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सभी को अन्न खिलाने वाला अन्नदाता, दूसरों के घरों में कर रहा मजदूरी

Kanpur Bureau Updated Mon, 10 Sep 2018 07:44 PM IST
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अन्न खिलाने वाला अन्नदाता, दूसरों के घरों में कर रहा मजदूरी
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सुबह होते ही आल्हा चौक में मजदूरी के लिए डाल लेते हैं डेरा
फोटो 09 एमएएचपी 04 परिचय-मजदूरी मिलने का इंतजार करते किसान
अमर उजाला ब्यूरो
महोबा। दो साल से सूखा पड़ने से परेशान किसान अब रोजी-रोटी के लिए दूसरों के घरों में मजदूरी कर रहा है। वहीं तमाम किसान बच्चों के भरण-पोषण के लिए महानगरों की तरफ पलायन कर रहे हैैं। रही सही कसर अन्ना पशुओं ने पूरी कर दी है। जिससे दो साल से 50 फीसदी से ज्यादा भूमि परती पड़ी हुई है।
जिले में 2.26 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में रबी की फसल की बुआई की जाती है। दो साल से सूखे के चलते किसान 50 फीसदी से कम भूमि में फसल की पैैदावार कर रहा है। कृषि पर पूरी तरह से आश्रित किसान पानी के अभाव में पूरी जमीन पर जुताई बुआई नहीं कर पा रहा है। इससे उनका परिवार आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। परिवार को चलाने के लिए अब दूसरों को अन्न खिलाने वाले अन्नदाता दूसरों के घरों में मजदूरी कर रहे हैं।
हालात यह है कि आल्हा चौक में रोजी-रोटी की तलाश में सैकड़ों मजदूर सुबह से डेरा जमा लेते हैं लेकिन आधे से ज्यादा ग्रामीणों को मजदूरी न मिलने के कारण बैरंग लौटना पड़ता है। इतना ही नहीं कुछ किसान दिन में 12 बजे तक मजदूरी की आस में बैठे रहते हैं कि शायद आधा दिन के लिए ही मजदूरी मिल जाए। पुरूषों के अलावा महिलाएं भी लोक-लज्जा छोड़कर मजदूरी के लिए आल्हा चौक में पहुंच जाती है पहले किसान दूसरों को अपने खेतों में कटाई, निंदाई और मड़ाई के लिए मजदूरी के लिए लगाता है और आज वह दूसरों के घरों में मजदूरी करने को मजबूर हैं।
इंसेट
अन्ना पशु बने मुसीबत
किसानों के लिए अन्ना पशुओं ने मुश्किलें बढ़ा दी है। किसान जैसे-तैसे खेतों में बुआई कर भी देता है तो उसे अन्ना पशुओं से फसल बचाना मुश्किल हो रहा है। स्थिति यह है कि किसान रात दिन जागकर फसल की रखवाली करते हैं और थोड़ी सी चूक होने पर अन्ना जानवर चंद घंटों में ही फसलों को चट कर देते हैं। जिससे अब किसान मजदूरी के लिए विवश हो गया है।
इंसेट
किसानों को नहीं मिल रही मजदूरी
खेती-बाड़ी को छोड़कर मजदूरी के लिए निकले किसानों को हर रोज मजदूरी भी नहीं मिल रही है। कारण- बालू, सीमेंट और सरिया महंगा होने से किसानों को मजदूरी तक नहीं मिल रही है। यहीं वजह है कि प्रतिदिन 300 रूपये मिलने वाली मजदूरी के स्थान पर अब किसान 250 रुपये में भी मजदूरी कर रहे हैं। महंगाई के चलते लोग घरों का निर्माण भी नहीं करा रहे हैं।

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