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वीरान होता जा रहा विजय सागर पक्षी बिहार
Updated Thu, 28 May 2015 11:32 PM IST
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बुंदेलखंड का मशहूर विजय सागर पक्षी विहार उपेक्षा का शिकार हो रहा है। अब न तो यहां पर पक्षी नजर आते हैं और न ही झूले। पक्षी विहार में वन विभाग द्वारा लगाए गए झूले टूटे पड़े हैं, जिससे लोग अब पक्षी विहार जाने में झूलों का आनंद नहीं ले पाते हैं। वहीं विजय सागर झील भ्ी घास और जलकुंभी से पड़ी हैं।
मालूम हो कि चंदेल शासक विजय वर्मन ने ग्यारहवीं सदी में विजय सागर झील का निर्माण कराया था। गहराई के लिए मशहूर यह झील देखरेख के अभाव में अपना अस्तित्व खोती जा रही है। झील की सफाई न होने से पानी भी कीचड़युक्त होता जा रहा है। वहीं झील के किनारे लगे पेड़ -पौधे भी देखरेख के अभाव में सूखते जा रहे हैं, जिससे विजय सागर पक्षी बिहार की रौनक क्षीण होती जा रही है। लेकिन सागर में आज भी बंदरों के कारण चहल- पहल बनी रहती है। ऐतिहासिक विजय सागर पक्षी विहार में वन विभाग द्वारा लगाए गए झूले भी देखरेख के अभाव में टूट गए हैं। वहीं घास और पेड़ों में सिंचाई न किए जाने से कभी हरे रहने वाली घास और पेड़ बदरंग होते जा रहे है। पक्षी विहार की सुरक्षा के लिए लगाए गए वन विभाग के कर्मचारी भी मौज मस्ती कर रहे है। जिससे दिन- प्रतिदिन पक्षी विहार उजड़ता जा रहा है। हालत यह है कि विजय सागर पक्षी विहार उजड़ने से देशी व विदेशी पर्यटकों का आवागमन कम होता जा रहा है।
शोपीस बनकर रह गए पैडल बोट
एक दशक पहले विजय सागर पक्षी विहार में पर्यटकों के झील में घूमने के लिए पैडल बोट डाले गए थे, जो अब टूट-फूट के चलते बेकार होते जा रहे हैं। इतना ही नहीं अब लोग नाव से विजय सागर झील की सैर भी नहीं कर पाते हैं। बेहद खूबसूरत माना जाने वाला विजय सागर पक्षी विहार देखरेख के अभाव में वीरान होता जा रहा है।
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आमदनी के बाद भी व्यवस्थाएं नहीं
विजय सागर पर्यटक स्थल में प्रतिदिन बढ़ती भीड़ के मद्देनजर वन विभाग ने गेट पर टिकट घर खोल दिया था, जिससे वन विभाग को अच्छी खासी आमदनी भी बढ़ गई थी। एक सप्ताह में रविवार और व्यापारियों की छुट्टी के दिन मंगलवार को पिकनिक मनाने वालों की अच्छी खासी भीड़ जुटती थी। लोग झील के अलावा ऐतिहासिक किला भी देखने जाते थे, लेकिन विजय सागर के वीरान होने से अब लोगों ने आना जाना कम कर दिया है।
विजय सागर में प्रतिदिन पेड़ पौधों की रखवाली के लिए वन विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है, जो नियमित पेड़ पौधों में सिंचाई करते हैं और उनकी रखवाली करते हैं। गर्मी के कारण पेड़ खराब हो रहे है जो बारिश के समय में लहलहाने लगते है।
जीपी कटियार
वन क्षेत्राधिकारी महोबा
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मालूम हो कि चंदेल शासक विजय वर्मन ने ग्यारहवीं सदी में विजय सागर झील का निर्माण कराया था। गहराई के लिए मशहूर यह झील देखरेख के अभाव में अपना अस्तित्व खोती जा रही है। झील की सफाई न होने से पानी भी कीचड़युक्त होता जा रहा है। वहीं झील के किनारे लगे पेड़ -पौधे भी देखरेख के अभाव में सूखते जा रहे हैं, जिससे विजय सागर पक्षी बिहार की रौनक क्षीण होती जा रही है। लेकिन सागर में आज भी बंदरों के कारण चहल- पहल बनी रहती है। ऐतिहासिक विजय सागर पक्षी विहार में वन विभाग द्वारा लगाए गए झूले भी देखरेख के अभाव में टूट गए हैं। वहीं घास और पेड़ों में सिंचाई न किए जाने से कभी हरे रहने वाली घास और पेड़ बदरंग होते जा रहे है। पक्षी विहार की सुरक्षा के लिए लगाए गए वन विभाग के कर्मचारी भी मौज मस्ती कर रहे है। जिससे दिन- प्रतिदिन पक्षी विहार उजड़ता जा रहा है। हालत यह है कि विजय सागर पक्षी विहार उजड़ने से देशी व विदेशी पर्यटकों का आवागमन कम होता जा रहा है।
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शोपीस बनकर रह गए पैडल बोट
एक दशक पहले विजय सागर पक्षी विहार में पर्यटकों के झील में घूमने के लिए पैडल बोट डाले गए थे, जो अब टूट-फूट के चलते बेकार होते जा रहे हैं। इतना ही नहीं अब लोग नाव से विजय सागर झील की सैर भी नहीं कर पाते हैं। बेहद खूबसूरत माना जाने वाला विजय सागर पक्षी विहार देखरेख के अभाव में वीरान होता जा रहा है।
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आमदनी के बाद भी व्यवस्थाएं नहीं
विजय सागर पर्यटक स्थल में प्रतिदिन बढ़ती भीड़ के मद्देनजर वन विभाग ने गेट पर टिकट घर खोल दिया था, जिससे वन विभाग को अच्छी खासी आमदनी भी बढ़ गई थी। एक सप्ताह में रविवार और व्यापारियों की छुट्टी के दिन मंगलवार को पिकनिक मनाने वालों की अच्छी खासी भीड़ जुटती थी। लोग झील के अलावा ऐतिहासिक किला भी देखने जाते थे, लेकिन विजय सागर के वीरान होने से अब लोगों ने आना जाना कम कर दिया है।
विजय सागर में प्रतिदिन पेड़ पौधों की रखवाली के लिए वन विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है, जो नियमित पेड़ पौधों में सिंचाई करते हैं और उनकी रखवाली करते हैं। गर्मी के कारण पेड़ खराब हो रहे है जो बारिश के समय में लहलहाने लगते है।
जीपी कटियार
वन क्षेत्राधिकारी महोबा