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सावन का पहला सोमवार, उमड़ेगा भक्तों का सैलाब
Thu, 09 Nov 2023 07:05 PM IST
Anonymous User
ब्यूरो, अमर उजाला मैनपुरी
ब्यूरो, अमर उजाला मैनपुरी
Published by: Anonymous User
Updated Thu, 09 Nov 2023 07:05 PM IST
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मैनपुरी। श्रावण मास के प्रथम सोमवार को लेकर मंदिरों में तैयारियां पूरी कर ली गईं हैं। शिवालयों को बड़े ही आकर्षक ढंग से सजाया गया है। प्राचीन भीमसेन मंदिर को विद्युत की रोशनी और फूलों से सजाया गया है। श्रावण मास के पहले सोमवार को भगवान भीमसेन का फूलों द्वारा भव्य शृंगार किया जाएगा। उधर घरों में भी लोगों ने व्रत और भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए तैयारियां कर ली हैं।
सावन के पहले सोमवार के लिए जिले भर के शिवालयों में विभिन्न धार्मिक आयोजनों की तैयारियां की गई हैं। शिव मंदिरों को बड़े ही आकर्षक ढंग से सजाया गया है। सुबह से देर शाम तक भीमसेन मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाने का काम जारी रहा। थर्माकोल और प्लाई से मंदिर को सजाने के लिए कारीगर देर रात जुटे रहे। वहीं रंग-बिरंगी लाइटें भी लगाई जा रहीं हैं। चांदेश्वर मंदिर को भी पहले सोमवार के लिए आकर्षक ढंग से सजाया गया है। इन दोनों ही मंदिरों पर शिव भक्तों की सर्वाधिक भीड़ उमड़ेगी। श्रद्धालुओं की भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा के भी इंतजाम किए जा रहे हैं। जिले के प्रमुख शिव मंदिरों पर पुलिस बल तैनात किया जा रहा है।
उधर सावन के प्रथम सोमवार पर व्रत रखने और भगवान शिव की पूजा अर्चना के लिए घरों में तैयारियां की गईं। रविवार को व्रत और पूजा अर्चना के लिए आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी के लिए बाजारों में खासी भीड़ भाड़ नजर आई। सिंघाड़े की मिगी, कूटू का आटा आदि बाजार में सज गए हैं। वहीं मंदिरों में धतूरा, बेल पत्र, फूल माला और प्रसाद आदि की दुकानें सज गईं हैं। करहल, किशनी, बेवर, घिरोर, कुरावली, भोगांव क्षेत्र के शिव मंदिरों का आकर्षक ढंग से सजाया गया है।
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पांडवों ने की थी भगवान भीमसेन की पूजा
मैनपुरी। प्राचीन श्री भीमसेन मंदिर अपने आगोश में तमाम पौराणिक गाथाएं समेटे है। कहा जाता है कि यहां अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने भगवान भीमसेन की पूजा की थी। महर्षि मार्कंडेय ने भी भगवान भीमसेन की साधना की थी। इन दिनों मंदिर में जहां भक्ति रसधारा बह रही है वहीं हजारों श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा अर्चना के लिए उमड़ रहे हैं।
भगवान भीमसेन का वर्तमान मंदिर तो 12वीं शताब्दी में अपने स्वरूप में आया लेकिन भगवान भीमसेन का विग्रह पौराणिक काल का बताया जाता है। शहर के ईशान कोण में जहां मां शीतला देवी का मंदिर है वहीं आग्नेय कोण में भगवान भीमसेन विराजमान हैं। कहा जाता है कि उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों के बीच इस पावन नगरी की रक्षा के लिए शिवा और शिव को विराजमान किया गया है।
तीर्थस्थल बटेश्वर की भांति यहां भी भगवान शिव की प्रतिमा पद्मासन मुद्रा में है। विग्रह में बड़े-बड़े जटा जूट से अलंकृत चंद्रकला को मस्तक पर धारण करने वाले एवं बड़ी-बड़ी मूंछों से सुशोभित शिव का रूपांकन किया गया है। श्री भीमसेन मंदिर के बारे में किवदंती है कि अज्ञातवास के दौरान इच्छु नदी (वर्तमान में ईशन) के किनारे-किनारे बिठूर जाते समय पांडव यहां रुके थे। पांडवों ने भगवान भीमसेन की यहां पूजा अर्चना की थी।
संत गुलाब खां की मजार की भी होती है पूजा
बुजुर्गों के अनुसार करीब 200 वर्ष पूर्व भीमसेन मंदिर में महाशिवरात्रि पर भंडारा चल रहा था। इसी दौरान मुस्लिम संत गुलाब खां आए और अपने कमंडल में खीर परोसने को कहा। खीर परोसने वाले कमंडल में खीर डालते रहे लेकिन कमंडल नहीं भरा। जब यह बात पुजारी नरोत्तमदास तक पहुंची तो वह स्वयं अपने कमंडल से खीर परोसने लगे लेकिन लोग यह देख कर दंग रह गए कि न तो गुलाब खां का कमंडल ही भर रहा है और न ही नरोत्तमदास जी के कमंडल से खीर की धार टूट रही है। कहा जाता है कि दोनों संत गले मिले और संत गुलाब खां भी भीमसेन मंदिर में ही रहने लगे। मंदिर परिसर में गुलाब खां की मजार आज भी बनी हुई है। श्रद्धालु मजार की भी पूजा अर्चना करते हैं।
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सावन के पहले सोमवार के लिए जिले भर के शिवालयों में विभिन्न धार्मिक आयोजनों की तैयारियां की गई हैं। शिव मंदिरों को बड़े ही आकर्षक ढंग से सजाया गया है। सुबह से देर शाम तक भीमसेन मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाने का काम जारी रहा। थर्माकोल और प्लाई से मंदिर को सजाने के लिए कारीगर देर रात जुटे रहे। वहीं रंग-बिरंगी लाइटें भी लगाई जा रहीं हैं। चांदेश्वर मंदिर को भी पहले सोमवार के लिए आकर्षक ढंग से सजाया गया है। इन दोनों ही मंदिरों पर शिव भक्तों की सर्वाधिक भीड़ उमड़ेगी। श्रद्धालुओं की भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा के भी इंतजाम किए जा रहे हैं। जिले के प्रमुख शिव मंदिरों पर पुलिस बल तैनात किया जा रहा है।
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उधर सावन के प्रथम सोमवार पर व्रत रखने और भगवान शिव की पूजा अर्चना के लिए घरों में तैयारियां की गईं। रविवार को व्रत और पूजा अर्चना के लिए आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी के लिए बाजारों में खासी भीड़ भाड़ नजर आई। सिंघाड़े की मिगी, कूटू का आटा आदि बाजार में सज गए हैं। वहीं मंदिरों में धतूरा, बेल पत्र, फूल माला और प्रसाद आदि की दुकानें सज गईं हैं। करहल, किशनी, बेवर, घिरोर, कुरावली, भोगांव क्षेत्र के शिव मंदिरों का आकर्षक ढंग से सजाया गया है।
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पांडवों ने की थी भगवान भीमसेन की पूजा
मैनपुरी। प्राचीन श्री भीमसेन मंदिर अपने आगोश में तमाम पौराणिक गाथाएं समेटे है। कहा जाता है कि यहां अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने भगवान भीमसेन की पूजा की थी। महर्षि मार्कंडेय ने भी भगवान भीमसेन की साधना की थी। इन दिनों मंदिर में जहां भक्ति रसधारा बह रही है वहीं हजारों श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा अर्चना के लिए उमड़ रहे हैं।
भगवान भीमसेन का वर्तमान मंदिर तो 12वीं शताब्दी में अपने स्वरूप में आया लेकिन भगवान भीमसेन का विग्रह पौराणिक काल का बताया जाता है। शहर के ईशान कोण में जहां मां शीतला देवी का मंदिर है वहीं आग्नेय कोण में भगवान भीमसेन विराजमान हैं। कहा जाता है कि उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों के बीच इस पावन नगरी की रक्षा के लिए शिवा और शिव को विराजमान किया गया है।
तीर्थस्थल बटेश्वर की भांति यहां भी भगवान शिव की प्रतिमा पद्मासन मुद्रा में है। विग्रह में बड़े-बड़े जटा जूट से अलंकृत चंद्रकला को मस्तक पर धारण करने वाले एवं बड़ी-बड़ी मूंछों से सुशोभित शिव का रूपांकन किया गया है। श्री भीमसेन मंदिर के बारे में किवदंती है कि अज्ञातवास के दौरान इच्छु नदी (वर्तमान में ईशन) के किनारे-किनारे बिठूर जाते समय पांडव यहां रुके थे। पांडवों ने भगवान भीमसेन की यहां पूजा अर्चना की थी।
संत गुलाब खां की मजार की भी होती है पूजा
बुजुर्गों के अनुसार करीब 200 वर्ष पूर्व भीमसेन मंदिर में महाशिवरात्रि पर भंडारा चल रहा था। इसी दौरान मुस्लिम संत गुलाब खां आए और अपने कमंडल में खीर परोसने को कहा। खीर परोसने वाले कमंडल में खीर डालते रहे लेकिन कमंडल नहीं भरा। जब यह बात पुजारी नरोत्तमदास तक पहुंची तो वह स्वयं अपने कमंडल से खीर परोसने लगे लेकिन लोग यह देख कर दंग रह गए कि न तो गुलाब खां का कमंडल ही भर रहा है और न ही नरोत्तमदास जी के कमंडल से खीर की धार टूट रही है। कहा जाता है कि दोनों संत गले मिले और संत गुलाब खां भी भीमसेन मंदिर में ही रहने लगे। मंदिर परिसर में गुलाब खां की मजार आज भी बनी हुई है। श्रद्धालु मजार की भी पूजा अर्चना करते हैं।