{"_id":"5e80c55a8ebc3e77b463b68d","slug":"korona-mahoba-news-knp5528685137","type":"story","status":"publish","title_hn":"नातिन को गोद में लिए पैदल चलकर शोभा पहुंचीं गांव, दिल्ली से महोबा लौटी शोभा ने बताया 560 किमी चलीं हैं पैदल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नातिन को गोद में लिए पैदल चलकर शोभा पहुंचीं गांव, दिल्ली से महोबा लौटी शोभा ने बताया 560 किमी चलीं हैं पैदल
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नातिन के साथ दास्तां बताती शोभा
- फोटो : MAHOBA
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महोबा। कोरोना के बढ़ते संक्रमण और देश में लॉकडाउन होने से वाहनों का संचालन ठप हो जाने से लोगों को उनका घर खींच रहा है। महानगरों में रहकर मेहनत-मजदूरी करने वाले पैदल घरों को लौट रहे हैं। उनके सफर की कहानी सुनकर लोग परेशान हो रहे हैं। कुछ ऐसी की दुश्वारियों के बीच महोबा लौटी शोभा सात दिन तक भूखे पेट पैदल चली। एक कंधे पर बैग का बोझ व दूसरी ओर गोद में नातिन को लेकर 560 किमी पैदल चलकर मंजिल हासिल की है। कई स्थानों पर पुलिस की रोका तो रात के अंधेरे में सड़क किनारे कुछ देर आराम करने के दौरान जीव-जंतुओं का खतरा भी था।
जिले के ग्राम टिकरिया निवासी शोभा (45) पत्नी रामकिशन दिल्ली में रहकर बेटे रामकृृपाल के साथ मेहनत-मजदूरी का काम करती है। शोभा ने बताया एक सप्ताह पहले कोरोना के बढ़ते संक्रमण को लेकर पूरा दिल्ली लॉकडाउन हो गया। काम बंद होने और घरों के कैद रहने पर परिवार के अन्य सदस्यों के लगातार फोन आ रहे थे। बेटा पहले घर आ गया था वह और उसकी 4 वर्षीय नातिन रिया घर पर अकेली थी। घर में जो सामग्री रखी थी वो खत्म हो गई। तब उसने पैदल ही घर जाने की ठानी। एक कंधे पर बैग का बोझ और दूसरे पर नातिन को लेकर महोबा के लिए पैदल चली। पांच दिन तक भोजन न मिलने से पैर आगे नहीं बढ़ रहे थे। छठवें दिन रास्ते में कुछ लोगों ने लंच पैकेट बांटे। एक लंच पैकेट में नातिन रिया और हमने भोजन किया। जिससे शरीर में ताकत बढ़ गई और सातवें दिन मंजिल पा ली। रास्तें में पानी पिया और फिर आगे के लिए बढ़ गई। हाथों के जवाब दे जाने पर मासूम को भी कुछ दूर तक पैदल चलाया और फिर कंधे में उठा लिया। तेज धूप होने पर पसीना से तर-बतर रहे और जंगलों में सड़क किनारे एक से दो घंटे आराम किया। आंख खुली तो फिर आगे के लिए चल दिया। महोबा आकर सुकून आया कि जिंदा पहुंच गईं।
श्रीनगर के बिलखी निवासी मदन दिल्ली में रहकर राजमिस्त्री का काम करता है। सात दिन पहले वह दिल्ली से पैदल चले थे। फरीदाबाद में एक चप्पल टूट गई। कोई दुकान न खुली होने से एक हाथ में चप्पल लिए कई किमी चले। रास्ते में रस्सी मिलने पर उसे बांध लिया, लेकिन पैर घिसटते चलने पर बिना चप्पल के ही महोबा तक का सफर तय किया। जिससे उसके पैरों में छाले पड़ गए है। अब एक किमी भी चला नहीं जा रहा है। रास्ते में सात दिन में दो जगह खाना खाया। एक जगह बिस्कुट का पैकेट मिला, जिसे बैग में डाल लिया कि जब भूख बर्दास्त नहीं होगी तब खा लेंगे। पूरे रास्ते में सामग्री का बोझ लादे रहने से कंधों ने जवाब दे दिया है। दो स्थानों पर उनकी जांच की गई। अब महोबा आने पर फिर जिला अस्पताल में जांच के लिए भेजा गया।
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जिले के ग्राम टिकरिया निवासी शोभा (45) पत्नी रामकिशन दिल्ली में रहकर बेटे रामकृृपाल के साथ मेहनत-मजदूरी का काम करती है। शोभा ने बताया एक सप्ताह पहले कोरोना के बढ़ते संक्रमण को लेकर पूरा दिल्ली लॉकडाउन हो गया। काम बंद होने और घरों के कैद रहने पर परिवार के अन्य सदस्यों के लगातार फोन आ रहे थे। बेटा पहले घर आ गया था वह और उसकी 4 वर्षीय नातिन रिया घर पर अकेली थी। घर में जो सामग्री रखी थी वो खत्म हो गई। तब उसने पैदल ही घर जाने की ठानी। एक कंधे पर बैग का बोझ और दूसरे पर नातिन को लेकर महोबा के लिए पैदल चली। पांच दिन तक भोजन न मिलने से पैर आगे नहीं बढ़ रहे थे। छठवें दिन रास्ते में कुछ लोगों ने लंच पैकेट बांटे। एक लंच पैकेट में नातिन रिया और हमने भोजन किया। जिससे शरीर में ताकत बढ़ गई और सातवें दिन मंजिल पा ली। रास्तें में पानी पिया और फिर आगे के लिए बढ़ गई। हाथों के जवाब दे जाने पर मासूम को भी कुछ दूर तक पैदल चलाया और फिर कंधे में उठा लिया। तेज धूप होने पर पसीना से तर-बतर रहे और जंगलों में सड़क किनारे एक से दो घंटे आराम किया। आंख खुली तो फिर आगे के लिए चल दिया। महोबा आकर सुकून आया कि जिंदा पहुंच गईं।
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श्रीनगर के बिलखी निवासी मदन दिल्ली में रहकर राजमिस्त्री का काम करता है। सात दिन पहले वह दिल्ली से पैदल चले थे। फरीदाबाद में एक चप्पल टूट गई। कोई दुकान न खुली होने से एक हाथ में चप्पल लिए कई किमी चले। रास्ते में रस्सी मिलने पर उसे बांध लिया, लेकिन पैर घिसटते चलने पर बिना चप्पल के ही महोबा तक का सफर तय किया। जिससे उसके पैरों में छाले पड़ गए है। अब एक किमी भी चला नहीं जा रहा है। रास्ते में सात दिन में दो जगह खाना खाया। एक जगह बिस्कुट का पैकेट मिला, जिसे बैग में डाल लिया कि जब भूख बर्दास्त नहीं होगी तब खा लेंगे। पूरे रास्ते में सामग्री का बोझ लादे रहने से कंधों ने जवाब दे दिया है। दो स्थानों पर उनकी जांच की गई। अब महोबा आने पर फिर जिला अस्पताल में जांच के लिए भेजा गया।

मदनलाल- फोटो : MAHOBA
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