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फेस मास्क ने कोरोना ही नहीं टीबी पर भी लगाई लगाम
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महोबा। कोरोना से बचाव के लिए लगाया जाने वाला मास्क कोरोना ही नहीं क्षय (टीबी ) रोगियों लिए भी मुफीद है। जिला क्षय रोग विभाग के सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार लोगों के मास्क लगाने से टीबी रोगियों में कमी आई है।
वर्ष 2019 में 1771 रोगी मिले थे। वर्ष 2020 में यह मरीजों का आंकड़ा घटकर 1260 हो गई। 2021 में 1244 मरीज मिले। वर्ष 2022 में जनवरी से अब तक 238 मरीज चिह्नित किए गए। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक तीन वर्ष में टीबी रोगियों में काफी कमी आई है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. जीआर रत्मेले ने कहा कि मास्क ने कोविड से तो बचाव किया ही, टीबी पर भी लगाम लगी है। भविष्य में भी इसका फायदा मिलेगा। शहर के बजरिया निवासी 28 वर्षीय रामखेलावन (परिवर्तित नाम) का कहना है कि वह टीबी रोग से पीड़ित हैं। संक्रमण के दौरान में उन्होंने नियमति तौर पर मास्क का उपयोग किया। साथ ही परिवार के अन्य लोगों को भी उन्होंने बाहर व घर पर मास्क लगवाया। इससे उनका परिवार पूर तरह सुरक्षित है। बंधानपुरा के 46 वर्षीय अशोक विद्यार्थी (परिवर्तित नाम) बताते हैं कि वह डेढ़ साल से क्षय रोग से पीड़ित हैं। दवा के साथ वह लगातार मास्क का इस्तेमाल कर रहे हैं। अब उनका स्वास्थ्य पहले से बेहतर है।
रोगी के छींकने से फैलता टीबी
जिला कार्यक्रम समन्वयक नरेंद्र सिंह ने बताया कि टीबी एक-दूसरे में अक्सर छींक और सांस से निकलने वाले कीटाणुओं से ही फैलता है। विभागीय मानक है कि टीबी का एक रोगी 15 अन्य लोगों को संक्रमित कर सकता है। कोविड-19 के चलते मास्क सभी के लिए जरूरी हो गया तो सांसों से फैलने वाले रेाग पर लगाम लगी।
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रोगियों पर एक नजर
वर्ष रोगी
2019 1771
2020 1260
2021 1244
2022 (अब तक)- 238
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वर्ष 2019 में 1771 रोगी मिले थे। वर्ष 2020 में यह मरीजों का आंकड़ा घटकर 1260 हो गई। 2021 में 1244 मरीज मिले। वर्ष 2022 में जनवरी से अब तक 238 मरीज चिह्नित किए गए। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक तीन वर्ष में टीबी रोगियों में काफी कमी आई है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. जीआर रत्मेले ने कहा कि मास्क ने कोविड से तो बचाव किया ही, टीबी पर भी लगाम लगी है। भविष्य में भी इसका फायदा मिलेगा। शहर के बजरिया निवासी 28 वर्षीय रामखेलावन (परिवर्तित नाम) का कहना है कि वह टीबी रोग से पीड़ित हैं। संक्रमण के दौरान में उन्होंने नियमति तौर पर मास्क का उपयोग किया। साथ ही परिवार के अन्य लोगों को भी उन्होंने बाहर व घर पर मास्क लगवाया। इससे उनका परिवार पूर तरह सुरक्षित है। बंधानपुरा के 46 वर्षीय अशोक विद्यार्थी (परिवर्तित नाम) बताते हैं कि वह डेढ़ साल से क्षय रोग से पीड़ित हैं। दवा के साथ वह लगातार मास्क का इस्तेमाल कर रहे हैं। अब उनका स्वास्थ्य पहले से बेहतर है।
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रोगी के छींकने से फैलता टीबी
जिला कार्यक्रम समन्वयक नरेंद्र सिंह ने बताया कि टीबी एक-दूसरे में अक्सर छींक और सांस से निकलने वाले कीटाणुओं से ही फैलता है। विभागीय मानक है कि टीबी का एक रोगी 15 अन्य लोगों को संक्रमित कर सकता है। कोविड-19 के चलते मास्क सभी के लिए जरूरी हो गया तो सांसों से फैलने वाले रेाग पर लगाम लगी।
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रोगियों पर एक नजर
वर्ष रोगी
2019 1771
2020 1260
2021 1244
2022 (अब तक)- 238