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एनजीटी ने बैठाई उच्चस्तरीय जांच
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महोबा। कोतवाली क्षेत्र के बिलवई गांव में नियम विरुद्घ तरीके से चल रहे खनन कार्य में अनियमितता की शिकायत पर एनजीटी ने उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की है।
जांच समिति दो माह में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। मामले की अगली सुनवाई 19 अक्तूबर को होगी।
बिलवई गांव में तीन पट्टाधारक पहाड़ में खनन कार्य करा रहे हैं। नियमों को ताक पर रखकर मनमाने तरीके से खनन कराने पर किसानों ने राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण में अपील की थी।
किसानों का कहना था कि जिन शर्तों पर पट्टा खनन कार्य के लिए दिया गया है। उनमें से किसी भी शर्त का पालन नहीं हो रहा है। जिससे ग्रामीणों को जानमाल का खतरा बना है।
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नियमानुसार पहाड़ में ब्लॉस्टिंग का काम आधी रात के समय होना चाहिए लेकिन दोपहर के समय ब्लॉस्टिंग की जा रही है। ब्लॉस्टिंग के दौरान छोटे-बड़े पत्थर उछलकर खेतों में गिरते हैं। जिससे किसानों को जान का खतरा बना रहता है।
ब्लॉस्टिंग के समय श्रमिकों के रुकने के लिए टीन-शेड भी नहीं बना है। पट्टाधारकों के ट्रक किसानों के खेतों से निकलने से खेत बर्बाद हो रहे हैं। कुछ समय पहले पट्टाधारकों ने ग्रामीणों पर फर्जी मुकदमा दर्ज कराने की नाकाम कोशिश भी की थी।
एनजीटी ने आठ अगस्त को मामले की सुनवाई की। जिसमें किसानों की ओर सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता सीमा पटनाहा सिंह ने किसानों का पक्ष रखा। प्राधिकरण ने अपने आदेश में उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है। जिसे दो माह में रिपोर्ट प्राधिकरण को सौंपना है।
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जांच समिति दो माह में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। मामले की अगली सुनवाई 19 अक्तूबर को होगी।
बिलवई गांव में तीन पट्टाधारक पहाड़ में खनन कार्य करा रहे हैं। नियमों को ताक पर रखकर मनमाने तरीके से खनन कराने पर किसानों ने राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण में अपील की थी।
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किसानों का कहना था कि जिन शर्तों पर पट्टा खनन कार्य के लिए दिया गया है। उनमें से किसी भी शर्त का पालन नहीं हो रहा है। जिससे ग्रामीणों को जानमाल का खतरा बना है।
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नियमानुसार पहाड़ में ब्लॉस्टिंग का काम आधी रात के समय होना चाहिए लेकिन दोपहर के समय ब्लॉस्टिंग की जा रही है। ब्लॉस्टिंग के दौरान छोटे-बड़े पत्थर उछलकर खेतों में गिरते हैं। जिससे किसानों को जान का खतरा बना रहता है।
ब्लॉस्टिंग के समय श्रमिकों के रुकने के लिए टीन-शेड भी नहीं बना है। पट्टाधारकों के ट्रक किसानों के खेतों से निकलने से खेत बर्बाद हो रहे हैं। कुछ समय पहले पट्टाधारकों ने ग्रामीणों पर फर्जी मुकदमा दर्ज कराने की नाकाम कोशिश भी की थी।
एनजीटी ने आठ अगस्त को मामले की सुनवाई की। जिसमें किसानों की ओर सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता सीमा पटनाहा सिंह ने किसानों का पक्ष रखा। प्राधिकरण ने अपने आदेश में उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है। जिसे दो माह में रिपोर्ट प्राधिकरण को सौंपना है।