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संघर्ष के बल पर बच्चों को दिलाया मुकाम
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी।
Updated Sat, 13 May 2017 11:21 PM IST
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अब चांद पर देखो जा पहुंची हैं बेटियां...
’बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ महत्वाकांक्षी योजना के तहत आरसी महिला महाविद्यालय में निबंध लेखन प्रतियोगिता हुई। इसमें छात्राओं ने अपनी-अपनी परिभाषा में बेटियों के महत्व को समझाया।
महाविद्यालय की संयुक्त सचिव डा. सुशीला त्यागी ने कहा कि आज आवश्यकता है प्रत्येक व्यक्ति को बालिका स्थिति के प्रति अपना दृष्टिकोण बदलने की। प्राचार्या डा. शेफाली यादव ने योजना की शत प्रतिशत सफलता प्राप्त करने के लिए कहा कि ’ जा घर में बेटी पढ़े सुखी होय परिवार ऋद्धि-सिद्धि सुख संपदा बढ़े अपरंपार’। शिक्षा विभागाध्यक्ष डा. मधु गुप्ता ने बालिका साक्षरता बढ़ाने के लिए छात्राओं को प्रेरित किया। विज्ञान विभाग की प्रवक्ता डा. नीलम शाक्य ने कहा कि हमें कन्या भ्रूण हत्या पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाकर लैंगिक असमानता को कम करना है। शिक्षा विभाग की प्रवक्ता शिखा यादव ने महिलाओं की बढ़ती हुई जागरूकता के प्रति हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि ’अब चांद पर देखो जा पहुंची हैं बेटियां, हिमालय के शिखर को भी चूमती हैं बेटियां। केवल रोटियां सेंकना अब न चलेगा, बेटों से हर हाल में अव्वल हैं बेटियां। प्रतियोगिता में बीएड प्रथम व द्वितीय वर्ष की पल्लवी मिश्रा, संजना यादव, मोहिनी गुप्ता, मेघा वर्मा, सविता, रुकसार, रिया, निधि, शिखा, रिंकी, रितंभरा आदि छात्राओं ने प्रतिभाग किया। डा. सुनीता मिश्रा, डा. नेहा शाक्य, दीप शिखा, दुबे, रिचा दुबे उपस्थित रहीं।
स्कूलों में मातृ दिवस का आयोजन किया गया। इस दौरान बच्चों और माताओं के बीच कई प्रतियोगिताएं हुई।
बीलो रोड स्थित सनातन एकेडमी में मातृ दिवस का आयोजन किया गया। इस दौरान स्कूल के प्रबंधक प्रशांत दुबे के नेतृत्व में बच्चों में स्लोगन प्रतियोगिता हुई। बच्चों ने अपने-अपने पोस्टरों में लिखा कि माता बच्चे की प्रथम गुरू होती है, माता का पद सर्वोच्च होता है, मां से बढ़कर इस दुनिया में कोई नहीं आदि लाइन लिखी। साथ ही शिक्षकों ने बच्चों की पहली हंसी से लेकर उनके भविष्य के लिए बुने हुए सपनों के बारे में उत्साह पूर्वक बताया। सभी बच्चोें को पुरस्कृत किया गया। प्रधानाचार्य अंशुल चौहान, दिव्यांशी, ज्ञान प्रभा, गोपाल कृष्णा, संध्या, आदेश यादव, आरती, मोनिका, सौरभ अग्निहोत्री आदि मौजूद थे। वहीं भोजपुरा स्थित रजनीश कान्वेंट स्कूल, सीएससी मेमोरियल पब्लिक स्कूल, एमएस एके डमी खरगजीत नगर में भी मातृ दिवस मनाया गया।
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स्कूलों में मदर्स डे मनाया गया। बच्चों को मां का महत्व बताया।
अमन इंटरनेशनल स्कूल में मातृ दिवस बड़े हषोल्लास के साथ मनाया गया। बच्चों ने कार्ड मेकिंग प्रतियोगिता के द्वारा अपने मन के भावों को उकेरा। प्ले ग्रुप के बच्चों ने नृत्य प्रस्तुत किया। मां से संबंधित कविताएं सुनाकर सभी का ध्यान अपनी ओर आर्कषित किया। नर्सरी तथा केजी एक के बच्चों ने क्रियात्मक चार्ट प्रस्तुत किए। केजी टू के बच्चों ने नाटक के द्वारा मां की महत्ता का वर्णन कर नृत्य गान प्रस्तुत किया। कार्ड मेकिंग प्रतियोगिता सीनियर ग्रुप से अर्पिता चौहान कक्षा 10 प्रथम, मो. तलहा द्वितीय, मध्य वर्ग में संजना कक्षा आठ प्रथम तथा शिवानी द्वितीय रहे। प्राइमरी वर्ग से वंशिका यादव प्रथम तथा मान्या सिंह द्वितीय स्थान पर रहीं। आरोही यादव कक्षा एक तथा परी कक्षा दो को सांत्वना पुरस्कार दिया गया। प्रधानाचार्य डा. रवींद्र कुमार उपाध्याय ने बच्चों का मातृ दिवस का महत्व बताया।
आवास विकास स्थित बचपन ए प्ले स्कूल में बच्चों ने मदर्स डे धूमधाम से मनाया। बच्चों ने भारत माता को नमन करते हैंडमेंड कार्ड्स अपनी माताओं को दिए। प्रधानाचार्य शोभा हजेला ने बच्चों को मदर्स डे के बारे में बताया।
संघर्ष के बल पर बच्चों को दिलाया मुकाम
दुनिया में मां का स्थान कोई नहीं ले सकता है। मां ही है जो अपने बच्चों की परवरिश के लिए किसी भी संघर्ष का सामना करने को तैयार रहती हैं। तमाम झंझटों से जूझते हुए बच्चों को अच्छा मुकाम दिलाने के लिए मां वह सब करती है जो जरूरी होता है। इसी का नतीजा होता है कि एक समय अंधेरे में खुद को महसूस करने वाले बच्चे मां की मेहनत और लगन से अच्छा मुकाम पाते हैं। ऐसी ही कहानी है कि शहर के आवास विकास कालोनी सेक्टर दो निवासी माया देवी की।
कुरावली क्षेत्र की मूल निवासी माया देवी के पति राजेंद्र प्रसाद एफसीआई में नौकरी करते थे। वर्ष 2000 में उनकी छत से गिरकर मौत हो गई थी। शिक्षा कम होने के कारण मायादेवी को पति के स्थान पर नौकरी नहीं मिली। उनके सामने अपनी बेटी मीनाक्षी सात वर्ष और बेटे इंद्रजीत छह वर्ष की परवरिश की जिम्मेदारी आ पड़ी। माया की माने तो उसके सामने चारों ओर अंधेरा था। रिश्तेदार और परिवार के लोगों ने पति की मौत के बाद किनारा करना शुरू कर दिया। कुछ रिश्तेदारों ने ढांढस भी बंधाया। मायादेवी ने बच्चों को पढ़ाने के लिए खेती बाड़ी देखनी शुरू कर दी। पहले बटाई पर खेती कराई बाद में खुद देखभाल शुरू की। जीतोड़ मेहनत करके बेटे को पालीटेक्निक कराई। बेटा इस समय प्राइवेट कंपनी में नौकरी कर रहा है। बेटी एमए करने के बाद कंप्टीशन की तैयारी कर रही है। मां की लगन और मेहनत से दोनों बच्चे केवल एक ही बात कहते हैं कि मां तुझे सलाम...। माया देवी का कहना है कि बच्चों के सिर से पिता का साया भले ही उठ गया है मगर मां की ममता ने उन्हें कभी पिता की कमी महसूस नहीं होने दी।
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’बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ महत्वाकांक्षी योजना के तहत आरसी महिला महाविद्यालय में निबंध लेखन प्रतियोगिता हुई। इसमें छात्राओं ने अपनी-अपनी परिभाषा में बेटियों के महत्व को समझाया।
महाविद्यालय की संयुक्त सचिव डा. सुशीला त्यागी ने कहा कि आज आवश्यकता है प्रत्येक व्यक्ति को बालिका स्थिति के प्रति अपना दृष्टिकोण बदलने की। प्राचार्या डा. शेफाली यादव ने योजना की शत प्रतिशत सफलता प्राप्त करने के लिए कहा कि ’ जा घर में बेटी पढ़े सुखी होय परिवार ऋद्धि-सिद्धि सुख संपदा बढ़े अपरंपार’। शिक्षा विभागाध्यक्ष डा. मधु गुप्ता ने बालिका साक्षरता बढ़ाने के लिए छात्राओं को प्रेरित किया। विज्ञान विभाग की प्रवक्ता डा. नीलम शाक्य ने कहा कि हमें कन्या भ्रूण हत्या पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाकर लैंगिक असमानता को कम करना है। शिक्षा विभाग की प्रवक्ता शिखा यादव ने महिलाओं की बढ़ती हुई जागरूकता के प्रति हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि ’अब चांद पर देखो जा पहुंची हैं बेटियां, हिमालय के शिखर को भी चूमती हैं बेटियां। केवल रोटियां सेंकना अब न चलेगा, बेटों से हर हाल में अव्वल हैं बेटियां। प्रतियोगिता में बीएड प्रथम व द्वितीय वर्ष की पल्लवी मिश्रा, संजना यादव, मोहिनी गुप्ता, मेघा वर्मा, सविता, रुकसार, रिया, निधि, शिखा, रिंकी, रितंभरा आदि छात्राओं ने प्रतिभाग किया। डा. सुनीता मिश्रा, डा. नेहा शाक्य, दीप शिखा, दुबे, रिचा दुबे उपस्थित रहीं।
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स्कूलों में मातृ दिवस का आयोजन किया गया। इस दौरान बच्चों और माताओं के बीच कई प्रतियोगिताएं हुई।
बीलो रोड स्थित सनातन एकेडमी में मातृ दिवस का आयोजन किया गया। इस दौरान स्कूल के प्रबंधक प्रशांत दुबे के नेतृत्व में बच्चों में स्लोगन प्रतियोगिता हुई। बच्चों ने अपने-अपने पोस्टरों में लिखा कि माता बच्चे की प्रथम गुरू होती है, माता का पद सर्वोच्च होता है, मां से बढ़कर इस दुनिया में कोई नहीं आदि लाइन लिखी। साथ ही शिक्षकों ने बच्चों की पहली हंसी से लेकर उनके भविष्य के लिए बुने हुए सपनों के बारे में उत्साह पूर्वक बताया। सभी बच्चोें को पुरस्कृत किया गया। प्रधानाचार्य अंशुल चौहान, दिव्यांशी, ज्ञान प्रभा, गोपाल कृष्णा, संध्या, आदेश यादव, आरती, मोनिका, सौरभ अग्निहोत्री आदि मौजूद थे। वहीं भोजपुरा स्थित रजनीश कान्वेंट स्कूल, सीएससी मेमोरियल पब्लिक स्कूल, एमएस एके डमी खरगजीत नगर में भी मातृ दिवस मनाया गया।
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स्कूलों में मदर्स डे मनाया गया। बच्चों को मां का महत्व बताया।
अमन इंटरनेशनल स्कूल में मातृ दिवस बड़े हषोल्लास के साथ मनाया गया। बच्चों ने कार्ड मेकिंग प्रतियोगिता के द्वारा अपने मन के भावों को उकेरा। प्ले ग्रुप के बच्चों ने नृत्य प्रस्तुत किया। मां से संबंधित कविताएं सुनाकर सभी का ध्यान अपनी ओर आर्कषित किया। नर्सरी तथा केजी एक के बच्चों ने क्रियात्मक चार्ट प्रस्तुत किए। केजी टू के बच्चों ने नाटक के द्वारा मां की महत्ता का वर्णन कर नृत्य गान प्रस्तुत किया। कार्ड मेकिंग प्रतियोगिता सीनियर ग्रुप से अर्पिता चौहान कक्षा 10 प्रथम, मो. तलहा द्वितीय, मध्य वर्ग में संजना कक्षा आठ प्रथम तथा शिवानी द्वितीय रहे। प्राइमरी वर्ग से वंशिका यादव प्रथम तथा मान्या सिंह द्वितीय स्थान पर रहीं। आरोही यादव कक्षा एक तथा परी कक्षा दो को सांत्वना पुरस्कार दिया गया। प्रधानाचार्य डा. रवींद्र कुमार उपाध्याय ने बच्चों का मातृ दिवस का महत्व बताया।
आवास विकास स्थित बचपन ए प्ले स्कूल में बच्चों ने मदर्स डे धूमधाम से मनाया। बच्चों ने भारत माता को नमन करते हैंडमेंड कार्ड्स अपनी माताओं को दिए। प्रधानाचार्य शोभा हजेला ने बच्चों को मदर्स डे के बारे में बताया।
संघर्ष के बल पर बच्चों को दिलाया मुकाम
दुनिया में मां का स्थान कोई नहीं ले सकता है। मां ही है जो अपने बच्चों की परवरिश के लिए किसी भी संघर्ष का सामना करने को तैयार रहती हैं। तमाम झंझटों से जूझते हुए बच्चों को अच्छा मुकाम दिलाने के लिए मां वह सब करती है जो जरूरी होता है। इसी का नतीजा होता है कि एक समय अंधेरे में खुद को महसूस करने वाले बच्चे मां की मेहनत और लगन से अच्छा मुकाम पाते हैं। ऐसी ही कहानी है कि शहर के आवास विकास कालोनी सेक्टर दो निवासी माया देवी की।
कुरावली क्षेत्र की मूल निवासी माया देवी के पति राजेंद्र प्रसाद एफसीआई में नौकरी करते थे। वर्ष 2000 में उनकी छत से गिरकर मौत हो गई थी। शिक्षा कम होने के कारण मायादेवी को पति के स्थान पर नौकरी नहीं मिली। उनके सामने अपनी बेटी मीनाक्षी सात वर्ष और बेटे इंद्रजीत छह वर्ष की परवरिश की जिम्मेदारी आ पड़ी। माया की माने तो उसके सामने चारों ओर अंधेरा था। रिश्तेदार और परिवार के लोगों ने पति की मौत के बाद किनारा करना शुरू कर दिया। कुछ रिश्तेदारों ने ढांढस भी बंधाया। मायादेवी ने बच्चों को पढ़ाने के लिए खेती बाड़ी देखनी शुरू कर दी। पहले बटाई पर खेती कराई बाद में खुद देखभाल शुरू की। जीतोड़ मेहनत करके बेटे को पालीटेक्निक कराई। बेटा इस समय प्राइवेट कंपनी में नौकरी कर रहा है। बेटी एमए करने के बाद कंप्टीशन की तैयारी कर रही है। मां की लगन और मेहनत से दोनों बच्चे केवल एक ही बात कहते हैं कि मां तुझे सलाम...। माया देवी का कहना है कि बच्चों के सिर से पिता का साया भले ही उठ गया है मगर मां की ममता ने उन्हें कभी पिता की कमी महसूस नहीं होने दी।