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Mathura: ठाकुर बांकेबिहारी के दर्शन के लिए लगी के लिए लंबी कतार, सिस्टम है पूरी तरह फेल

Sun, 09 Jul 2023 10:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 09 Jul 2023 10:37 AM IST
सार

मंदिर के आसपास और अंदर भीड़ न हो इसके लिए पुलिस व प्रशासन ने समय-समय पर कई इंतजाम किए हैं, बावजूद इसके अव्यवस्था कायम है। खासकर वीकेंड पर सारी व्यवस्थाएं धरी रह जाती हैं

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Devotees of Banke are suffering from the failure of the system
वृंदावन की गलियों में लगी भक्तों की कतार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वृंदावन में ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर में और दिनों की तुलना में शनिवार को कम श्रद्धालु पहुंचे बावजूद इसके उनकी दुश्वारियां कम नहीं हुई। भीड़ में धक्का-मुक्की से जूझते हुए श्रद्धालु मंदिर तक पहुंच पाए और प्रभु के दर्शन किए। आलम यह रहा कि पुलिस चौकी से मंदिर तक और संकरी हुई गली में अफरा-तफरी मची रही। मंदिर में घुसने पर ऑक्सीजन का स्तर कम होने का अहसास हुआ और लोगों का दम घुटने लगा।
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ठाकुरी श्रीबांकेबिहारी महाराज के दर्शन करने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को एक घंटे से अधिक का समय लग रहा है। हरिनिकुंज चौराहा से रेलिंग में लगकर पुलिस चौकी तक पहुंचते-पहुंचते ही आधे घंटे से ज्यादा समय लग जाता है। यहां तक सड़क की चौड़ाई लगभग 10 तो कहीं 15 फुट चौड़ी है। पुलिस चौकी से मंदिर तक करीब छह से आठ फुट रह जाती है। यहां से मशक्कत के साथ आगे बढ़ना और फिर मंदिर में बमुश्किल 30-40 सेकंड में दर्शन कर बाहर निकल आने तक पसीना छूट जाता है। बच्चे बिलबिलाने लगते हैं बुजुर्गों की सांसें फूल जाती हैं।
 
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जूतों-चप्पलों के लिए उलझते दिखे भक्त

गेट संख्या दो और तीन से प्रवेश करने वाले अनेक श्रद्धालु अपने जूते चप्पल मंदिर के चबूतरे तक ले आते हैं। गेट एक और चार से निकासी होती है तो जूते चप्पल लेने को गार्डों और पुलिसकर्मियों से उलझते नजर आए। चूंकि यहां प्रवेश और निकास मार्गों के बीच बैरियर है। इस बैरियर में से वीआईपी निकाले जाते हैं या सेवायतों के यजमान, लेकिन अन्य लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है।
 
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उद्घोषणा के बाद भी पहुंचते हैं जूते पहनकर

हरिनिकुंज चौराहा, जुगल घाट से रेलिंग में लगना शुरू होता है। यहां लगे स्पीकर पर जूते चप्पल उतारकर आने की उद्घोषणा होती रहती है, फिर भी श्रद्धालु पहनकर जाते हैं और मंदिर के चबूतरे पर उतारकर प्रवेश गेट संख्या दो और तीन से करते हैं व एक और चार से निकलते हैं। इन सभी के बीच बैरियर लगा है। ऐसी स्थिति में व्यवस्था बिगड़ती है और भगदड़ के हालात बनते हैं।
 

दो नंबर गेट हो जाता है बंद

दो नंबर गेट के लिए बाजार से भी रास्ता है, जिसे मंदिर में भीड़ अधिक होने के बाद बंद कर दिया जाता है। इससे मुख्य मार्ग पर भीड़ जमा हो जाती है। आने-जाने वालों को परेशानी होती है। जब शटर खुलता है तो श्रद्धालु भागमभाग करते हैं।
 

चश्मा ले उड़ते हैं

मंदिर पर बंदरों को रोकने का कोई इंतज़ाम नहीं है। पर्स, चश्मा और मोबाइल फोन छीन ले जाते हैं। हालांकि फ्रूटी देने पर छोड़ देते हैं।
 

भीड़ से बचाकर दर्शन कराऊंगा

गेट दो और वीआईपी मार्ग के किए जाने वाले रास्ते पर ''''भीड़ से बचाकर दर्शन कराऊंगा'''' की आवाज सुनाई देती है। वीआईपी दर्शन के नाम पर श्रद्धालुओं से अच्छी खासी रकम ले ली जाती है। ऐसे लोगों पर पुलिस का कोई नियंत्रण नहीं है।
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