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विस चुनाव में इस बार भी छाया रहेगा श्रीनगर को विकास खंड बनाने का मुद्दा 16-25-24
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श्रीनगर (महोबा)। विधान सभा चुनाव में स्थानीय मुद्दे भी मुखर होने लगे हैं। मतदाताओं ने एक बार फिर श्रीनगर को विकास खंड बनाए जाने का मुद्दा उछाल उसमें जान फूंक दी है।
क्षेत्रीय मतदाताओं का कहना है कि जो भी उनकी भावना का सम्मान करेगा। हम लोग उसी के लिए मतदान करेंगे। बता दें कि 11 फरवरी 1995 से महोबा को अलग जिले का दर्जा दिया गया था। उसके बाद से ही श्रीनगर को अलग विकासखंड बनाए जाने की मांग यहां के जनमानस के द्वारा की जाने लगी थी लेकिन किसी भी राजनीतिक दल द्वारा इस और कोई ध्यान नहीं दिया गया। जिससे अबतक श्रीनगर अलग विकासखंड नहीं बन सका है। श्रीनगर वर्ष 2016 में सपा सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने महोबा में लैपटॉप वितरण के दौरान अलग विकासखंड बनाए जाने की घोषणा की थी और इसके लिए गजट जारी कर दिया गया था लेकिन वर्ष 2017 में भाजपा की सरकार आने पर पूर्ववर्ती सरकार द्वारा लिए गए फैसले को निरस्त कर दिया गया था। जिससे अबतक श्रीनगर को विकास खंड बनने का सपना अधूरा है।
बोले मतदाता
-कस्बे के मोहाल दाऊ पुरा निवासी संतोष कुमार विश्वकर्मा का कहना है कि श्रीनगर को अलग विकासखंड बनाए जाने की मांग वर्षों से की जा रही है लेकिन राजनीतिक दलों की उपेक्षा से यह प्रमुख मांग पूरी नहीं हो पाई है। इस बार विधानसभा चुनाव में यह मुद्दा प्रमुखता से उठेगा।
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- ग्राम पिपरा माफ निवासी समाजसेवी जनक सिंह परिहार का कहना है कि श्रीनगर क्षेत्र की उपेक्षा प्रत्येक राजनीतिक दल द्वारा की गई। इस कारण से श्रीनगर को विकास खंड का दर्जा नहीं मिल सका और न ही विकास कार्यो में तेजी आ सकी है।
-कस्बा निवासी एवं श्रीनगर अलग विकासखंड बनाए जाने की पैरवी करने वाले मोहम्मद मकबूल का कहना है कि यदि श्रीनगर को अलग विकासखंड का दर्जा मिल गया होता तो आज यहां की अलग ही सूरत होती। यहां के लोगों को महोबा के चक्कर ना काटने पड़ते।
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क्या है क्षेत्र की पहचान
श्रीनगर में पीतल उद्योग है यहां एक जिला एक उत्पाद में शामिल पीतल की मूतियां बनाईं जाती है। इसलिए इसे श्रीनगर को पीतल उद्योग के रूप में भी बड़ी पहचान हासिल है। इसके साथ ही यहां राजा मोहन सिंह का किला भी है जो ऐतिहासिक धरोहर है। इसके अंतर्गत चार न्याय पंतायतें श्रीनगर, पिपरामाफ, भंडरा और सिजहरी शामिल हैं। क्षेत्र की एक लाख से ज्यादा की आबादी। अभी यह क्षेत्र कबरई ब्लॉक में शामिल हैं।
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क्षेत्रीय मतदाताओं का कहना है कि जो भी उनकी भावना का सम्मान करेगा। हम लोग उसी के लिए मतदान करेंगे। बता दें कि 11 फरवरी 1995 से महोबा को अलग जिले का दर्जा दिया गया था। उसके बाद से ही श्रीनगर को अलग विकासखंड बनाए जाने की मांग यहां के जनमानस के द्वारा की जाने लगी थी लेकिन किसी भी राजनीतिक दल द्वारा इस और कोई ध्यान नहीं दिया गया। जिससे अबतक श्रीनगर अलग विकासखंड नहीं बन सका है। श्रीनगर वर्ष 2016 में सपा सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने महोबा में लैपटॉप वितरण के दौरान अलग विकासखंड बनाए जाने की घोषणा की थी और इसके लिए गजट जारी कर दिया गया था लेकिन वर्ष 2017 में भाजपा की सरकार आने पर पूर्ववर्ती सरकार द्वारा लिए गए फैसले को निरस्त कर दिया गया था। जिससे अबतक श्रीनगर को विकास खंड बनने का सपना अधूरा है।
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बोले मतदाता
-कस्बे के मोहाल दाऊ पुरा निवासी संतोष कुमार विश्वकर्मा का कहना है कि श्रीनगर को अलग विकासखंड बनाए जाने की मांग वर्षों से की जा रही है लेकिन राजनीतिक दलों की उपेक्षा से यह प्रमुख मांग पूरी नहीं हो पाई है। इस बार विधानसभा चुनाव में यह मुद्दा प्रमुखता से उठेगा।
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- ग्राम पिपरा माफ निवासी समाजसेवी जनक सिंह परिहार का कहना है कि श्रीनगर क्षेत्र की उपेक्षा प्रत्येक राजनीतिक दल द्वारा की गई। इस कारण से श्रीनगर को विकास खंड का दर्जा नहीं मिल सका और न ही विकास कार्यो में तेजी आ सकी है।
-कस्बा निवासी एवं श्रीनगर अलग विकासखंड बनाए जाने की पैरवी करने वाले मोहम्मद मकबूल का कहना है कि यदि श्रीनगर को अलग विकासखंड का दर्जा मिल गया होता तो आज यहां की अलग ही सूरत होती। यहां के लोगों को महोबा के चक्कर ना काटने पड़ते।
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क्या है क्षेत्र की पहचान
श्रीनगर में पीतल उद्योग है यहां एक जिला एक उत्पाद में शामिल पीतल की मूतियां बनाईं जाती है। इसलिए इसे श्रीनगर को पीतल उद्योग के रूप में भी बड़ी पहचान हासिल है। इसके साथ ही यहां राजा मोहन सिंह का किला भी है जो ऐतिहासिक धरोहर है। इसके अंतर्गत चार न्याय पंतायतें श्रीनगर, पिपरामाफ, भंडरा और सिजहरी शामिल हैं। क्षेत्र की एक लाख से ज्यादा की आबादी। अभी यह क्षेत्र कबरई ब्लॉक में शामिल हैं।