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अनाथों की नाथ बनीं अमेरिकी नानी
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लिंडा स्टेंटन।
- फोटो : MAHOBA
कुलपहाड़ (महोबा)। दशकों पहले अमेरिका से भारत आईं दो महिलाओं ने कुलपहाड़ के किड्स होम अपना जीवन समर्पित कर किया। वह सेवाभाव से यहां पर अनाथ बच्चों की नाथ बनीं हुईं हैं। बच्चों की परवरिश से लेकर शादी ब्याह तक की जिम्मेदारी निभा रहीं हैं। लोग उन्हें अमेरिकी नानी के नाम से जानते हैं।
कुलपहाड़ किड्स होम 70 साल पहले स्थापित किया गया था। जिसमें ऐसे बच्चों को लिया गया जिनके माता पिता की मृत्यु हो गई या बच्चे अनाथ हो गए ऐसे बच्चों की देखभाल के लिए 40 वर्ष पहले अमेरिका की एरीजोना प्रांत की रहने वाली लिंडा स्टैंटन ने सेवा करने का व्रत लिया और फिर हमेशा के लिए भारत की होकर रह गई।
इस समय वह 80 वर्ष की है लेकिन आज भी किड्स होम में रहने वाले अनाथ बच्चों की मां की तरह है। इसी तरह की सेवा करने का व्रत अमेरिका के इंडियाना राज्य की निवासी शेरन कनिंघम ने लिया और वह 32 वर्ष पूर्व अमेरिका से भारत आ गई और इसके बाद दोनों यही की हो गईं। दोनों ने अभी तक लगभग 330 बच्चों को पालने पढ़ाने और उनकी शादी करने तक का फर्ज निभाया। यह बच्चे पंजाब, दिल्ली, उत्तराखंड, लखनऊ, कानपुर, आगरा सहित भारत के विभिन्न स्थानों में चिकित्सा क्षेत्र में सक्रिय है और इन सभी के लिए यह दोनों नानी है।
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कुलपहाड़ किड्स होम 70 साल पहले स्थापित किया गया था। जिसमें ऐसे बच्चों को लिया गया जिनके माता पिता की मृत्यु हो गई या बच्चे अनाथ हो गए ऐसे बच्चों की देखभाल के लिए 40 वर्ष पहले अमेरिका की एरीजोना प्रांत की रहने वाली लिंडा स्टैंटन ने सेवा करने का व्रत लिया और फिर हमेशा के लिए भारत की होकर रह गई।
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इस समय वह 80 वर्ष की है लेकिन आज भी किड्स होम में रहने वाले अनाथ बच्चों की मां की तरह है। इसी तरह की सेवा करने का व्रत अमेरिका के इंडियाना राज्य की निवासी शेरन कनिंघम ने लिया और वह 32 वर्ष पूर्व अमेरिका से भारत आ गई और इसके बाद दोनों यही की हो गईं। दोनों ने अभी तक लगभग 330 बच्चों को पालने पढ़ाने और उनकी शादी करने तक का फर्ज निभाया। यह बच्चे पंजाब, दिल्ली, उत्तराखंड, लखनऊ, कानपुर, आगरा सहित भारत के विभिन्न स्थानों में चिकित्सा क्षेत्र में सक्रिय है और इन सभी के लिए यह दोनों नानी है।

शेरन कनिंघम।- फोटो : MAHOBA
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