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Maharajganj News: समितियों पर खाद की किल्लत...तस्कर कर रहे सरहद पार
Sat, 21 Dec 2024 01:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sat, 21 Dec 2024 01:02 AM IST
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महराजगंज। पहले बुआई के लिए किसान गेहूं के बीज और डीएपी के लिए परेशान थे। अब यूरिया के लिए भटक रहे हैं। वहीं तस्कर यूरिया नेपाल पहुंचा कर मालामाल हो रहे हैं। सीमावर्ती क्षेत्र में ज्यादातर समितियों पर यूरिया नहीं मिल रही है, जबकि विभाग सभी समितियों पर खाद उपलब्ध होने का दावा कर रहा है।
जानकारी के अनुसार, गेहूं की फसल में यूरिया डालने के लिए किसान परेशान हैं। वह समितियों का चक्कर काट रहे हैं। बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण समिति लि. बी पैक्स जारा सेमरातर जगरनाथपुर के परशुरामपुर में स्थित है, जहां किसानों को खाद लेने में परेशानी हो रही है। कारण यह है कि खाद रहने पर किसानों की भीड़ लग जाती है।
किसानों ने बताया कि तस्कर खाद लेकर सुरक्षित स्थानों एकत्र करते हैं। मौका मिलने के बाद इसे सरहद पार कर देते हैं। जब कभी सख्ती की जाती है तो कुछ दिन मामला ठंडा रहता है। खेत की सिंचाई होने के बाद यूरिया की जरूरत किसानों को है, लेकिन यहां उनको परेशान होना पड़ा रहा है।
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दूसरी ओर तस्कर आसानी से यूरिया लेकर सरहद पार हो रहे हैं। सूत्रों की माने तो साइकिल व बाइक पर दो तीन बोरी यूरिया लेकर सरहद क्षेत्र में जाने वाले कैरियर मौके की तलाश में रहते हैं, जहां सुरक्षा कर्मी नहीं होते हैं उसी पगडंडी से चले जाते हैं।
खास बात यह है कि एक रूट का उपयोग एक बार ही करते हैं। ऐसे में वे जल्दी पकड़ में भी नहीं आते हैं। भारतीय क्षेत्र में यूरिया का सरकारी मूल्य प्रति बोरी 266.50 रुपये है। इसे नेपाल में लेकर ग्राहक की जरूरत के अनुसार 400 रुपये लेकर लेकर 500 रुपये तक बेचा जा रहा है।
ह
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जानकारी के अनुसार, गेहूं की फसल में यूरिया डालने के लिए किसान परेशान हैं। वह समितियों का चक्कर काट रहे हैं। बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण समिति लि. बी पैक्स जारा सेमरातर जगरनाथपुर के परशुरामपुर में स्थित है, जहां किसानों को खाद लेने में परेशानी हो रही है। कारण यह है कि खाद रहने पर किसानों की भीड़ लग जाती है।
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किसानों ने बताया कि तस्कर खाद लेकर सुरक्षित स्थानों एकत्र करते हैं। मौका मिलने के बाद इसे सरहद पार कर देते हैं। जब कभी सख्ती की जाती है तो कुछ दिन मामला ठंडा रहता है। खेत की सिंचाई होने के बाद यूरिया की जरूरत किसानों को है, लेकिन यहां उनको परेशान होना पड़ा रहा है।
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दूसरी ओर तस्कर आसानी से यूरिया लेकर सरहद पार हो रहे हैं। सूत्रों की माने तो साइकिल व बाइक पर दो तीन बोरी यूरिया लेकर सरहद क्षेत्र में जाने वाले कैरियर मौके की तलाश में रहते हैं, जहां सुरक्षा कर्मी नहीं होते हैं उसी पगडंडी से चले जाते हैं।
खास बात यह है कि एक रूट का उपयोग एक बार ही करते हैं। ऐसे में वे जल्दी पकड़ में भी नहीं आते हैं। भारतीय क्षेत्र में यूरिया का सरकारी मूल्य प्रति बोरी 266.50 रुपये है। इसे नेपाल में लेकर ग्राहक की जरूरत के अनुसार 400 रुपये लेकर लेकर 500 रुपये तक बेचा जा रहा है।
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