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Mahoba News: अपंगता को मात दे आत्मनिर्भर बन रहे दिव्यांग
Mon, 20 Oct 2025 12:00 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
Updated Mon, 20 Oct 2025 12:00 AM IST
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महोबा। शहर के दिव्यांग अब अपंगता को मात देकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं। वे गाय के गोबर से राम दरबार, लक्ष्मी-गणेश, भगवान शिव की मूर्तियां और दीपक, तो सूखे हुए फूलों से धूपबत्ती जैसे उत्पाद बनाकर अपना हुनर दिखा रहे हैं। दिवाली पर इन उत्पादों की बिक्री भी खूब हो रही है। सोमवार को मुख्य बाजार में इन उत्पादों की बिक्री के लिए स्टॉल भी लगाए जाएंगे।
बुंदेलखंड सोसायटी फॉर रूरल डेवलेपमेंट संस्था इन दिनों दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयास कर रही है। संस्था के प्रबंधक आकाश राय बताते हैं कि मंदिरों से निकलने वाले फूलों और गाय के गोबर से उत्पाद बनाए जा रहे हैं। इसमें दिव्यांग बच्चों का सहयोग लिया जा रहा है। बंधानवार्ड स्थित संस्था के कार्यालय में संस्था से जुड़े दिव्यांग बच्चे इस कार्य में सहयोग कर रहे हैं। संस्था से जुड़े प्रीति, इंद्रेश, शिखा, शालिनी, दिनेश, लवली, मनोज, अखिलेश, ऊषा, आशीष, श्याम आदि 20 से अधिक दिव्यांग बच्चों को मिट्टी और गोबर से मूर्तियां व सजावटी सामान बनाने का प्रशिक्षण दिया गया है। इसके साथ ही फूलों को सुखाकर पाउडर बनाने और धूपबत्ती तैयार करना भी सिखाया जा रहा है। दीपक और मूर्तियां बनाने के लिए गोशाला से गोबर लाकर इसमें इमली के बीज, मैदा, लकड़ी का पाउडर और मुल्तानी मिट्टी मिलाते हैं। इस मिश्रण को धूप में सुखाने के बाद रंग भरकर बत्ती लगाते हैं। इसके बाद दीपक की पैकिंग करते हैं। इसी तरह से सांचों में यह मिश्रण भरकर मूर्तियां भी तैयार की जा रही हैं। सोमवार को दिवाली के अवसर पर शहर के मुख्य बाजार में इन उत्पादों की बिक्री के लिए स्टॉल भी लगाए जाएंगे।
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बुंदेलखंड सोसायटी फॉर रूरल डेवलेपमेंट संस्था इन दिनों दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयास कर रही है। संस्था के प्रबंधक आकाश राय बताते हैं कि मंदिरों से निकलने वाले फूलों और गाय के गोबर से उत्पाद बनाए जा रहे हैं। इसमें दिव्यांग बच्चों का सहयोग लिया जा रहा है। बंधानवार्ड स्थित संस्था के कार्यालय में संस्था से जुड़े दिव्यांग बच्चे इस कार्य में सहयोग कर रहे हैं। संस्था से जुड़े प्रीति, इंद्रेश, शिखा, शालिनी, दिनेश, लवली, मनोज, अखिलेश, ऊषा, आशीष, श्याम आदि 20 से अधिक दिव्यांग बच्चों को मिट्टी और गोबर से मूर्तियां व सजावटी सामान बनाने का प्रशिक्षण दिया गया है। इसके साथ ही फूलों को सुखाकर पाउडर बनाने और धूपबत्ती तैयार करना भी सिखाया जा रहा है। दीपक और मूर्तियां बनाने के लिए गोशाला से गोबर लाकर इसमें इमली के बीज, मैदा, लकड़ी का पाउडर और मुल्तानी मिट्टी मिलाते हैं। इस मिश्रण को धूप में सुखाने के बाद रंग भरकर बत्ती लगाते हैं। इसके बाद दीपक की पैकिंग करते हैं। इसी तरह से सांचों में यह मिश्रण भरकर मूर्तियां भी तैयार की जा रही हैं। सोमवार को दिवाली के अवसर पर शहर के मुख्य बाजार में इन उत्पादों की बिक्री के लिए स्टॉल भी लगाए जाएंगे।
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