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Mainpuri News: मृतक कैसे कर सकता वसियत, जमानत खारिज
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मैनपुरी। मृत व्यक्ति को जीवित दर्शाने और उसकी कृषि भूमि की फर्जी वसीयत कराने के मामले में सुनवाई करते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश रूपेश रंजन ने आरोपी महिला की जमानत याचिका निरस्त कर दी है। कोर्ट ने मामले को गंभीर आर्थिक और आपराधिक साजिश मानते हुए जमानत देने से इन्कार कर दिया।
थाना औंछा क्षेत्र के गांव नाहिली कठेंगरा निवासी जानकी देवी के पति स्वामीचरन की मृत्यु 14 मई 2016 को हो चुकी थी। गांव की रहने वाली विमला देवी ने आपराधिक षड्यंत्र के तहत 30 अगस्त 2024 को एक व्यक्ति को स्वामीचरन बनाकर फर्जी आधार कार्ड तैयार कराया और खुद को मौसेरी बहन बताकर उप-निबंधक कार्यालय में कृषि भूमि की फर्जी वसीयत अपने नाम करा ली। इसके बाद 27 सितंबर 2024 को भूमि का दाखिल-खारिज भी करा लिया था। मुकदमा जिला एवं सत्र न्यायालय में चल रहा है, सुनवाई के दौरान पत्रावली के अवलोकन से स्पष्ट हुआ कि मृतक का मूल मृत्यु प्रमाण पत्र व परिवार रजिस्टर में मृत्यु वर्ष 2016 दर्ज है, जबकि आरोपी पक्ष का मृत्यु प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब व्यक्ति की मृत्यु 2016 में हो चुकी थी, तब वह 2024 में वसीयत कैसे कर सकता है। अदालत ने विमला देवी का जमानत प्रार्थनापत्र खारिज कर दिया।
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थाना औंछा क्षेत्र के गांव नाहिली कठेंगरा निवासी जानकी देवी के पति स्वामीचरन की मृत्यु 14 मई 2016 को हो चुकी थी। गांव की रहने वाली विमला देवी ने आपराधिक षड्यंत्र के तहत 30 अगस्त 2024 को एक व्यक्ति को स्वामीचरन बनाकर फर्जी आधार कार्ड तैयार कराया और खुद को मौसेरी बहन बताकर उप-निबंधक कार्यालय में कृषि भूमि की फर्जी वसीयत अपने नाम करा ली। इसके बाद 27 सितंबर 2024 को भूमि का दाखिल-खारिज भी करा लिया था। मुकदमा जिला एवं सत्र न्यायालय में चल रहा है, सुनवाई के दौरान पत्रावली के अवलोकन से स्पष्ट हुआ कि मृतक का मूल मृत्यु प्रमाण पत्र व परिवार रजिस्टर में मृत्यु वर्ष 2016 दर्ज है, जबकि आरोपी पक्ष का मृत्यु प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब व्यक्ति की मृत्यु 2016 में हो चुकी थी, तब वह 2024 में वसीयत कैसे कर सकता है। अदालत ने विमला देवी का जमानत प्रार्थनापत्र खारिज कर दिया।
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