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प्रत्याशियों से पानी और रोजगार मांग रहे मतदाता
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महोबा। बुंदेलखंड के मतदाता 20 फरवरी को प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे। लेकिन इस बार पानी और रोजगार को लेकर मतदाता जागरूक है। वोट मांगने वाले प्रत्येक प्रत्याशी से वह क्षेत्र की समस्या बता समाधान का भरोसा मांग रहे हैं।
पिछले विधानसभा चुनाव में मोदी-योगी फैक्टर में बुंदेलों ने दिल खोलकर मतदान किया और बुंदेलखंड की सभी 19 सीटें भाजपा की झोली में गईं थीं। लेकिन इस बार समीकरण बदल गए हैं, बीजेपी के राकेश गोस्वामी के सामने जीत दोहराने के लिए कड़ी चुनौती है। इस बार भी महोबा विधान सभा चुनाव में रोजगार, पलायन, पेयजल, समस्या बड़े मुद्दे हैं। जिसको लेकर मतदाता मुखर हैं।
1952 से अस्तित्व में आई महोबा विधान सभा सीट पर कमोबेश सभी दलों को मौका मिला है। कांग्रेस इस सीट पर 32 साल से बनवास झेल रही है। वहीं पिछले 20 साल में दो बार बसपा, सपा, भाजपा को एक बार यहां की जनता ने मौका दिया है। फिर भी यहां रोजगार और पानी की समस्या का मुद्दा गरम है।
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प्रचार के लिए मतदाताओं के द्वारा पहुंच रहे प्रत्याशियों के सामने स्थानीय मतदाता यही मुद्दे प्रमुखता से उठा रहे हैं। पत्थर मंडी कबरई में जहां हजारों लोगों को रोजगार मिलता था उद्योगों पर ताला लटक रहा है। रोजगार न मिलने पर यहां से बड़ी संख्या में लोग महाराष्ट्र, सूरत, दिल्ली, हरियाणा में मजदूरी करने के लिए जाते हैं।
महोबा विधान सभा
कुल 315399 मतदाता
पुरुष 171465
महिला 143925
इस बार ये हैं मैदान में
भाजपा से राकेश गोस्वामी, सपा से मनोज तिवारी, कांग्रेस से चौधरी सागर सिंह, बसपा से संजय साहू समेत कुल 15 प्रत्याशी मैदान में हैं।
महोबा विधानसभा सीट से 2017 के चुनावों में भाजपा के राकेश गोस्वामी ने समाजवादी पार्टी के सिद्धगोपाल साहू को हराकर जीत हासिल की थी। जबकि बीएसपी के अरिमर्दन सिंह तीसरे स्थान पर रहे थे।
विधानसभा क्षेत्र की पहचान
आल्हा ऊदल की आराध्य देवी का बड़ी चंद्रिका देवी मंदिर, सूर्य मंदिर, शिवतांडव, खखरामठ, ऐतिहासिक चंदेल कालीन सरोवर, आल्हा ऊदल की प्रतिमाएं और औद्योगिक क्षेत्र में देश-विदेश में मशहूर महोबा का देसावरी पान यहां की पहचान है। जिसे जीआई टैग मिल चुका है।
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पिछले विधानसभा चुनाव में मोदी-योगी फैक्टर में बुंदेलों ने दिल खोलकर मतदान किया और बुंदेलखंड की सभी 19 सीटें भाजपा की झोली में गईं थीं। लेकिन इस बार समीकरण बदल गए हैं, बीजेपी के राकेश गोस्वामी के सामने जीत दोहराने के लिए कड़ी चुनौती है। इस बार भी महोबा विधान सभा चुनाव में रोजगार, पलायन, पेयजल, समस्या बड़े मुद्दे हैं। जिसको लेकर मतदाता मुखर हैं।
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1952 से अस्तित्व में आई महोबा विधान सभा सीट पर कमोबेश सभी दलों को मौका मिला है। कांग्रेस इस सीट पर 32 साल से बनवास झेल रही है। वहीं पिछले 20 साल में दो बार बसपा, सपा, भाजपा को एक बार यहां की जनता ने मौका दिया है। फिर भी यहां रोजगार और पानी की समस्या का मुद्दा गरम है।
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प्रचार के लिए मतदाताओं के द्वारा पहुंच रहे प्रत्याशियों के सामने स्थानीय मतदाता यही मुद्दे प्रमुखता से उठा रहे हैं। पत्थर मंडी कबरई में जहां हजारों लोगों को रोजगार मिलता था उद्योगों पर ताला लटक रहा है। रोजगार न मिलने पर यहां से बड़ी संख्या में लोग महाराष्ट्र, सूरत, दिल्ली, हरियाणा में मजदूरी करने के लिए जाते हैं।
महोबा विधान सभा
कुल 315399 मतदाता
पुरुष 171465
महिला 143925
इस बार ये हैं मैदान में
भाजपा से राकेश गोस्वामी, सपा से मनोज तिवारी, कांग्रेस से चौधरी सागर सिंह, बसपा से संजय साहू समेत कुल 15 प्रत्याशी मैदान में हैं।
महोबा विधानसभा सीट से 2017 के चुनावों में भाजपा के राकेश गोस्वामी ने समाजवादी पार्टी के सिद्धगोपाल साहू को हराकर जीत हासिल की थी। जबकि बीएसपी के अरिमर्दन सिंह तीसरे स्थान पर रहे थे।
विधानसभा क्षेत्र की पहचान
आल्हा ऊदल की आराध्य देवी का बड़ी चंद्रिका देवी मंदिर, सूर्य मंदिर, शिवतांडव, खखरामठ, ऐतिहासिक चंदेल कालीन सरोवर, आल्हा ऊदल की प्रतिमाएं और औद्योगिक क्षेत्र में देश-विदेश में मशहूर महोबा का देसावरी पान यहां की पहचान है। जिसे जीआई टैग मिल चुका है।