{"_id":"6244af295c84c47aba60e933","slug":"children-learning-in-sports-now-handwriting-is-improving-in-writing-mahoba-news-knp688435249","type":"story","status":"publish","title_hn":"खेल-खेल में सीख रहे बच्चे, अब लिखने में सुधर रही हैंड राइटिंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खेल-खेल में सीख रहे बच्चे, अब लिखने में सुधर रही हैंड राइटिंग
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महोबा/ कबरई। कोरोना काल में सभी शिक्षण संस्थान बंद रहे, जिससेे बच्चों ने घर पर रहकर ही ऑनलाइन पढ़ाई की, लिखने की आदत भी छूटी, अब ऑफ लाइन पढ़ाई शुरू होने से बच्चें खुश हैं। हर दिन कुछ नया सीख रहे हैं। राइटिंग में सुधार भी हो रहा है।
प्राथमिक विद्यालय मकरबई खोड़ा की अध्यापक लक्ष्मी झा ने बताया कि कोरोना के कारण लंबे समय तक विद्यालय बंद रहने से गांव के बच्चों को किसी भी तरह की शिक्षा नही मिल पाई, ट्यूशन की भी व्यवस्था नही है और ऑनलाइन पढ़ाई के लिए एंड्राइड फोन भी नही है, जिससे उनका शैक्षिक स्तर गिर गया लेकिन अब फिर से लगातार स्कूल खुलने से बच्चों की दिनचर्या में परिवर्तन होने के साथ ही पढ़ाई की तरफ रुझान बढ़ने लगा है।
कक्षा पांच की छात्रा संतोषी का कहना है कि कोरोना काल मे स्कूल बंद होने से पढ़ाई नही हो पाई लेकिन अब स्कूल जाने से किताबों की पढ़ाई के सामाजिक कार्यों के बारे में सिखाया जा रहा है।
विज्ञापन
कक्षा चार की छात्रा पारुल ने बताया कि स्कूल बंद रहने से पिछला भी भूल गया था। अब लगातार स्कूल जाने और अभ्यास करने से सुधार हो रहा है।
कक्षा तीन के छात्र बरदानी का कहना है कि स्कूल खुलने से अब ऑफलाइन की पढ़ाई में समझ मे आता है। ऑनलाइन पढ़ाई में ज्यादा समझ मे नही आता था।
कक्षा तीन के छात्र अतुल का कहना है कि स्कूल जाने से दोस्तों पढ़ाई के अलावा दोस्तों से भी कई बातें सीखने को मिलती हैं तथा दिनचर्या भी बदल गई है। स्कूल में खूब मस्ती भी करते हैं।
पूर्व माध्यमिक विद्यालय चिचारा के प्रधानाध्यापक राकेश विश्वकर्मा का कहना है कि बच्चों के लगातार विद्यालय आने से पढ़ाई के साथ साथ अनुशासन व सामाजिकता का भी ज्ञान बढ़ता है, तथा बच्चों की दिनचर्या में भी सुधार होता है। अब उनकी लेखनी में भी सुधार है।
प्राथमिक विद्यालय विशाल नगर कबरई के प्रधानाध्यापक सुशील त्रिपाठी का कहना है कि कोरोना के समय स्कूल बंद रहने से बच्चे बहुत कुछ भूल गए थे किंतु अब लगातार विद्यालय खुलने से बच्चों का लगाव भी पढ़ाई की ओर बढ़ने लगा है तथा विद्यालय आने से पढ़ाई के अलावा और भी तमाम जानकारियां उन्हें मिलतीं हैं।
विज्ञापन
प्राथमिक विद्यालय मकरबई खोड़ा की अध्यापक लक्ष्मी झा ने बताया कि कोरोना के कारण लंबे समय तक विद्यालय बंद रहने से गांव के बच्चों को किसी भी तरह की शिक्षा नही मिल पाई, ट्यूशन की भी व्यवस्था नही है और ऑनलाइन पढ़ाई के लिए एंड्राइड फोन भी नही है, जिससे उनका शैक्षिक स्तर गिर गया लेकिन अब फिर से लगातार स्कूल खुलने से बच्चों की दिनचर्या में परिवर्तन होने के साथ ही पढ़ाई की तरफ रुझान बढ़ने लगा है।
विज्ञापन
कक्षा पांच की छात्रा संतोषी का कहना है कि कोरोना काल मे स्कूल बंद होने से पढ़ाई नही हो पाई लेकिन अब स्कूल जाने से किताबों की पढ़ाई के सामाजिक कार्यों के बारे में सिखाया जा रहा है।
विज्ञापन
कक्षा चार की छात्रा पारुल ने बताया कि स्कूल बंद रहने से पिछला भी भूल गया था। अब लगातार स्कूल जाने और अभ्यास करने से सुधार हो रहा है।
कक्षा तीन के छात्र बरदानी का कहना है कि स्कूल खुलने से अब ऑफलाइन की पढ़ाई में समझ मे आता है। ऑनलाइन पढ़ाई में ज्यादा समझ मे नही आता था।
कक्षा तीन के छात्र अतुल का कहना है कि स्कूल जाने से दोस्तों पढ़ाई के अलावा दोस्तों से भी कई बातें सीखने को मिलती हैं तथा दिनचर्या भी बदल गई है। स्कूल में खूब मस्ती भी करते हैं।
पूर्व माध्यमिक विद्यालय चिचारा के प्रधानाध्यापक राकेश विश्वकर्मा का कहना है कि बच्चों के लगातार विद्यालय आने से पढ़ाई के साथ साथ अनुशासन व सामाजिकता का भी ज्ञान बढ़ता है, तथा बच्चों की दिनचर्या में भी सुधार होता है। अब उनकी लेखनी में भी सुधार है।
प्राथमिक विद्यालय विशाल नगर कबरई के प्रधानाध्यापक सुशील त्रिपाठी का कहना है कि कोरोना के समय स्कूल बंद रहने से बच्चे बहुत कुछ भूल गए थे किंतु अब लगातार विद्यालय खुलने से बच्चों का लगाव भी पढ़ाई की ओर बढ़ने लगा है तथा विद्यालय आने से पढ़ाई के अलावा और भी तमाम जानकारियां उन्हें मिलतीं हैं।