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बुद्ध पूर्णिमा पर भक्तों ने लगाई गोरखगिरि की परिक्रमा
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महोबा। बुद्ध पूर्णिमा पर बुधवार को भक्तों ने ऐतिहासिक गोरखगिरि की परिक्रमा लगाई। इसके बाद पर्वत के ऊपर स्थित सिद्धबाबा आश्रम में नाथ संप्रदाय के प्रणेता गुरू गोरखनाथ का प्रकटोत्सव मनाकर देश को कोरोना से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की। गुरू गोरखनाथ के इसी पर्वत पर तप करने से इसका नाम गोरखगिरि पड़ा।
बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने बताया कि गोरखगिरि में करीब 2 हजार फीट ऊपर स्थित सिद्ध बाबा मंदिर में जो चिमटा और खड़ाऊ रखे हैं, ऐसी मान्यता है कि ये दोनों गुरू गोरखनाथ के ही हैं। वे अपनी निशानी के तौर इन्हें यहां छोड़ गए थे। चिमटे की लंबाई 5 फीट और खड़ाऊ 12 इंच लंबी हैं। चिमटा मंदिर में जमीन के अंदर दो फीट से ज्यादा लंबवत स्थापित है। आज ही के दिन नेपाल के गोरखा जिले में गुरू गोरखनाथ के प्रकटोत्सव को रोट महोत्सव के रूप में मनाया जाता है।
इस मौके पर डॉ. एलसी अनुरागी, संतोष पटेरिया, हरि शरण सक्सेना, अवधेश गुप्ता, बाबा रामदास त्यागी, प्रवीण चौरसिया, दिनेश खरे, प्रहलाद पुरवार, ग्यासीलाल, मुन्ना जैन, आशुतोष चौरसिया व उमेश यादव आदि भक्त मौजूद रहे।
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बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने बताया कि गोरखगिरि में करीब 2 हजार फीट ऊपर स्थित सिद्ध बाबा मंदिर में जो चिमटा और खड़ाऊ रखे हैं, ऐसी मान्यता है कि ये दोनों गुरू गोरखनाथ के ही हैं। वे अपनी निशानी के तौर इन्हें यहां छोड़ गए थे। चिमटे की लंबाई 5 फीट और खड़ाऊ 12 इंच लंबी हैं। चिमटा मंदिर में जमीन के अंदर दो फीट से ज्यादा लंबवत स्थापित है। आज ही के दिन नेपाल के गोरखा जिले में गुरू गोरखनाथ के प्रकटोत्सव को रोट महोत्सव के रूप में मनाया जाता है।
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इस मौके पर डॉ. एलसी अनुरागी, संतोष पटेरिया, हरि शरण सक्सेना, अवधेश गुप्ता, बाबा रामदास त्यागी, प्रवीण चौरसिया, दिनेश खरे, प्रहलाद पुरवार, ग्यासीलाल, मुन्ना जैन, आशुतोष चौरसिया व उमेश यादव आदि भक्त मौजूद रहे।
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