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कृष्ण जन्मभूमि विवाद: हाईकोर्ट के फैसले को मुस्लिम पक्ष की सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, हिंदू पक्ष की ये तैयारी
Sat, 26 Oct 2024 01:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 26 Oct 2024 01:50 PM IST
सार
मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद में रिकॉल अर्जी खारिज होने के बाद मुस्लिम पक्ष ने इलाहबाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। वहीं हिंदू पक्ष ने भी कैविए दाखिल करने का निर्णय लिया है।
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मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में रिकॉल अर्जी खारिज होने के बाद मुस्लिम पक्ष ने इलाहबाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने पर हिंदू पक्ष भी कैविए दाखिल करने का निर्णय लिया है। सभी वादों को एक साथ सुनने के आदेश के विरोध में दाखिल रिकॉल आवेदन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 23 अक्तूबर को खारिज कर दिया था।
दिया थे ये आदेश
हिंदू पक्ष के अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट ने 11 जनवरी 2024 को श्रीकृष्ण जन्मभूमि व शाही ईदगाह विवाद मामले के सभी 18 वादों को एक साथ सुनने का आदेश दिया था। वाद की पोषणीयता पर हिंदू पक्ष में फैसला आने पर मुस्लिम पक्ष ने वादों को एक साथ सुनने के आदेश के खिलाफ दाखिल किए गए रिकॉल आवेदन पर सुनवाई करने की प्रार्थना की थी। 23 अक्तूबर को अदालत ने मुस्लिम पक्ष के रिकॉल आवेदन को खारिज कर दिया था।
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मुस्लिम पक्ष ने दी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट के इस फैसले को बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने बताया कि कि इसके खिलाफ वह सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल करेंगे। उनका पक्ष भी सुना जाए। महेंद्र प्रताप ने कहा कि मुस्लिम पक्ष द्वारा मामले को लटकाने की कोशिश की जा रही है। जानबूझकर ऐसा किया जा रहा है। इधर, हाईकोर्ट अपने आदेश को बरकरार रखने के बाद के बाद मामले की सुनवाई छह नवंबर तय की है। अब वाद बिंदू तय किए जाएंगे। इसके बाद ही बिंदू वार मामले की सुनवाई होगी।
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दिया थे ये आदेश
हिंदू पक्ष के अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट ने 11 जनवरी 2024 को श्रीकृष्ण जन्मभूमि व शाही ईदगाह विवाद मामले के सभी 18 वादों को एक साथ सुनने का आदेश दिया था। वाद की पोषणीयता पर हिंदू पक्ष में फैसला आने पर मुस्लिम पक्ष ने वादों को एक साथ सुनने के आदेश के खिलाफ दाखिल किए गए रिकॉल आवेदन पर सुनवाई करने की प्रार्थना की थी। 23 अक्तूबर को अदालत ने मुस्लिम पक्ष के रिकॉल आवेदन को खारिज कर दिया था।
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मुस्लिम पक्ष ने दी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट के इस फैसले को बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने बताया कि कि इसके खिलाफ वह सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल करेंगे। उनका पक्ष भी सुना जाए। महेंद्र प्रताप ने कहा कि मुस्लिम पक्ष द्वारा मामले को लटकाने की कोशिश की जा रही है। जानबूझकर ऐसा किया जा रहा है। इधर, हाईकोर्ट अपने आदेश को बरकरार रखने के बाद के बाद मामले की सुनवाई छह नवंबर तय की है। अब वाद बिंदू तय किए जाएंगे। इसके बाद ही बिंदू वार मामले की सुनवाई होगी।