को सौंपी हैं। परियोजना में श्रीकृष्ण विषयक विविधता परक क्षेत्रीय संदर्भों के संकलन तथा शोध अध्येताओं की सहभागिता बढ़ाने के दृष्टिगत वृंदावन शोध संस्थान के द्वारा केरल के त्रिशूर स्थित साहित्य अकादमी में 19 से 21 जनवरी पर्यंत त्रिदिवसीय संगोष्ठी की जाएगी। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक सतीशचंद्र दीक्षित, एस के शर्मा, ब्रजगोपाल राय चंचल, आचार्य विष्णुमोहन नागार्च, राधाकृष्ण पाठक, पं.उदयन शर्मा, डॉ.राजेश शर्मा, सुकुमार गोस्वामी सहित अनेक जन उपस्थित रहे।
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