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Maharajganj News: कोहरे के साए में काल बनकर आई पिकअप ने बुझा दिया घर का चिराग
Wed, 24 Jan 2024 09:09 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Wed, 24 Jan 2024 09:09 PM IST
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नौतनवा। गोरखपुर-सोनौली राष्ट्रीय राजमार्ग के ग्राम मुड़िला में बुधवार की सुबह करीब आठ बजे कोहरे के कारण हुए हादसे ने डाॅक्टर परिवार के घर का दूसरा चिराग बुझा दिया। वहीं उनका पहला पुत्र अंश अभी भी अस्पताल में ही जिंदगी की जंग लड़ रहा है।
घटना की दास्तान पर नजर डालें तो हर दिन की तरह बुधवार की शुरुआत भी सामान्य ही हुई लेकिन अचानक जब सूनसान सड़क पर चीख-पुकार मची तो लोग सहम गए। राहत-बचाव के लिए पहुंचे चश्मदीदों की नजर जब जिंदगी और मौत के बीच जूझते एक चार माह के दुधमुहे बच्चे पर पड़ी तो सभी की रूह कांप उठीं। वहीं आंखों के सामने बच्चे की सांसों को थमता देख माता और पिता भी अपनी चोट का दर्द भूल गए। लोगों ने मानवता का परिचय देते हुए तत्काल न सिर्फ एंबुलेंस बुला उन्हें अस्पताल पहुंचाया बल्कि ईश्वर से परिवार के रक्षा और सुरक्षा की प्रार्थना भी करते रहे, लेकिन होनी को तो कुछ और ही मंजूर था, जो पिता परिवार के साथ खुशी के कुछ पल बिताने की इच्छा लिए घर से निकले थे उन्हें क्या पता था कि आज रास्ते में कोहरे के रूप में काला साया उनके परिवार का इंतजार कर रहा है, जिसका सामना उन्हें अपने घर की एक चिराग को बुझाकर करना पड़ेगा।
कहा गया है कि कुदरत के आगे किसी की नहीं चलती। परिवार बातचीत करते हुए घर से कुछ दूर आगे बढ़ा ही था कि नौतनवा क्षेत्र के मुड़िला में कोहरे की धुंध के बीच काल बनकर आया पिकअप परिवार की दुनिया ही तबाह कर गया। चिकित्सकों के लाख प्रयासों के बावजूद नन्ही सी जान को नहीं बचाया जा सका। कुछ देर मौत से दो-दो हाथ करने के बाद चार माह के वेदांश का हिम्मत जवाब दे गया और उसने अपनी सांसे रोक ली। पुत्र की मौत की सूचना मिलते ही माता पिंकी और पिता नागेंद्र पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। वह कोहरे में घर से निकलने के फैसले पर खुद को कोसते हुए अपना माथा पीट-पीटकर रोने लगे। उनकी बातें सुन वहां मौजूद सभी की आंखें आंसुओं से भर आईं।
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घटना की दास्तान पर नजर डालें तो हर दिन की तरह बुधवार की शुरुआत भी सामान्य ही हुई लेकिन अचानक जब सूनसान सड़क पर चीख-पुकार मची तो लोग सहम गए। राहत-बचाव के लिए पहुंचे चश्मदीदों की नजर जब जिंदगी और मौत के बीच जूझते एक चार माह के दुधमुहे बच्चे पर पड़ी तो सभी की रूह कांप उठीं। वहीं आंखों के सामने बच्चे की सांसों को थमता देख माता और पिता भी अपनी चोट का दर्द भूल गए। लोगों ने मानवता का परिचय देते हुए तत्काल न सिर्फ एंबुलेंस बुला उन्हें अस्पताल पहुंचाया बल्कि ईश्वर से परिवार के रक्षा और सुरक्षा की प्रार्थना भी करते रहे, लेकिन होनी को तो कुछ और ही मंजूर था, जो पिता परिवार के साथ खुशी के कुछ पल बिताने की इच्छा लिए घर से निकले थे उन्हें क्या पता था कि आज रास्ते में कोहरे के रूप में काला साया उनके परिवार का इंतजार कर रहा है, जिसका सामना उन्हें अपने घर की एक चिराग को बुझाकर करना पड़ेगा।
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कहा गया है कि कुदरत के आगे किसी की नहीं चलती। परिवार बातचीत करते हुए घर से कुछ दूर आगे बढ़ा ही था कि नौतनवा क्षेत्र के मुड़िला में कोहरे की धुंध के बीच काल बनकर आया पिकअप परिवार की दुनिया ही तबाह कर गया। चिकित्सकों के लाख प्रयासों के बावजूद नन्ही सी जान को नहीं बचाया जा सका। कुछ देर मौत से दो-दो हाथ करने के बाद चार माह के वेदांश का हिम्मत जवाब दे गया और उसने अपनी सांसे रोक ली। पुत्र की मौत की सूचना मिलते ही माता पिंकी और पिता नागेंद्र पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। वह कोहरे में घर से निकलने के फैसले पर खुद को कोसते हुए अपना माथा पीट-पीटकर रोने लगे। उनकी बातें सुन वहां मौजूद सभी की आंखें आंसुओं से भर आईं।
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