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गृहस्थी चलाने को तोड़नी पड़ रही बच्चों की गुल्लक
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
Updated Thu, 24 Nov 2016 11:08 PM IST
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गृहस्थी चलाने को तोड़नी पड़ रही बच्चों की गुल्लक
- फोटो : अमर उजाला
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आम जनता को इस समय नए नोटों के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है, पुराने नोट बाजार में चल नहीं रहे हैं। ऐसे में गृहस्थी पर संकट आ गया है। दाल, चीनी और आटे से लेकर सब्जी तक के लिए रुपयों की जुगाड़ करना पड़ रही है। इसके चलते बच्चों की गुल्लक तक तोड़नी पड़ रही है।
मोहल्ला छपट्टी में रहने वाली प्रीती पिछले पांच दिनों से परेशान हैं। पति के पास टूटे पैसों की किल्लत है। यहां तक कि वह अपने वर्करों को भी रुपये नहीं दे पा रहे हैं। इसके चलते गुरुवार को उन्होंने घर में रखी बच्चों की गुल्लक तोड़ दी। उन्हीं से काम चलाया जा रहा है। वह कहती हैं कि बडे़ नोट बंद होने से काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। एटीएम में भीड़ होने के चलते नोट निकाल नहीं पा रहे हैं। ऐसे में जितने रुपये हैं, उन्हीं से काम चलाया जा रहा है। फिलहाल किसी तरह गृहस्थी की गाड़ी खींची जा रही है। एक दिन दाल बनती है तो एक दिन सब्जी। बच्चे भी मजबूरी समझ कर चुप हैं।
ये समस्या अकेली प्रीति की नहीं है बल्कि तमाम घरों में रसोई का बजट इस समय पूरी तरह गड़बड़ा गया है। कटरा निवासी बसीरन राईन का कहना है कि अचानक नोटों पर पाबंदी लगाए जाने का फैसला अब सामान्य परिवारों के सामने परेशानियां पैदा कर रहा है। ऐसे में घर के अन्य खर्चों में कटौती करके बजट को नियंत्रित करना पड़ रहा है। बाजार से अन्य खरीदारी पर भी हाथ खींच लिए हैं। जब तक सब कुछ सामान्य नहीं हो जाता, ऐसे ही हाथ तंग रखने होंगे।
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मोहल्ला छपट्टी में रहने वाली प्रीती पिछले पांच दिनों से परेशान हैं। पति के पास टूटे पैसों की किल्लत है। यहां तक कि वह अपने वर्करों को भी रुपये नहीं दे पा रहे हैं। इसके चलते गुरुवार को उन्होंने घर में रखी बच्चों की गुल्लक तोड़ दी। उन्हीं से काम चलाया जा रहा है। वह कहती हैं कि बडे़ नोट बंद होने से काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। एटीएम में भीड़ होने के चलते नोट निकाल नहीं पा रहे हैं। ऐसे में जितने रुपये हैं, उन्हीं से काम चलाया जा रहा है। फिलहाल किसी तरह गृहस्थी की गाड़ी खींची जा रही है। एक दिन दाल बनती है तो एक दिन सब्जी। बच्चे भी मजबूरी समझ कर चुप हैं।
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ये समस्या अकेली प्रीति की नहीं है बल्कि तमाम घरों में रसोई का बजट इस समय पूरी तरह गड़बड़ा गया है। कटरा निवासी बसीरन राईन का कहना है कि अचानक नोटों पर पाबंदी लगाए जाने का फैसला अब सामान्य परिवारों के सामने परेशानियां पैदा कर रहा है। ऐसे में घर के अन्य खर्चों में कटौती करके बजट को नियंत्रित करना पड़ रहा है। बाजार से अन्य खरीदारी पर भी हाथ खींच लिए हैं। जब तक सब कुछ सामान्य नहीं हो जाता, ऐसे ही हाथ तंग रखने होंगे।
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