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इस बार नेपाल नहीं जा सकेंगे लोग

Sun, 20 Dec 2020 11:51 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 20 Dec 2020 11:51 PM IST
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This time people will not be able to go to Nepal
इस बार नेपाल नहीं जा सकेंगे लोग
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नए साल का जश्न मनाने के इच्छुक लोग बदल रहे योजना
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। कोरोना संक्रमण के कारण भारत-नेपाल सीमा सील है। जिसके चलते इस बार नए साल का जश्न मनाने नेपाल नहीं जा पाएंगे। इस बार शहर के लोग कुल्लू मनाली में नए साल का स्वागत करेंगे। ज्यादातर लोग कुल्लू, मनाली जाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके अलावा कोई केदारनाथ की यात्रा करेगा तो कोई उज्जैन महाकाल के दर्शन कर नए साल की खुशियां मनाने की तैयारी में है। कोरोना की वजह से इस बार लोग स्वयं के वाहन से आना जाना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
इस बार भारत-नेपाल की सीमा सील है। लोगों को उम्मीद थी कि नए साल में सीमा खुल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। नए साल की खुशियां मनाने के लिए लोगों ने व्यवस्था करनी शुरू कर दी है। सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों की पहली पसंद नेपाल हुआ करता था, लेकिन इस बार सीमा सील होने के कारण कुल्लू मनाली का रुख ज्यादातर लोग करेंगे। ऐसे में नेपाल पर्यटन को इस बार झटका लगा है।
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सोनौली कस्बे के रहने वाले नीरज कहते हैं कि कोरोना की वजह से बहुत कुछ बदल गया है। इस बार नए साल पर उज्जैन महाकाल के दर्शन के लिए जाना है। पूजा कर कोरोना से मुक्ति की कामना की जाएगी। अगर नेपाल की सीमा खुली रहती तो वहां जाने का मौका मिलता, लेकिन पता नहीं नेपाल सीमा कब खुलेगी।
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सौनौली के हरिश्चंद्र जायसवाल ने बताया कि परिवार के साथ उज्जैन जाने की योजना है। इस बार नए साल पर परिवार के सदस्यों के साथ महाकाल की पूजा कर सुख समृद्धि की कामना की जाएगी। वैसे भी कोरोना की वहज से कहीं आने जाने में ज्यादा सतर्कता बरतनी पड़ रही है।
कस्टम हाउस एजेंट विनायक चंद तिवारी ने कहा कि ऐसा पहली बार हो रहा है कि नए साल पर नेपाल जाने के लिए नहीं मिलेगा। हालात ऐसे हैं कि नेपाल सीमा कब खुलेगी, कोई जानकारी नहीं है। इस बार तो बाबा केदारनाथ के दर्शन करने जाना है। उत्तराखंड के पर्यटन स्थलों के भ्रमण करने की योजना है।
नौतनवां कस्बे के पवन कुमार ने बताया कि नया साल इस कुल्लू मनाली में मनाया जाएगा। दोस्तों के साथ इस बार वहीं जाने की व्यवस्था बना रहा हूं। सीमा खुली रहती तो काठमांडू जाने को मिलता, लेकिन इस बार कोरोना से बहुत कुछ बदल गया है।
घटती-बढ़ती रही पर्यटकों की संख्या
भारत-नेपाल मैत्री समाज एवं पर्यटन अध्यक्ष श्रीचंद गुप्ता ने बताया कि पर्यटकों की संख्या वर्ष 2018 के दौरान 37.2 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 5,26,705 हो गई थी। वर्ष 2019 में पर्यटकों की संख्या 5 प्रतिशत की गिरावट के साथ कुल 5 लाख 277 रही। वर्ष 2019 में पर्यटकों के ठहरने की औसत अवधि 11.96 दिन थी, जो घट कर कैलेंडर वर्ष 2019 में 11.78 दिन रह गई। वर्ष 2020 में पर्यटकों की संख्या में 40 प्रतिशत की वृद्धि के साथ जनवरी फरवरी के शुरुआती समय मे पर्यटकों के आगमन में तेजी आई, लेकिन कोरोना महामारी से सब चौपट हो गया।

कोरोना की भेंट चढ़ा पर्यटन कारोबार
सोटो नेपाल ट्रेवल्स रूपनदेही के अध्यक्ष संजय बजमया ने बताया कि होटल का कारोबार ठप है। इन दिनों होटल व्यवसाय से जुड़े हजारों लोग बेरोजगार हो गए हैं। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष चन्द्र प्रकाश श्रेष्ठ ने बताया कि इस बार पर्यटन उद्योग कोरोना की भेंट चढ़ गया। रूपनदेही जिले में 210 होटल एंड लाज के साथ 100 से अधिक रेस्टोरेंट हैं। भैरहवा, पोखरा और काठमांडू का होटल पूरी तरह भारतीय पर्यटकों पर निर्भर है, लेकिन इस बार तो कारोबार चौपट हो गया। थाई बुद्ध विहार सोनौली के प्रबंधक राजेश शुक्ला ने बताया कि नेपाल के लिए बुकिंग बंद है। बनारस और बौद्ध गया से सीधे नेपाल लुम्बिनी की बुकिंग शून्य है। पिछले साल दिसंबर माह में प्रतिदिन 30 से 40 बस विदेशी पर्यटक नेपाल जाते थे।
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