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42 गांवों को दस घंटे से कम मिल रही बिजली

Thu, 16 Dec 2021 12:27 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 16 Dec 2021 12:27 AM IST
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Electricity gasping in villages, fields drying up
श्रीनगर (महोबा)। ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली पहुंचाने का सरकार का दावा खोखला साबित हो रहा है। मौजूदा हालातों में महोबा के श्रीनगर क्षेत्र के 42 गांव और हमीरपुर जिले के सुमेरपुर के 24 गांवों में ग्रामीणों को महज आठ से 10 घंटे ही बिजली मिल रही है। अघोषित कटौती से किसानों को सिंचाई के लिए रातभर खेतों में जागकर बिजली आने का इंतजार करना पड़ता है। बिजली विभाग के अधिकारी लोड अधिक होने की बात कह अपने बचाव में लगे हैं।
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श्रीनगर के 33 केवी पावर स्टेशन से क्षेत्र के 42 गांव को विद्युत आपूर्ति पांच फीडरों से की जाती है। इसमें से एक उर्मिल फीडर से महोबा पेयजल आपूर्ति का कनेक्शन जुड़ा हुआ है। इन फीडरों से 11,856 घरेलू कनेक्शन जुड़े हुए हैं 229 वाणिज्य 378 निजी नलकूप एवं 98 पेयजल योजना के कनेक्शन हैं। इसके अलावा 200 से ज्यादा अस्थायी सिंचाई कनेक्शन दिए गए हैं। पावर हाउस में मात्र दो ट्रांसफार्मर पांच-पांच एमबीए के लगे हुए हैं जोकि क्षमता से बहुत कम है। इसके चलते पावर हाउस में लगी मशीनें लोड नहीं ले पाती हैं। अवर अभियंता जय वीर सिंह का कहना है कि लोड अधिक होने के कारण सभी गांव में विद्युत आपूर्ति देना संभव नहीं है उनका कहना है कि अधीक्षण अभियंता के यहां से अधिक क्षमता के ट्रांसफार्मर लगाए जाने के लिए स्वीकृति मिल चुकी है शीघ्र ही क्षमता वृद्धि कर सही विद्युत आपूर्ति होने लगेगी।
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अक्सर फाल्ट से गुल रहती है बिजली
श्रीनगर-महोबा 33 केवी पावर हाउस से फीडरों के लिए निकली लाइनें जर्जर होने से भी विद्युत आपूर्ति प्रभावित होती है। पावर हाउस से भंडरा फीडर से ढिकवाहा तक ननौरा फीडर से ननोरा गांव तक एवं सिजहरी फीडर से गांव तक विद्युत लाइनें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हैं। इसके चलते आए दिन लाइनों में फाल्ट होते रहते हैं इससे विद्युत आपूर्ति प्रभावित होती है। लाइन टूटने का खतरा बना रहता है लेकिन विभाग द्वारा इन लाइनों को नहीं बदला जा रहा है। अवर अभियंता का कहना है कि इसका भी प्रस्ताव भेजा गया है स्वीकृति मिलते ही लाइनें दुरुस्त करा दी जाएंगी।
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ग्राम सिजहरी निवासी बबलू अहिरवार का कहना है शासन के 18 घंटे बिजली आपूर्ति के आदेश के बाद भी मात्र आठ घंटे विद्युत आपूर्ति मिल रही है इससे घर के कामकाज प्रभावित होते रहते हैं जबकि विभाग बिल का पूरा पैसा लेता है यह उपभोक्ताओं के साथ अन्याय है।
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श्रीनगर के किसान विनोद तिवारी कहते हैं कि लाखों रुपए खर्च करके उन्होंने ट्यूबवेल का स्थाई कनेक्शन लिया था लेकिन बिजली आपूर्ति सही ना मिलने से सिंचाई नहीं हो पा रही है इसके चलते बुवाई का कार पिछड़ रही है।
हमीरपुर। दिसंबर माह के पहले पखवाड़े में नलकूप व लिफ्ट कैनालों में बिजली की खपत अचानक बढ़ गई हैं। ऐसे में कुछ सबस्टेशनों में कम क्षमता के ट्रांसफार्मर होने से आपूर्ति बाधित हो रही है। सुमेरपुर के टेढ़ा और राठ के औड़ेरा फीडरों में अत्यधिक लोड पड़ने पर परेशान किसान प्रदर्शन कर चुके हैं। इन फीडरों से जुड़े 24 गांवों को बमुश्किल सात से आठ घंटे ही बिजली मिल पा रही है।
जिले में करीब 15 हजार निजी व 575 राजकीय नलकूप और 10 लिफ्ट कैनाल संचालित हैं। मौजूदा में करीब 90 मेगावाट यूनिट खर्च हो रही है। जबकि खेती किसानी का सीजन होने पर करीब 35 मेगावाट यूनिट बिजली की और जरूरत है। हालांकि पावर कारपोरेशन के अधिकारी बिजली में सुधार होने का दावा कर रहे हैं।
वहीं अधीक्षण अभियंता बिजली विभाग अरविंद कुमार ने बताया कि सितंबर माह में जहां 47 मेगावाट यूनिट की खपत थी। वहीं नवंबर में 52 मेगावाट पहुंच गई। दिसंबर में खेती बाड़ी का कार्य बढ़ने से 85 से 90 मेगावाट यूनिट बिजली खर्च हो रही है।
चार सोलर प्लांटों से 27 मेगावाट बिजली
जिले में चार सोलर प्लांट संचालित हैं। जिनमें 27 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है। जिसमें आर्यावान रिन्यूएवेल एनर्जी प्रा.लि. पांच मेगावाट, सलासर ग्रीन एनर्जी प्रा.लि. पांच मेगावाट, लोहिया डेवलेपर प्रालि सात मेगावाट, एज्यूर पावर सोलर प्लांट 10 मेगावाट बिजली दे रहे हैं।
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14 पावर स्टेशन दूर करेंगे किल्लत
अधीक्षण अभियंता अरविंद कुमार ने बताया कि दक्षिणांचल पावर कारपोरेशन ने वर्ष 2021-22 में 14 स्टेशन प्रस्तावित किए हैं। इसमें 220 केवी का एक, 132 केवी के दो एवं 33 केवी के 11 सब स्टेशन हैं। इनमें 220 केवी सब स्टेशन शहर के लिए प्रस्तावित किया गया है। वहीं 132 केवी मुस्करा व गोहांड ब्लाकों में स्थापित किए जाने हैं। 33 केवी के तीन सब स्टेशन सदर तहसील के अरतरा, कुनेहटा व भंभौरा में प्रस्तावित हैं। वहीं राठ क्षेत्र में 33 केवी के आठ सब स्टेशन बनाए जाने हैं। इनमें सरीला के धौहल, बरेल में व राठ में सेना रोड, धनौरी, गुंदेला, गोहली, इटैलियाबाजा व जरिया में प्रस्तावित हैं। जिनके लिए विभाग जगह का चिंहांकन कर रहा है। इन सब स्टेशनों का निर्माण होने से जनपद में बिजली की किल्लत से छुटकारा मिलने की संभावना है।
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जिले में बिजली की खपत
चार 132 केवी व 33 केवी के 33 छोटे सब स्टेशनों से 1617 किलोवाट बिजली की जिले में खपत है। जबकि जनपद में मौजूदा समय में करीब 90 मेगावाट यूनिट बिजली की जरूरत है। बता दें कि जिले में 132 केवी के चार बड़े सब स्टेशन हैं। जो सुमेरपुर, पतारा, राठ, सरीला में संचालित हैं। वहीं 33 केवी के 33 छोटे सब स्टेशन हैं।
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18 घंटे मिल रही बिजली
कारीमाटी निवासी किसान हरीशंकर ने बताया कि अभी मई माह में नलकूप लगवाया है। बताया कि रात में पर्याप्त बिजली मिलती है। दिन में कटौती होती है। कहा करीब 15 घंटे बिजली मिल पाती है।

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जर्जर लाइन हो नवीनीकरण
फोटो 11 एचएएमपी 14 राजेंद्र कुमार दुबे
पत्योरा निवासी राजेंद्र कुमार दुबे ने बताया कि सुमेरपुुर के कैनाल फीडर से सप्लाई आती है। जर्जर लाइन होने से आए दिन बिजली आपूर्ति बाधित रहने से दिक्कत आती है। कभी कभी सप्लाई 15 से 17 घंटे तक मिल जाती है। कहा कि दशकों पुरानी लाइन का नवीनीकरण कराया जाना चाहिए।
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