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Mahoba News: आवास के लिए आवेदन, फोटो भी खिंची... फिर भी नहीं मिला घर
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फोटो 08 एमएएचपी 12 परिचय-कच्चा मकान गिरने से खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर बेवा रानी। संवाद
कबरई (महोबा)। प्रधानमंत्री आवास योजना में जिम्मेदारों की मनमानी का खामियाजा गरीबों को भुगतना पड़ रहा है। लगातार बारिश से कच्चा मकान ढहने से आजादनगर कबरई निवासी बेवा रानी खुले आसमान के नीचे जिंदगी गुजारने को मजबूर है। उसने एक साल पहले प्रधानमंत्री आवास के लिए आवेदन किया। फोटो भी खींची गई लेकिन योजना का लाभ नहीं मिला।
आजादनगर निवासी बेवा रानी की कहानी आवास योजना के दावों पर सवाल खड़े करती है। उसके पति पप्पू प्रजापति की 16 नवंबर 2023 को दमा की बीमारी से मौत हो गई थी। पति के निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उसके कंधों पर आ गई। मजदूरी करके वह बेटी कल्पना, बेटे ओमप्रकाश, तुलसीदास, अरविंद व अजय की परवरिश कर रही है।
पीड़िता ने बताया कि कच्चा मकान होने पर एक साल पहले उसने प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ पाने के लिए आवेदन किया था। फॉर्म भरने के बाद आवास के लिए विभाग की ओर से फोटो भी खींची गई लेकिन उसे आवास नहीं मिल सका। सरकारी आवास की आस लगाए परिवार का कच्चा मकान बारिश में गिर गया। इससे अब वह परिवार समेत खुले में रहने को मजबूर है। पीड़िता ने प्रशासन से सरकारी सहायता और आवास का लाभ दिलाए जाने की मांग की है।
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बारिश बंद होने के बाद नमी के चलते गिरे 12 से अधिक मकान
चरखारी। जिले में एक पखवाड़े हुई झमाझम बारिश के बाद दो दिन से मौसम भले ही साफ है लेकिन लगातार बारिश से दीवारों में बैठी नमी के चलते कच्चे मकानों के गिरने का सिलसिला जारी है। तहसील चरखारी के भटेवराकलां, बम्हौरीखुर्द, जरौली, बगरौन आदि गांवों में 12 से अधिक कच्चे मकान धराशायी हो गए।
मलबे में दबकर भटेवराकलां के परमेश्वरीदयाल, रामस्वरूप, बम्हौरीखुर्द के तुलसीदास, गजराज, नारायणदास, अच्छेलाल, मातादीन, विनोद, बगरौन के सिद्धा, जरौली के रामभरोसे, दमदमा के पुष्पेंद्र, रामजीवन आदि पीड़ितों की हजारों की गृहस्थी व सामान बर्बाद हो गया है। एसडीएम अवनीश तिवारी के नेतृत्व में गठित टीमों ने मकानों का सर्वे कर गृहस्वामियों को राहत राशि दिलाने की सूची तैयार कराई। कानूनगो सत्यप्रकाश राठौर, प्रदीप कुमार ने भटेवराकलां, जरौली, चंदौली आदि गांवों में लेखपालों के साथ मौके पर पहुंच बारिश में गिरे मकानों का सत्यापन किया। उधर, एसडीएम का कहना है कि बारिश से गिरे मकानों का सर्वे कराया जा रहा है। जल्द ही सहायता राशि मुहैया कराई जाएगी।
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आजादनगर निवासी बेवा रानी की कहानी आवास योजना के दावों पर सवाल खड़े करती है। उसके पति पप्पू प्रजापति की 16 नवंबर 2023 को दमा की बीमारी से मौत हो गई थी। पति के निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उसके कंधों पर आ गई। मजदूरी करके वह बेटी कल्पना, बेटे ओमप्रकाश, तुलसीदास, अरविंद व अजय की परवरिश कर रही है।
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पीड़िता ने बताया कि कच्चा मकान होने पर एक साल पहले उसने प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ पाने के लिए आवेदन किया था। फॉर्म भरने के बाद आवास के लिए विभाग की ओर से फोटो भी खींची गई लेकिन उसे आवास नहीं मिल सका। सरकारी आवास की आस लगाए परिवार का कच्चा मकान बारिश में गिर गया। इससे अब वह परिवार समेत खुले में रहने को मजबूर है। पीड़िता ने प्रशासन से सरकारी सहायता और आवास का लाभ दिलाए जाने की मांग की है।
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बारिश बंद होने के बाद नमी के चलते गिरे 12 से अधिक मकान
चरखारी। जिले में एक पखवाड़े हुई झमाझम बारिश के बाद दो दिन से मौसम भले ही साफ है लेकिन लगातार बारिश से दीवारों में बैठी नमी के चलते कच्चे मकानों के गिरने का सिलसिला जारी है। तहसील चरखारी के भटेवराकलां, बम्हौरीखुर्द, जरौली, बगरौन आदि गांवों में 12 से अधिक कच्चे मकान धराशायी हो गए।
मलबे में दबकर भटेवराकलां के परमेश्वरीदयाल, रामस्वरूप, बम्हौरीखुर्द के तुलसीदास, गजराज, नारायणदास, अच्छेलाल, मातादीन, विनोद, बगरौन के सिद्धा, जरौली के रामभरोसे, दमदमा के पुष्पेंद्र, रामजीवन आदि पीड़ितों की हजारों की गृहस्थी व सामान बर्बाद हो गया है। एसडीएम अवनीश तिवारी के नेतृत्व में गठित टीमों ने मकानों का सर्वे कर गृहस्वामियों को राहत राशि दिलाने की सूची तैयार कराई। कानूनगो सत्यप्रकाश राठौर, प्रदीप कुमार ने भटेवराकलां, जरौली, चंदौली आदि गांवों में लेखपालों के साथ मौके पर पहुंच बारिश में गिरे मकानों का सत्यापन किया। उधर, एसडीएम का कहना है कि बारिश से गिरे मकानों का सर्वे कराया जा रहा है। जल्द ही सहायता राशि मुहैया कराई जाएगी।

फोटो 08 एमएएचपी 12 परिचय-कच्चा मकान गिरने से खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर बेवा रानी। संवाद