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Mahoba News: छह माह से नल सूखे... पांच हजार लोग प्यासे
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महोबा। घरों के बाहर रखे खाली ड्रम और डिब्बे, लोगों को टैंकर के आने का इंतजार...। पालिका कार्यालय से महज 200 मीटर दूर मोहल्ला नैकानापुरा में यह नजारा देखा जा सकता है। मोहल्ले में बीते छह माह से पेयजल आपूर्ति ठप है जिससे पांच हजार की आबादी बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं। दो दिन में एक दिन आने वाले टैंकर से किसी को एक डिब्बा तो किसी को दो डिब्बा पानी ही नसीब हो पा रहा है। मजबूरी में लोग दूर-दराज के हैंडपंपों का सहारा ले रहे हैं।
मोहल्ला नैकानापुरा में हवेली दरवाजा से होकर आई पाइपलाइन से पेयजल की आपूर्ति होती है। गोगालाल, गजेंद्र कुमार, महेश, सुरेश, कल्पना, शोभा, नासिर खां आदि मोहल्लेवासियों ने बताया कि हवेली दरवाजा के पास पाइपलाइन में प्लेट डालकर नैकानापुरा की आपूर्ति रोक दी गई थी। इसके बाद आपूर्ति बहाल नहीं हुई। अब पालिका प्रशासन की ओर से टैंकर से पानी की आपूर्ति की जा रही है जो ऊंट के मुंह में जीरा के जैसी है। टैंकर आते ही भीड़ टूट पड़ती है।
पहले पानी भरने को लेकर मारामारी की नौबत तक आ जाती है। दो दिन में एक बार एक ही टैंकर से पानी आता है जिसकी वजह से लोगों को एक डिब्बा भी पानी मिलना मुश्किल होता है। शिकायत के बाद भी जिम्मेदार कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। मामले की शिकायत डीएम से की गई। उन्होंने जल निगम के अधिकारियों को समस्या के निस्तारण के निर्देश भी दिए लेकिन पेयजल संकट बरकरार है। लोगों का पूरा दिन पानी की जुगाड़ में ही गुजर जाता है।
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मोहल्ला नैकानापुरा में हवेली दरवाजा से होकर आई पाइपलाइन से पेयजल की आपूर्ति होती है। गोगालाल, गजेंद्र कुमार, महेश, सुरेश, कल्पना, शोभा, नासिर खां आदि मोहल्लेवासियों ने बताया कि हवेली दरवाजा के पास पाइपलाइन में प्लेट डालकर नैकानापुरा की आपूर्ति रोक दी गई थी। इसके बाद आपूर्ति बहाल नहीं हुई। अब पालिका प्रशासन की ओर से टैंकर से पानी की आपूर्ति की जा रही है जो ऊंट के मुंह में जीरा के जैसी है। टैंकर आते ही भीड़ टूट पड़ती है।
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पहले पानी भरने को लेकर मारामारी की नौबत तक आ जाती है। दो दिन में एक बार एक ही टैंकर से पानी आता है जिसकी वजह से लोगों को एक डिब्बा भी पानी मिलना मुश्किल होता है। शिकायत के बाद भी जिम्मेदार कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। मामले की शिकायत डीएम से की गई। उन्होंने जल निगम के अधिकारियों को समस्या के निस्तारण के निर्देश भी दिए लेकिन पेयजल संकट बरकरार है। लोगों का पूरा दिन पानी की जुगाड़ में ही गुजर जाता है।
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