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अनुदान के लालच में बांट रहे ‘अंधेरा’

Tue, 06 Jan 2015 12:07 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथ्ाुरा
ब्यूरो, अमर उजाला मथ्ाुरा Updated Tue, 06 Jan 2015 12:07 AM IST
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?fraud in eye operation camp in mathura
अंधता निवारण कार्यक्र्रम में सरकारी अनुदान हासिल करने के लिए एनजीओ में होड़ लगी रहती है। अनुदान के लिए तय ऑपरेशन की संख्या पूरी करने के लिए हर जोड़-तोड़ की जाती है। यहीं से फर्जीवाड़े की भी शुरुआत होती है।
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स्वास्थ्य विभाग के सूत्र बताते हैं वित्तीय वर्ष 2014-15 के लिए अंधता निवारण कार्यक्रम के लिए 13,100 नेत्र ऑपरेशन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें से 25 फीसदी लक्ष्य के लिए एनजीओ को अनुदान दिया जाता है। ये अनुदान प्रति ऑपरेशन एक हजार रुपया निर्धारित है।
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इस अनुदान को देने से पहले एनजीओ द्वारा किए गए नेत्र ऑपरेशन के दस फीसदी संख्या का स्वास्थ्य विभाग के अफसर वेरीफिकेशन करते हैं। इस वेरीफिकेशन पर खरा उतरने के लिए ‘खेल’ किया जाता है। मरीजों की जुगाड़ की जाती है, उचित साफ-सफाई, पूरे संसाधन बिना आपरेशन किए जाते हैं। जांच में उंगली न उठे तो अधिकारियों तक भी पहुंच बनाई जाती है।
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अफसरों से सांठगांठ के आलम का ही नतीजा है कि श्रीकिशन सिंह मेमोरियल सेवा संस्थान, बांके बिहारी मानव कल्याणं करोति समिति (ये समिति ही बांकेबिहारी नेत्र चिकित्सालय संस्था को संचालित करती है) जैसे एनजीओ खूब फलफूल रहे हैं।

कागजों में होता है नियमित निरीक्षण!
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कार्यक्रम राष्ट्रीय अंधता निवारण
में नेत्र ऑपरेशन के लक्ष्य की पूर्ति के लिए एनजीओ को आमंत्रित किया जाता है। प्रावधान है कि इन एनजीओ के आपरेशन थियेटर, आपरेशन करने वाले चिकित्सक, पेरा मेडिकल स्टाफ का नियमित सत्यापन किया जाए। लेकिन ये सत्यापन महज कागजों में ही होता है और घटना घटित हो जाती है। स्वास्थ्य विभाग इन गंभीर सवालों पर चुप है।


दान के लिए प्रभावित करना भी
मथुरा-वृंदावन में बड़ी संख्या में धनवान लोगों का आगमन होता है। एनजीओ इनको प्रभावित करने के लिए भी अधिक से अधिक संख्या में चिकित्सा कार्य दिखाते हैं। कम संसाधन और समय में अधिक नेत्र आपरेशन करने के लिए जल्दबाजी और लापरवाही मरीजों को भारी पड़ती है।
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