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Mahoba News: औद्योगिक गलियारा के लिए भूमि देने के लिए तैयार नहीं किसान
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महोबा। जिले में प्रस्तावित औद्योगिक गलियारे के लिए भूमि अधिग्रहण का विरोध करते हुए पांच गांवों के सैकड़ों किसानों ने सोमवार को कलक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। उन्होंने एडीएम न्यायिक सुखवीर सिंह को ज्ञापन सौंपकर अपनी सिंचित भूमि अधिग्रहित न करने की मांग की।
किसानों का कहना है कि खेती ही उनकी जीविका का मुख्य साधन है। सिंचित भूमि अधिग्रहित होने से उन्हें पलायन को मजबूर होना पड़ेगा। यूपीडा ने मवईखुर्द, चिचारा, तमौरा, बरबई और छानीकलां गांवों में भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी की है। इससे किसान चिंतित हैं क्योंकि उनके पास कृषि के अतिरिक्त कोई अन्य आय का साधन नहीं है। प्रस्तावित भूमि अत्यंत उपजाऊ और समतल है। इस भूमि से कबरई बांध की मुख्य नहर भी गुजरती है, जिससे यह सिंचित है। किसानों ने चेतावनी दी कि भूमि अधिग्रहण से उनका जीविकोपार्जन मुश्किल हो जाएगा और वे भूमिहीन होकर पलायन के लिए मजबूर होंगे।
किसानों ने पांच गांवों की भूमि औद्योगिक गलियारे के लिए न लिए जाने की मांग की है। उन्होंने बताया कि यह भूमि कृषि के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। भूमि अधिग्रहण से अधिकतर किसान भूमिहीन हो जाएंगे। भारत कृषि प्रधान देश है और ऐसे में कृषि भूमि का अधिग्रहण अनुचित है।
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किसानों का कहना है कि खेती ही उनकी जीविका का मुख्य साधन है। सिंचित भूमि अधिग्रहित होने से उन्हें पलायन को मजबूर होना पड़ेगा। यूपीडा ने मवईखुर्द, चिचारा, तमौरा, बरबई और छानीकलां गांवों में भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी की है। इससे किसान चिंतित हैं क्योंकि उनके पास कृषि के अतिरिक्त कोई अन्य आय का साधन नहीं है। प्रस्तावित भूमि अत्यंत उपजाऊ और समतल है। इस भूमि से कबरई बांध की मुख्य नहर भी गुजरती है, जिससे यह सिंचित है। किसानों ने चेतावनी दी कि भूमि अधिग्रहण से उनका जीविकोपार्जन मुश्किल हो जाएगा और वे भूमिहीन होकर पलायन के लिए मजबूर होंगे।
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किसानों ने पांच गांवों की भूमि औद्योगिक गलियारे के लिए न लिए जाने की मांग की है। उन्होंने बताया कि यह भूमि कृषि के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। भूमि अधिग्रहण से अधिकतर किसान भूमिहीन हो जाएंगे। भारत कृषि प्रधान देश है और ऐसे में कृषि भूमि का अधिग्रहण अनुचित है।
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