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Mathura: गोविंद नगर में विप्रा ने लगाए स्वामित्व के बोर्ड, खलबली

Fri, 02 Sep 2022 12:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 02 Sep 2022 12:13 AM IST
सार

अपर आयुक्त न्यायिक आगरा राजेश कुमार के नेतृत्व में जांच समिति ने शासन के आदेशानुसार तथ्यों को जुटाना शुरू कर दिया है। इसमें फिलहाल 1987 के बाद गोविंद नगर हाउसिंग सोसाइटी के सचिवों का डाटा जुटाया जा रहा है, जिनके द्वारा विकास प्राधिकरण को स्वामित्व दिए जाने के बाद भी जमीन की खरीद फरोख्त की गई।

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Mathura Vipra put up ownership boards in Govind Nagar, panic
गोविंद नगर में बने मकान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मथुरा की गोविंद नगर हाउसिंग सोसाइटी क्षेत्र में मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण ने स्वामित्व के बोर्ड लगा दिए हैं। इन बोर्डों को देख गोविंद नगर निवासी हजारों परिवारों में खलबली मच गई है। इसके साथ ही बगैर नक्शा मकान निर्माण और प्लांटों की बिक्री के लिए उत्तरदायित्व तय करने के लिए शासन द्वारा गठित समिति ने जांच शुरू कर दी है। इसमें अवैध निर्माण के लिए विकास प्राधिकरण के अभियंता और हाउसिंग सोसाइटी के सचिवों का रिकॉर्ड एकत्रित किया जा रहा है।
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गोविंद नगर हाउसिंग सोसाइटी की 164 एकड़ जमीन को सन 1987 में विकास प्राधिकरण को दिए जाने के बाद भी यहां जमीनों की बिक्री और उन पर अवैध निर्माण को लेकर जांच शुरू हो गई है। अपर आयुक्त न्यायिक आगरा राजेश कुमार के नेतृत्व में जांच समिति ने शासन के आदेशानुसार तथ्यों को जुटाना शुरू कर दिया है। इसमें फिलहाल 1987 के बाद गोविंद नगर हाउसिंग सोसाइटी के सचिवों का डाटा जुटाया जा रहा है, जिनके द्वारा विकास प्राधिकरण को स्वामित्व दिए जाने के बाद भी जमीन की खरीद फरोख्त की गई। इसके अलावा यहां शासन द्वारा सोसाइटी क्षेत्र में निर्माण और नक्शा स्वीकृति प्रतिबंधित किए जाने के बावजूद हुए अवैध निर्माण के लिए विकास प्राधिकरण के जिम्मेदार अभियंताओं की भी जानकारी की जा रही है। यहां आवासीय ही नहीं बडे़ स्तर पर स्कूल, कॉलेज और व्यवसायिक भवनों का निर्माण हो चुका है।
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पीड़ित परिवार बोले, प्राधिकरण अपनी बात से पीछे हट रहा 

गोविंद नगर क्षेत्र में करीब 5 हजार निर्माण हैं। अब इन लोगों में विकास प्राधिकरण के कदम से खलबली मची हुई है। स्थानीय निवासी कल्याण सिंह, राजपाल सिंह आदि का कहना है कि यह सोसाइटी 1948 में बनाई गई थी। इसके अधीन 2016.6 एकड़ जमीन दी गई थी, जिसका भुगतान सोसाइटी द्वारा किया गया। सरकार ने बगैर सत्यापन के ही 164.40 एकड़ जमीन प्राधिकरण को दे दी, जिसमें 80 प्रतिशत रजिस्ट्री सोसाइटी के सदस्यों को 1987 से पूर्व ही हो चुकी थीं। सरकार के फैसले के खिलाफ स्थानीय निवासियों की सेशन कोर्ट में याचिका पर फैसला भी प्राधिकरण के खिलाफ आया। प्राधिकरण को हाईकोर्ट में भी हार का सामना करना पड़ा। 
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विकास प्राधिकरण बोर्ड और विभिन्न कमेटियों ने सरकार को जमीन न लेने तथा 115 रुपये प्रति वर्ग मीटर के तहत बाह्य शुल्क निर्माण कर्ताओं से प्राप्त करने का प्रस्ताव भी दिया था। इस पर एक करोड़ रुपये सोसाइटी ने प्राधिकरण में इस आशय से जमा कराया कि कोई स्पष्ट फैसला न होने तक प्राधिकरण दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेगा। लेकिन अब प्राधिकरण द्वारा गोविंद नगर के विभिन्न सेक्टरों में बोर्ड लगा दिए गए हैं। यह लोगों को डराने धमकाने की प्रक्रिया है।
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