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तीजन चर्चा ऐरी मेरी बहना हुय रही जी...

Sat, 10 Aug 2013 05:33 AM IST
Mainpuri
Mainpuri Updated Sat, 10 Aug 2013 05:33 AM IST
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मैनपुरी। हरियाली तीज के अवसर पर महिला जागरण मंच द्वारा कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। महिलाओं ने सामूहिक रूप से हथेलियों पर आकर्षक मेहंदी रचाई और सावन के गीत गाए। कजरी और मल्हार के स्वरों के बीच महिलाएं जमकर थिरकी। करीब दो घंटे तक महिलाओं और युवतियों ने खूब मस्ती की।
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महिला जागरण मंच की अध्यक्ष सीमा शुक्ला के आवास पर आयोजित हरियाली तीज कार्यक्रम में महिलाओं ने खूब धमाल किया। सीमा शुक्ला ने ‘तीजन चर्चा ऐरी मेरी बहना हुय रही जी’ गाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। ढोलक की थाप पर सुशीला भदौरिया ने ‘सावन आयो झूला डालो बाग में जी’ गाकर कार्यक्रम को सावनमय बना दिया। तारा देवी ने सावन गीत ‘हरियल हरियल ऐरी मेरी बहना रस भरी जी’ प्रस्तुत कर समां बांध दिया। कजरी और मल्हारों के स्वर काफी देर तक गूंजते रहे। ‘रोय-रोय पाती रुक्मिणी लिख रही जी’ और भोली सुरतिया के ‘मेरे वीर, सावन में जोगी हुय गए जी’ पर महिलाएं और युवतियां जमकर थिरकीं। इस दौरान महिलाओं ने मिट्टी की भगवान शिव और पार्वती की मूर्ति बनाकर पूजा अर्चना की। मंच अध्यक्ष सीमा शुक्ला ने हरियाली तीज के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हरियाली तीज पर अब पहले जैसा हरा भरा नजारा देखने को कम ही मिलता है। प्रदूषण के चलते अब मौसम का मिजाज बदल रहा है। कार्यक्रम में सोनी मिश्रा, निर्मला शुक्ला, पारुल, रामबेटी भदौरिया, गीता दुबे, दीपशिखा, मोनी, अनीता, पूनम, सरिता आदि मौजूद थीं। अंत में महिलाओं ने झूला भी झूला।
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ढोलक की थाप पर गूंजे सावन के गीत
मैनपुरी। खुशगवार मौसम में हरियाली तीज का त्योहार जिले भर में धूमधाम से मनाया गया। सजी संवरी महिलाओं ने ने ढोलक की थाप पर सावन के गीतों और मल्हारों पर जमकर नृत्य किया। हालांकि झमाझम बारिश ने त्योहार में अवश्य खलल डाल दी। हालांकि मौसम खुशगवार होने के बाद बाजारों में भी रौनक नजर आई। हरियाली तीज पर सजने सवंरने के लिए चूड़ियों और सौंदर्य प्रसाधनों की दुकानों पर महिलाओं की खासी भीड़ रही।
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रक्षाबंधन पर्व से पूर्व हरियाली तीज पर नई चूड़ियां पहनने की पुरानी परंपरा है। बारिश के बावजूद महिलाओं और युवतियों में मेहंदी और सौंदर्य प्रसाधन सामग्री के प्रति दीवानगी नजर आई। बजरिया की करीब आधा दर्जन चूड़ी की दुकानों पर महिलाओं और युवतियों की गहमागहमी दिनभर रही। चूड़ी विक्रेताओं के अनुसार हरी चूड़ियों की मांग सर्वाधिक रही। चूड़ी पहनने आईं पुष्पा का कहना था कि हरियाली तीज पर हरी चूड़ियां पहनने की पुरानी परंपरा है। रक्षाबंधन से पूर्व हाथों में नई चूड़ियां होनी ही चाहिए। अन्य खर्चों में तो कटौती की जा सकती है लेकिन चूड़ियां पहनने में नहीं।

उधर, बजरिया की सौंदर्य प्रसाधन की दुकानों पर भी महिलाओं और युवतियों की भीड़भाड़ नजर आई। युवतियां और महिलाएं मेहंदी के अलावा नेल पालिश, पाउडर, क्रीम, बिंदी, बालों को बांधने के लिए आकर्षक डिजायनों के जूड़े की खरीददारी करती नजर आईं। घरों में हथेलियों पर मेहंदी रचाई गई और सावन के गीत गाए गए। कई महिलाओं ने सामूहिक रूप में बैठकर हथेलियों पर मेहंदी रचाई और ढोलक की थाप पर कजरी और मल्हार के स्वर छेड़े।





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