{"_id":"2-90505","slug":"Mathura-90505-2","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुरक्षा को ताक पर रखकर हो रहा यलो जोन में निर्माण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुरक्षा को ताक पर रखकर हो रहा यलो जोन में निर्माण
Mathura
Updated Tue, 25 Nov 2014 05:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मथुरा। अतिसंवेदनशील श्रीकृष्ण जन्मस्थान की सुरक्षा को ताक पर रखकर यलोजोन में धड़ल्ले से निर्माण किए जा रहे हैं। हद तो इस बात की है कि यहां किए जा रहे निर्माण और सुरक्षा उपायों के पालन किए जाने की कोई जानकारी जिला प्रशासन और अग्नि शमन विभाग के पास नहीं है। ऐसे में रविवार को रेस्टोरेंट में हुई अग्निकांड की घटना ने पूरी सुरक्षा व्यवस्था पर ही सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। अफसरों की लापरवाही किसी दिन बड़े हादसे की वजह बन सकती है।
लगभग एक वर्ष पूर्व आरटीआई कार्यकर्ताओं की संस्था ‘परिवर्तन’ के जिला अध्यक्ष हरिओम सिंह को जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी में अग्नि शमन विभाग ने अवगत कराया था कि उनके पास ऐसा कोई रिकार्ड नहीं है। ऐसे में जब इन भवनों का रिकॉर्ड ही विभाग के पास नहीं है तो इनमें अग्नि से बचाव के उपाय और उनकी जांच की गंभीरता का अंदाजा स्वयं लगाया जा सकता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि इसकी सूचना होने के बावजूद प्रशासन और अग्निशमन विभाग ने अभी तक न तो भवनों का सर्वे ही कराया और न ही अग्नि से बचाव के उपायों की जानकारी ही जुटाई। गौरतलब है नेशनल बिल्डिंग कोड-2005 में दो मंजिला या उससे बड़े भवन, होटल, गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट आदि में आग से बचाव के लिये उपायों का प्रावधान किया गया है।
क्या कहते हैं अधिकारी
यलो जोन में बहुमंजिला भवन तथा उनमें आग से बचाव के उपायों को लेकर किसी प्रकार का कोई सर्वे नहीं किया गया है। यहां आग लगने के बाद अग्नि शमन विभाग ही उस पर नियंत्रण करता है।
विज्ञापन
सुरेंद्र कुमार शर्मा
एडीएम कानून व्यवस्था, मथुरा।
विज्ञापन
लगभग एक वर्ष पूर्व आरटीआई कार्यकर्ताओं की संस्था ‘परिवर्तन’ के जिला अध्यक्ष हरिओम सिंह को जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी में अग्नि शमन विभाग ने अवगत कराया था कि उनके पास ऐसा कोई रिकार्ड नहीं है। ऐसे में जब इन भवनों का रिकॉर्ड ही विभाग के पास नहीं है तो इनमें अग्नि से बचाव के उपाय और उनकी जांच की गंभीरता का अंदाजा स्वयं लगाया जा सकता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि इसकी सूचना होने के बावजूद प्रशासन और अग्निशमन विभाग ने अभी तक न तो भवनों का सर्वे ही कराया और न ही अग्नि से बचाव के उपायों की जानकारी ही जुटाई। गौरतलब है नेशनल बिल्डिंग कोड-2005 में दो मंजिला या उससे बड़े भवन, होटल, गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट आदि में आग से बचाव के लिये उपायों का प्रावधान किया गया है।
विज्ञापन
क्या कहते हैं अधिकारी
यलो जोन में बहुमंजिला भवन तथा उनमें आग से बचाव के उपायों को लेकर किसी प्रकार का कोई सर्वे नहीं किया गया है। यहां आग लगने के बाद अग्नि शमन विभाग ही उस पर नियंत्रण करता है।
विज्ञापन
सुरेंद्र कुमार शर्मा
एडीएम कानून व्यवस्था, मथुरा।