सेहत की बात: आधुनिकता की दौड़ बना रही सर्वाइकल का मरीज, जानें क्या कहते हैं डॉक्टर? कारण, लक्षण और बचाव
आधुनिकता की दौड़ में लोग सर्वाइकल की चपेट में आ रहे हैं। मैनपुरी जिला अस्पताल में प्रतिदिन 40 से 50 सर्वाइकल के मरीज पहुंच रहे हैं।
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उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन सर्वाइकल से पीड़ित मरीजों की संख्या 40 से 50 देखी जा रही है। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. नवीन माहौर ने बताया कि इस बीमारी का दर्द ठीक होने के बाद भी कभी भी उभर सकता है। भविष्य में मरीज को नियमित व्यायाम के साथ ही गर्दन सीधे रखकर बैठना पड़ेगा। नहीं तो बीमारी लाइलाज बन सकती है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार वर्तमान समय में 15 से 30 साल की उम्र में युवक- युवतियों में सर्वाइकल की बीमारी की चपेट में आ रहे हैं।
दरअसल दौड़भाग भरी जिंदगी और अनियमित दिनचर्या के बीच घंटों मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर के इस्तेमाल ने युवाओं को नया दर्द दे दिया है। कंप्यूटर और मोबाइल पर घंटों जूझने के कारण वे तेजी से सर्वाइकल की चपेट में आकर कराह रहे हैं। बैठने की गलत आदत व व्यायाम से दूरी के चलते इस बीमारी से परेशान 40 से 50 लोग रोजाना जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं।
वर्तमान दौर में हर हाथ में स्मार्टफोन है। युवा वर्ग दिनभर मोबाइल व लैपटॉप से ही चिपका रहता है। सोशल नेटवर्किंग साइट के प्रति लोगों का रुझान तेजी से बढ़ता जा रहा है। घंटों मोबाइल, लैपटॉप देखते रहने से सीधे बैठ पाना संभव नहीं हो पाता। कुछ देर बाद गर्दन झुकाकर लोग उसमें व्यस्त हो जाते हैं। यही गलत आदत लोगों को बीमारियों का शिकार बना रही हैं।
क्या है सर्वाइकल
हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. नवीन माहौर बताते हैं कि गर्दन में सात हड्डियां होती हैं। इनके बीच से दिमाग से स्पाइनल कार्ड नामक नस निकलती है। यह नस ही शरीर को नियंत्रित करती है। गर्दन से स्पाइनल कार्ड की कई शाखाएं निकलकर दोनों हाथों में जाती हैं। गर्दन में झुकाव व टेढ़ी होने से मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है। धीरे-धीरे गर्दन की हड्डियों में बदलाव होने से यह शाखाएं दबने लगती हैं। इससे जहां तक नसें जाती हैं, शरीर के उन अंगों में दर्द झुनझुनी, सुन्नपन के साथ ताकत व संवेदना में से किसी एक या दो में कमी आने लगती है।इन कारणों से आ रही दिक्कत
- बाइक का अधिक प्रयोग
- मोबाइल पर घंटों सिर झुकाकर बैठना
- लैपटॉप चलाते समय सिर लगातार नीचे रखना
- खराब सड़कों पर अधिक देर वाहनों से सफर करना
लक्षण
- गर्दन में पीछे हड्डी में दर्द होना
- शरीर के अन्य हिस्सों में दर्द होना
- दर्द के साथ ही सुन्नपन की समस्या
- चक्कर आना
बचाव के उपाय
- नियमित व्यायाम करें
- आउटडोर गेम खेलें
- कुर्सी पर सीधे बैठें
- रीढ़ की हड्डी सीधी रखें
- बैठते समय गर्दन न झुकाएं