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प्राईवेट एंबुलेंस मरीजों की जिंदगी से कर रही खिलवाड़

Tue, 21 Jan 2020 12:18 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 21 Jan 2020 12:18 AM IST
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Private ambulance messing with patients' lives
महोबा। बिना मानक चल रहीं प्राईवेट एंबुुलेंस मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रही हैं। प्राईवेट एंबुलेंस में न तो जीवन रक्षक दवाएं हैं और न ही स्ट्रेचर और प्रशिक्षित स्टाफ की व्यवस्था। ऐसे में यह एंबुलेंस समय से संबंधित अस्पताल तक ले जाने में विफल हो रही है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग में 108 व 102 नंबर की दो दर्जन से अधिक एंबुलेंस संचालित है, जो मरीजों को खासी राहत पहुंचा रही है। सड़क दुर्घटनाओं में यह एंबुलेंस किसी वरदान से कम नहीं है।
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जिला अस्पताल परिसर व आसपास प्राईवेट एंबुलेंस का जमावड़ा रहता है। दुर्घटना व अन्य गंभीर मरीजों को एंबुलेंस बुकिंग के लिए चालकों में होड़ मची रहती हैं। खटारा हालत में पहुंच चुकी अधिकांश प्राईवेट एंबुलेंस से मरीजों को झांसी व कानपुर पहुंचाया जाता है। समय से एंबुलेंस के अस्पताल न पहुंचने के चलते तमाम मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग में 108 व 102 नंबर की एंबुुलेंस पर्याप्त संख्या में है। जो मरीजों को जिला अस्पताल से झांसी व कानपुर तक निशुल्क ले जाती है। जिले में किसी भी स्थान पर होने वाली दुर्घटना के घायलों को अस्पताल तक पहुंचाने में यह एंबुलेंस महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। जिले में 108 नंबर की 14, 102 नंबर की 12 व एएलएस की चार एंबुलेंस संचालित हैं। इन एंबुलेंस में जीवन रक्षक औषधियां, ऑक्सीजन, सिलेंडर व प्रशिक्षित स्टॉफ हैं। ईएमटी की तैनाती होने से मरीजों को रास्ते में भी उपचार मिल जाता है। इससे मरीजों के लिए यह एंबुलेंस किसी वरदान से कम नहीं हैं। एएलएस एंबुलेंस में मॉनीटर सुविधा भी है। अलग-अलग प्रकार के कई स्ट्रेचर होने से गंभीर रूप से घायल मरीजों को एंबुलेंस में बैठाने व बाहर निकालने में आसानी होती है।
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प्राईवेट एंबुलेंस संचालकों पर दर्ज कराया जाएगा मुकदमा
महोबा। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरपी मिश्रा का कहना है कि जिला अस्पताल परिसर में प्राईवेट एंबुलेंसों के खड़े होने पर पूरी तरह रोक लगाई गई हैं। यदि प्राईवेट एंबुुलेंस परिसर में खड़ी मिलती है तो एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। पूर्व में भी कार्रवाई की जा चुकी है। जिला अस्पताल से रेफर होने वाले 90 फीसदी मरीजों को 108 नंबर एंबुलेंस सेवा का लाभ दिलाया जा रहा है।
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दो दिन पहले एंबुलेंस के जाम में फंसने से वृद्धा ने तोड़ा था दम
महोबा। जिले में एंबुलेंस को रास्ता देेने के प्रति लोगों में जागरुकता का अभाव है। दो दिन पहले कानपुर-सागर हाईवे में किड़ारी फाठक के समीप चार घंटे तक जाम लगा था। जाम में एंबुलेंस फंस जाने से उसमें सवार मरीज शांति (70) पत्नी टिरुआ की मौत हो गई थी। इससे पहले भी एंबुलेंस के जाम में फंसने से मरीजों के समय से अस्पताल न पहुंचने के मामले में सामने आ चुके हैं।
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