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Banke Bihari Mandir Corridor: बांके बिहारी कॉरिडोर का रास्ता साफ, पर प्रशासन के सामने हैं ये बड़ी चुनौतियां

Tue, 21 Nov 2023 01:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 21 Nov 2023 01:25 PM IST
सार

Banke Bihari Mandir Corridor: वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही इसके स्वरूप को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि कॉरिडोर को लेकर मथुरा प्रशासन के सामने भी कुछ बड़ी चुनौतियां हैं। आइये जानते हैं...
 

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Path for corridor cleared, challenges remain for administration
बांके बिहारी मंदिर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

श्रीबांके बिहारी कॉरिडोर निर्माण का रास्ता हाईकोर्ट के आदेश पर बेशक साफ हो गया है। मगर, प्रशासन के लिए अभी चुनौतियां बरकरार हैं। 5.65 एकड़ जमीन करार नियमावली के तहत लेने के लिए लोगों को समझना प्रशासन के लिए चुनौती भरा होगा। इसके अलावा 300 करोड़ रुपये जमीन खरीदने और 505 करोड़ रुपये कॉरिडोर निर्माण के लिए सरकार से मंजूर कराना भी प्रशासन के लिए टेढ़ी खीर साबित होगा।
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वर्तमान में बांकेबिहारी मंदिर करीब तीन एकड़ में बना है। यह जमीन मदन मोहन मंदिर ट्रस्ट के नाम पर है। प्रशासन को इसके अलावा 5.65 एकड़ जमीन कॉरिडोर निर्माण के लिए चाहिए। जो जमीन चाहिए उस पर करीब 300 निर्माण हैं। इन निर्माणों के स्वामियों से प्रशासन को जमीन लेना चुनौती भरा होगा। जमीन लेने के लिए डीएम की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन होगा, जो कि जमीन स्वामियों के साथ वार्ता करेगी।
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इसके बाद बाजार भाव देखेगी। इसमें प्रयास रहेगा कि करार नियमावली के तहत जमीन सरकार के खाते में दर्ज करा दी जाए, जिससे की किसी भी विरोधाभास की स्थिति का सामना न करना पड़े। मगर, प्रशासन को यह इतना आसान तरीके से होता नजर नहीं आ रहा है। इसीलिए प्रशासन ने प्लान किया है कि जिन लोगों की जमीन ली जाएगी, उनको कॉरिडोर के भीतर बनने वाली दुकानों को आवंटित किया जाएगा, जिससे की उनको रोजगार मिल सके।

सरकार से बजट मिलते ही शुरू हो जाएगा कॉरिडोर का काम
जिला प्रशासन अब सरकार से बजट मिलने के इंतजार में है। बजट जारी होते ही स्थानीय प्रशासन सबसे पहले कॉरिडोर के लिए जमीन खरीदने का काम करेगा। इसके बाद दूसरे चरण में निर्माणों को ध्वस्त करेगा। इसके बाद तीसरे चरण में कॉरिडोर के निर्माण कार्य के लिए किसी एक संस्था का चयन किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस पूरी प्रक्रिया में कम से कम डेढ़ साल का वक्त लग जाएगा।
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कॉरिडोर नहीं बनेगा दर्शन की राह में बाधा
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया है कि श्रद्धालुओं के दर्शन पर कॉरिडोर निर्माण का असर नहीं पड़ना चाहिए। इसको लेकर जिला प्रशासन ने भी प्लान बनाना शुरू कर दिया है। जिला प्रशासन के अनुसार कॉरिडोर का कार्य गेट संख्या एक के बाद से होगा। ऐसे में मुख्य मंदिर परिसर पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

वर्तमान मंदिर परिसर का ऑडिट करेगी आईआईटी की टीम
श्रीबांकेबिहारी के कॉरिडोर का निर्माण फेस-1 में होने के बाद प्रशासन वर्तमान मंदिर परिसर का ऑडिट देश के किसी एक आईआईटी की टीम से कराएगा। टीम से यह पता कराया जाएगा कि पुराने परिसर में जीर्णोद्धार की संभावनाएं हैं या फिर इसे गिराकर नया परिसर बनाया जाए। प्लान है कि जब फेस-1 में कॉरिडोर बनकर तैयार हो जाएगा तो बांकेबिहारी के श्रीविग्रह कॉरिडोर में स्थापित कर दिए जाएंगे, जिससे की लोग दर्शन लाभ पा सकें। इसके बाद जब मूल परिसर का निर्माण या जीर्णोद्धार कार्य पूरा हो जाएगा तो फिर से बांकेबिहारी को उनके स्थान पर विराजित कर दिया जाएगा।

सरकार के नाम पर दर्ज होगी कॉरिडोर की जमीन
कॉरिडोर के लिए जमीन खरीदने का पैसा अब सरकार को खर्च करना होगा। ऐसे में यह साफ है कि कॉरिडोर की जमीन सरकार के नाम पर ही दर्ज होगी। जबकि पूर्व में सरकार ने हाईकोर्ट में यह बात रखी थी कि कॉरिडोर निर्माण के लिए दान के पैसे का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे की सरकार का पैसा बचेगा। जमीन भी मंदिर परिसर के नाम पर दर्ज करा दी जाएगी। मगर, इस पर हाईकोर्ट में दूसरे पक्ष से सहमति नहीं बनी थी।

कॉरिडोर बनने के बाद पूजा-पाठ को छोड़ अन्य व्यवस्थाएं होगी प्रशासन के जिम्मे
काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर बांके बिहारी कॉरिडोर को संचालित करने की बात स्थानीय प्रशासन से लेकर शासन द्वारा कही जा रही है। बताया जा रहा है कि काशी में कॉरिडोर बनने के बाद वहां पूजा-पाठ का जिम्मा न्यास को दिया गया है। बाकी आरती का समय, पुजारी की नियुक्ति, बजट, निर्माण कार्य संबंधी फैसले या अन्य कोई प्रशासनिक व्यवस्था का फैसला जिला प्रशासन के हवाले हैं। ठीक उसी प्रकार से बांके बिहारी कॉरिडोर में व्यवस्थाएं लागू होंगी।
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