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Mahoba News: तापमान बढ़ने से पीली पड़ रही गेहूं की फसल
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-मार्च माह के पहले सप्ताह में पारा 33 डिग्री पहुंचने से गेहूं की फसल पर मंडराया संकट
-खेतों की घट रही नमी, पतला पड़ रहा गेहूं का दाना
फोटो 05 एमएएचपी 02 परिचय-भरवारा मौजा में तापमान बढ़ने से समय से पहले इस तरह पकने लगी गेहूं की फसल। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
महोबा। बुंदेलखंड की पठारी धरती पर मौसम का अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस पहुंचने से अप्रैल जैसी गर्मी का अहसास हो रहा है। इसका असर गेहूं की पैदावार पर पड़ रहा है। खेतों की नमी तेजी से घट रही है। दाना पतला पड़ने से पैदावार घटेगी। तापमान बढ़ने से किसानों को अतिरिक्त सिंचाई करनी पड़ रही है। ऐसे में गेहूं की पैदावार की लागत बढ़ रही है और उत्पादन कम होने की आशंका बनी है।
बृहस्पतिवार सुबह के समय मौसम सामान्य रहा लेकिन दिन चढ़ने के साथ ही सूरज की किरणें तीखी होती गईं। इस दौरान मौसम का अधिकतम तापमान 34 डिग्री जबकि न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आर्द्रता 26 फीसदी और हवाओं की रफ्तार 16 किमी प्रतिघंटा दर्ज की गई। जनपद महोबा में इस वर्ष रबी सीजन में एक लाख हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की बुआई की गई है। इस वर्ष मार्च माह के प्रथम सप्ताह में शुष्क मौसम की वजह से स्थिति बदली हुई है। गेहूं की फसल में पहले दो सिंचाई पर्याप्त रहती थीं लेकिन अबकी चार बार पानी देना पड़ रहा है। डीजल व बिजली खर्च बढ़ने से किसानों की चिंता गहरा गई है। पछेती गेहूं में पौधों का विकास कमजोर दिख रहा है और बालियां सामान्य आकार नहीं ले पा रहीं। सिंचाई करने पर तेज हवा चलने की स्थिति में फसल गिर सकती है, इससे दाना भराव प्रभावित होगा।
किसान विक्रम, राजेश, रोहित आदि का कहना है कि ऊपरी सतह सूखने से फसल की अतिरिक्त सिंचाई करनी पड़ रही है। तेज धूप बालियों पर विपरीत असर डाल सकती है। किसान विनोद का कहना है कि सिंचाई में देरी से फसल का उत्पादन घटेगा जबकि अधिक पानी देने से फसल गिरने की आशंका रहती है। गेहूं इस समय दाना भराव के चरण में है। हल्की ठंड इस अवस्था में अनुकूल रहती है लेकिन तापमान बढ़ने से दाना हल्का रह सकता है और उपज घट सकती है। उधर, जिला कृषि अधिकारी दुर्गेश सिंह ने गेहूं की फसल की आवश्यकता अनुसार हल्की सिंचाई करने की सलाह दी है। बताया कि सुबह या शाम पानी देना लाभकारी रहेगा।
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-खेतों की घट रही नमी, पतला पड़ रहा गेहूं का दाना
फोटो 05 एमएएचपी 02 परिचय-भरवारा मौजा में तापमान बढ़ने से समय से पहले इस तरह पकने लगी गेहूं की फसल। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
महोबा। बुंदेलखंड की पठारी धरती पर मौसम का अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस पहुंचने से अप्रैल जैसी गर्मी का अहसास हो रहा है। इसका असर गेहूं की पैदावार पर पड़ रहा है। खेतों की नमी तेजी से घट रही है। दाना पतला पड़ने से पैदावार घटेगी। तापमान बढ़ने से किसानों को अतिरिक्त सिंचाई करनी पड़ रही है। ऐसे में गेहूं की पैदावार की लागत बढ़ रही है और उत्पादन कम होने की आशंका बनी है।
बृहस्पतिवार सुबह के समय मौसम सामान्य रहा लेकिन दिन चढ़ने के साथ ही सूरज की किरणें तीखी होती गईं। इस दौरान मौसम का अधिकतम तापमान 34 डिग्री जबकि न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आर्द्रता 26 फीसदी और हवाओं की रफ्तार 16 किमी प्रतिघंटा दर्ज की गई। जनपद महोबा में इस वर्ष रबी सीजन में एक लाख हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की बुआई की गई है। इस वर्ष मार्च माह के प्रथम सप्ताह में शुष्क मौसम की वजह से स्थिति बदली हुई है। गेहूं की फसल में पहले दो सिंचाई पर्याप्त रहती थीं लेकिन अबकी चार बार पानी देना पड़ रहा है। डीजल व बिजली खर्च बढ़ने से किसानों की चिंता गहरा गई है। पछेती गेहूं में पौधों का विकास कमजोर दिख रहा है और बालियां सामान्य आकार नहीं ले पा रहीं। सिंचाई करने पर तेज हवा चलने की स्थिति में फसल गिर सकती है, इससे दाना भराव प्रभावित होगा।
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किसान विक्रम, राजेश, रोहित आदि का कहना है कि ऊपरी सतह सूखने से फसल की अतिरिक्त सिंचाई करनी पड़ रही है। तेज धूप बालियों पर विपरीत असर डाल सकती है। किसान विनोद का कहना है कि सिंचाई में देरी से फसल का उत्पादन घटेगा जबकि अधिक पानी देने से फसल गिरने की आशंका रहती है। गेहूं इस समय दाना भराव के चरण में है। हल्की ठंड इस अवस्था में अनुकूल रहती है लेकिन तापमान बढ़ने से दाना हल्का रह सकता है और उपज घट सकती है। उधर, जिला कृषि अधिकारी दुर्गेश सिंह ने गेहूं की फसल की आवश्यकता अनुसार हल्की सिंचाई करने की सलाह दी है। बताया कि सुबह या शाम पानी देना लाभकारी रहेगा।
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