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धूमधान से मनी नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती
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महोबा। नेताजी सुभाषचंद्र बोस की 123वीं जयंती धूमधाम के साथ मनाई गई। कार्यक्रमों का आयोजन कर देश की आजादी में अहम भूमिका निभाने वाले सुभाषचंद्र बोस को याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि नेताजी को भले ही अब तक भारत रत्न न मिल पाया हो, लेकिन वे सही मायने में भारत के ऐसे रत्न थे, जिनका देश को आजाद कराने में सबसे ज्यादा योगदान रहा।
शहर के सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पूर्व प्रधानाचार्य शिव कुमार गोस्वामी ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने भारत माता की सेवा में पूरा जीवन लगा दिया। नेता जी ने आईसीएस की परीक्षा उत्तीर्ण करके नौकरी नहीं की, उन्होंने भारत माता के सच्चे सपूत के रूप में अपना तन-मन-धन समर्पित किया। संगीताचार्य पं. जगप्रसाद तिवारी ने कहा कि सुभाषचंद्र बोस के नाम में नेता शब्द भी सुशोभित होता है। उन्होंने कहा कि आज जो अपने को नेता कहते है, उन्हें सुभाषचंद्र बोस से शिक्षा लेना चाहिए। कार्यक्रम में गिरीश कुमार सक्सेना, आदित्य मिश्रा, देवीचरण शुक्ला आदि मौजूद रहे। स्वामी विवेकानंद महाविद्यालय में सुभाषचंद्र बोस की जयंती बनाई गई। महाविद्यालय के प्राचार्य मो. आरिफ राईन ने कहा कि सुभाषचंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज के सर्वोच्च सेनापति की हैसियत से स्वतंत्र भारत की अस्थाई सरकार बनाई, जिसे विभिन्न देशों ने मान्यता दी। शिशु शिक्षा निकेतन इंटर कॉलेज में जयंती के मौके पर सुभाषचंद्र बोस के चित्र पर पुष्प अर्पित किए गए और उनके जीवन पर प्रकाश डाला गया। इस मौके पर विद्यालय के प्रधानाचार्य शिवकांत त्रिपाठी, बृजेश कुमार यादव के अलावा छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। जिला कांग्रेस कमेटी ने आल्हा चौक स्थित अंबेडकर पार्क में सुभाषचंद्र बोस की जयंती मनाई, जिसमें कार्यकर्ताओं ने सुभाषचंद्र बोस को पुष्पांजलि अर्पित की। इस मौके पर जिलाध्यक्ष तुलसीदास लोधी, महेश अहिरवार, अजीज खां, अनिल श्रीवास्तव, शहंशाह अली, संतोष धुरिया कार्यकर्ता मौजूद रहे।
अनशन स्थल पर मनी सुभाषचंद्र की जयंती
महोबा। अलग राज्य की मांग को लेकर शहर के आल्हा चौक में चल रहे अनशन स्थल पर सुभाषचंद्र बोस की जयंती मनाई गई। जिसमें बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने कहा कि 23 जनवरी, 1897 को कटक में जन्मे सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु का विवाद भी अभी तक नहीं सुलझ पाया। संरक्षक अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि 1992 में केंद्र की तत्कालीन सरकार ने पहली बार उनकी शख्सियत को सम्मान दिया और भारत रत्न देने की घोषणा की, लेकिन उनके परिवार ने यह कहकर भारत रत्न लेने से इंकार कर दिया कि जब उनकी मौत का कोई सबूत नहीं मिला तो उनको मरणोपरांत भारत रत्न देने की घोषणा ठीक नहीं। इस मौके पर महामंत्री डॉ. अजय बरसैया, प्रशांत, कृष्णा शंकर जोशी, जग प्रसाद तिवारी, देवेंद्र तिवारी, अमरचंद विश्वकर्मा, कल्लू चौरसिया, इकबाल, सुरेश आदि मौजूद रहे।
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शहर के सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पूर्व प्रधानाचार्य शिव कुमार गोस्वामी ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने भारत माता की सेवा में पूरा जीवन लगा दिया। नेता जी ने आईसीएस की परीक्षा उत्तीर्ण करके नौकरी नहीं की, उन्होंने भारत माता के सच्चे सपूत के रूप में अपना तन-मन-धन समर्पित किया। संगीताचार्य पं. जगप्रसाद तिवारी ने कहा कि सुभाषचंद्र बोस के नाम में नेता शब्द भी सुशोभित होता है। उन्होंने कहा कि आज जो अपने को नेता कहते है, उन्हें सुभाषचंद्र बोस से शिक्षा लेना चाहिए। कार्यक्रम में गिरीश कुमार सक्सेना, आदित्य मिश्रा, देवीचरण शुक्ला आदि मौजूद रहे। स्वामी विवेकानंद महाविद्यालय में सुभाषचंद्र बोस की जयंती बनाई गई। महाविद्यालय के प्राचार्य मो. आरिफ राईन ने कहा कि सुभाषचंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज के सर्वोच्च सेनापति की हैसियत से स्वतंत्र भारत की अस्थाई सरकार बनाई, जिसे विभिन्न देशों ने मान्यता दी। शिशु शिक्षा निकेतन इंटर कॉलेज में जयंती के मौके पर सुभाषचंद्र बोस के चित्र पर पुष्प अर्पित किए गए और उनके जीवन पर प्रकाश डाला गया। इस मौके पर विद्यालय के प्रधानाचार्य शिवकांत त्रिपाठी, बृजेश कुमार यादव के अलावा छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। जिला कांग्रेस कमेटी ने आल्हा चौक स्थित अंबेडकर पार्क में सुभाषचंद्र बोस की जयंती मनाई, जिसमें कार्यकर्ताओं ने सुभाषचंद्र बोस को पुष्पांजलि अर्पित की। इस मौके पर जिलाध्यक्ष तुलसीदास लोधी, महेश अहिरवार, अजीज खां, अनिल श्रीवास्तव, शहंशाह अली, संतोष धुरिया कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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अनशन स्थल पर मनी सुभाषचंद्र की जयंती
महोबा। अलग राज्य की मांग को लेकर शहर के आल्हा चौक में चल रहे अनशन स्थल पर सुभाषचंद्र बोस की जयंती मनाई गई। जिसमें बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने कहा कि 23 जनवरी, 1897 को कटक में जन्मे सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु का विवाद भी अभी तक नहीं सुलझ पाया। संरक्षक अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि 1992 में केंद्र की तत्कालीन सरकार ने पहली बार उनकी शख्सियत को सम्मान दिया और भारत रत्न देने की घोषणा की, लेकिन उनके परिवार ने यह कहकर भारत रत्न लेने से इंकार कर दिया कि जब उनकी मौत का कोई सबूत नहीं मिला तो उनको मरणोपरांत भारत रत्न देने की घोषणा ठीक नहीं। इस मौके पर महामंत्री डॉ. अजय बरसैया, प्रशांत, कृष्णा शंकर जोशी, जग प्रसाद तिवारी, देवेंद्र तिवारी, अमरचंद विश्वकर्मा, कल्लू चौरसिया, इकबाल, सुरेश आदि मौजूद रहे।
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