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पुलिस भर्ती परीक्षा से पहले दो मुन्नाभाई दबोचे
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Mon, 15 Dec 2014 03:20 PM IST
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उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती प्रोन्नति बोर्ड लखनऊ द्वारा झांसी में कराई जा रही 35 हजार सिपाहियों की भर्ती में मुख्य परीक्षा पास कराने की गारंटी लेने वाले दो मुन्ना भाइयों को मांट पुलिस ने शनिवार रात दबोच लिया। दोनों मांट में फर्जी प्रवेश पत्र बनाकर इस परीक्षा में शामिल होने की तैयारी में थे। उनके साथ ही तीन और लोग मांट पुलिस के हत्थे चढ़े हैं।
रविवार को आयोजित की गई परीक्षा में विजय कुमार निवासी गांव शालपुर थाना टप्पल अलीगढ़ और योगेश कुमार निवासी गांव अभयपुर थाना नौहझील को शामिल होना था। विजय कुमार और योगेश के परिवारीजनों ने अपने रिश्तेदार जितेंद्र उर्फ जीतू, अशोक उर्फ अक्षय कुमार निवासी नागल से उनके स्थान पर परीक्षा में बैठने का सौदा किया।
मामले में शनिवार रात जितेंद्र, अशोक, नौरंगी निवासी नगला बिंदा और अन्य गांव जेसवा निवासी राजू के मांट स्थित कंप्यूटर सेंटर पर फर्जी प्रवेश पत्र बना रहे थे। विजय की जगह पर जितेंद्र और योगेश की जगह अशोक का फोटो लगाकर प्रवेश पत्र की कलर स्केन कापी निकाली जा रही थी।
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देर रात कंप्यूटर की दुकान खुली देख मांट पुलिस ने टोका तो विजय वहां से भाग लिया। पुलिस ने राजू, नौरंगी, योगेश, अशोक और जितेंद्र को पकड़ लिया। उनके कब्जे से उत्तर प्रदेश पुलिस प्रोन्नति भर्ती परीक्षा बोर्ड लखनऊ के दो फर्जी प्रवेश पत्र, 85 हजार रुपये, कलर स्कैनर, कंप्यूटर, टाटा सूमो गोल्ड गाड़ी बरामद की है। एसपी देहात शगुन गौतम ने बताया कि पुलिस भर्ती परीक्षा में एक व्यक्ति को पास कराने के लिए जितेंद्र और अशोक 50-50 हजार रुपये वसूलते थे। इसके एवज में वे 40-40 हजार वसूल चुके थे। जितेंद्र और अशोक दोनों बीएससी द्वितीय वर्ष के छात्र हैं।
दिल्ली मेें सीडीएस की तैयारी कर रहे थे
दिल्ली के मुखर्जी नगर में रहकर सीडीएस की तैयारी कर रहे दोनोें मुन्ना भाई जितेंद्र और अशोक दोनों बीएससी पीसीएम ग्रुप द्वितीय वर्ष के छात्र हैं। दोनों प्रवेश पत्र बनाकर टाटा सूमो से रात में ही झांसी के लिए निकलने वाले थे। उससे पहले ही उन्हें मांट में दबोच लिया गया। पुलिस भर्ती परीक्षा पास कराने की भूमिका कंप्यूटर सेंटर संचालक राजू ने रची थी। पकड़ा गया जीतू कंप्यूटर सेंटर संचालक के मामा का लड़का है और अशोक जीतू का मित्र है।
एक नंबर के दो प्रवेश पत्र देख ठनका माथा
पुलिस भर्ती परीक्षा के प्रवेश पत्रों में एक ही रोल नंबर के दो प्रवेश पत्र और दोनों में अलग-अलग फोटो देखकर पुलिस कर्मियों का माथा ठनका। पुलिस के अनुसार दुकान खुलने का कारण पूछने पर विजय भाग गया तो शक होने पर कागजातों की जांच की गई।
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रविवार को आयोजित की गई परीक्षा में विजय कुमार निवासी गांव शालपुर थाना टप्पल अलीगढ़ और योगेश कुमार निवासी गांव अभयपुर थाना नौहझील को शामिल होना था। विजय कुमार और योगेश के परिवारीजनों ने अपने रिश्तेदार जितेंद्र उर्फ जीतू, अशोक उर्फ अक्षय कुमार निवासी नागल से उनके स्थान पर परीक्षा में बैठने का सौदा किया।
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मामले में शनिवार रात जितेंद्र, अशोक, नौरंगी निवासी नगला बिंदा और अन्य गांव जेसवा निवासी राजू के मांट स्थित कंप्यूटर सेंटर पर फर्जी प्रवेश पत्र बना रहे थे। विजय की जगह पर जितेंद्र और योगेश की जगह अशोक का फोटो लगाकर प्रवेश पत्र की कलर स्केन कापी निकाली जा रही थी।
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देर रात कंप्यूटर की दुकान खुली देख मांट पुलिस ने टोका तो विजय वहां से भाग लिया। पुलिस ने राजू, नौरंगी, योगेश, अशोक और जितेंद्र को पकड़ लिया। उनके कब्जे से उत्तर प्रदेश पुलिस प्रोन्नति भर्ती परीक्षा बोर्ड लखनऊ के दो फर्जी प्रवेश पत्र, 85 हजार रुपये, कलर स्कैनर, कंप्यूटर, टाटा सूमो गोल्ड गाड़ी बरामद की है। एसपी देहात शगुन गौतम ने बताया कि पुलिस भर्ती परीक्षा में एक व्यक्ति को पास कराने के लिए जितेंद्र और अशोक 50-50 हजार रुपये वसूलते थे। इसके एवज में वे 40-40 हजार वसूल चुके थे। जितेंद्र और अशोक दोनों बीएससी द्वितीय वर्ष के छात्र हैं।
दिल्ली मेें सीडीएस की तैयारी कर रहे थे
दिल्ली के मुखर्जी नगर में रहकर सीडीएस की तैयारी कर रहे दोनोें मुन्ना भाई जितेंद्र और अशोक दोनों बीएससी पीसीएम ग्रुप द्वितीय वर्ष के छात्र हैं। दोनों प्रवेश पत्र बनाकर टाटा सूमो से रात में ही झांसी के लिए निकलने वाले थे। उससे पहले ही उन्हें मांट में दबोच लिया गया। पुलिस भर्ती परीक्षा पास कराने की भूमिका कंप्यूटर सेंटर संचालक राजू ने रची थी। पकड़ा गया जीतू कंप्यूटर सेंटर संचालक के मामा का लड़का है और अशोक जीतू का मित्र है।
एक नंबर के दो प्रवेश पत्र देख ठनका माथा
पुलिस भर्ती परीक्षा के प्रवेश पत्रों में एक ही रोल नंबर के दो प्रवेश पत्र और दोनों में अलग-अलग फोटो देखकर पुलिस कर्मियों का माथा ठनका। पुलिस के अनुसार दुकान खुलने का कारण पूछने पर विजय भाग गया तो शक होने पर कागजातों की जांच की गई।