{"_id":"67aa5087c78d25b8bf02b15e","slug":"smuggling-of-toothpaste-from-nepalmoney-for-businessmen-maharajganj-news-c-206-1-sgkp1021-142392-2025-02-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Maharajganj News: नेपाल से टूथपेस्ट की तस्करी...धंधेबाजों की चांदी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Maharajganj News: नेपाल से टूथपेस्ट की तस्करी...धंधेबाजों की चांदी
Tue, 11 Feb 2025 12:46 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Tue, 11 Feb 2025 12:46 AM IST
विज्ञापन
महराजगंज। कॉस्मेटिक ही नहीं टूथपेस्ट भी नेपाल से भारतीय क्षेत्र में आ रहा है। इससे धंधेबाजों की चांदी है। सीमा शुल्क के अलावा रेट में भी अंतर होता है। इस वजह से तस्कर उसे झोले में रखकर सरहद पार कर लेते हैं। बीते दिनों 2304 नेपाली टूथपेस्ट की बरामदगी हुई थी।
सूत्रों की माने तो इनमें कुछ काॅस्मेटिक सामान तो नकली हैं। इनपर मेड इन चाइना भी लिखा होता है, लेकिन अधिकांश सामान असली और नेपाली ब्रांडेड के हैं। इस पर लगातार कार्रवाई भी हो रही है। बावजूद इसके इसपर अंकुश लगने के बजाए तस्करी का धंधा बढ़ता जा रहा है। वजह यह है कि जिस टूथपेस्ट की कीमत नेपाल में 50 रुपये है, भारत में उसकी कीमत करीब 90 रुपये है। यही सामान होलसेल में लेने में 50 से घटकर करीब 45 रुपये हो जाती है, जबकि भारतीय बाजार के होलसेल मार्केट में भी इस टूथपेस्ट की कीमत करीब 80 रुपये है।
सीमावर्ती गांव और नगर इन दिनों तस्करी के सामान का हब बन चुका है। नेपाल से सोनौली के रास्ते करोड़ों रुपये के काॅस्मेटिक प्रॉडक्ट तस्करी कर गोरखपुर, कानपुर सहित देश के अन्य इलाकों में खपाए जा रहे हैं। इन प्रॉडक्ट में टूथपेस्ट से लेकर शैंपू, साबुन, मसाला, पाउडर, सौंदर्य प्रसाधन के तमाम ब्रांड की क्रीम आदि शामिल हैं।
विज्ञापन
हैरानी वाली बात तो यह है कि उक्त सामान में नकली से लेकर असली भी शामिल हैं, लेकिन फर्क सिर्फ इतना है कि इन सामान को नेपाल के रेट पर खरीदकर यहां इंडियन दामों में बेचा जा रहा है। रोजाना तस्करी के इस कारोबार से यहां के व्यापारी जहां मालामाल हो रहे हैं, वहीं ब्रांडेड कंपनियों से लेकर सरकार को रोजाना लाखों के राजस्व का नुकसान पहुंच रहा है। नेपाली रेट पर खरीदकर इंडियन दामों पर बेचकर तस्कर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। एक जैसे सामान पर एक ही कंपनी के मेड इन नेपाल होने से ग्राहक इसे समझ नहीं पाते और बाजार में आसानी से खप जा रहा है।
प्रसिद्ध विदेशी कंपनियों ने नेपाल में भी फैक्ट्री लगाया है। नेपाल में सामान नेपाली मुद्रा में मिलते हैं। ठीक वही समान भारत में भारतीय मुद्रा में बिकते हैं। इसके बीच के अंतर को तस्करों द्वारा बड़े ही आसानी से भुनाया जा रहा है। नेपाली करेंसी में सामान खरीदकर भारत में भारतीय मुद्रा में बेचते हैं। नेपाल का 100 मुद्रा भारत का 62 रुपये होता है। इसमें आसानी से एक पीस पर 30 से 40 रुपये का मुनाफा मिल जाता है।
फुटकर बाजारों में नेपाल से तस्करी कर लाए गए सामान आसानी से खप जाते हैं। इसकी पहचान आसान नहीं होती है। एक ही कंपनी भारत व नेपाल दोनों जगहों के लिए सामान तैयार करती है। पगडंडियों से इस सामान को सोनौली, कोल्हुई बाजार, ठूठीबारी, झुलनीपुर आदि क्षेत्र में स्टॉक करते हैं। इसके बाद यहां से सीमावर्ती गांव, कस्बे और गोरखपुर में सप्लाई देते हैं। अपर पुलिस अधीक्षक आतिश कुमार सिंह ने कहा है कि बीते दिन बरामदगी हुई थी। सीमावर्ती क्षेत्र में कड़ी निगरानी की जा रही है।
विज्ञापन
सूत्रों की माने तो इनमें कुछ काॅस्मेटिक सामान तो नकली हैं। इनपर मेड इन चाइना भी लिखा होता है, लेकिन अधिकांश सामान असली और नेपाली ब्रांडेड के हैं। इस पर लगातार कार्रवाई भी हो रही है। बावजूद इसके इसपर अंकुश लगने के बजाए तस्करी का धंधा बढ़ता जा रहा है। वजह यह है कि जिस टूथपेस्ट की कीमत नेपाल में 50 रुपये है, भारत में उसकी कीमत करीब 90 रुपये है। यही सामान होलसेल में लेने में 50 से घटकर करीब 45 रुपये हो जाती है, जबकि भारतीय बाजार के होलसेल मार्केट में भी इस टूथपेस्ट की कीमत करीब 80 रुपये है।
विज्ञापन
सीमावर्ती गांव और नगर इन दिनों तस्करी के सामान का हब बन चुका है। नेपाल से सोनौली के रास्ते करोड़ों रुपये के काॅस्मेटिक प्रॉडक्ट तस्करी कर गोरखपुर, कानपुर सहित देश के अन्य इलाकों में खपाए जा रहे हैं। इन प्रॉडक्ट में टूथपेस्ट से लेकर शैंपू, साबुन, मसाला, पाउडर, सौंदर्य प्रसाधन के तमाम ब्रांड की क्रीम आदि शामिल हैं।
विज्ञापन
हैरानी वाली बात तो यह है कि उक्त सामान में नकली से लेकर असली भी शामिल हैं, लेकिन फर्क सिर्फ इतना है कि इन सामान को नेपाल के रेट पर खरीदकर यहां इंडियन दामों में बेचा जा रहा है। रोजाना तस्करी के इस कारोबार से यहां के व्यापारी जहां मालामाल हो रहे हैं, वहीं ब्रांडेड कंपनियों से लेकर सरकार को रोजाना लाखों के राजस्व का नुकसान पहुंच रहा है। नेपाली रेट पर खरीदकर इंडियन दामों पर बेचकर तस्कर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। एक जैसे सामान पर एक ही कंपनी के मेड इन नेपाल होने से ग्राहक इसे समझ नहीं पाते और बाजार में आसानी से खप जा रहा है।
प्रसिद्ध विदेशी कंपनियों ने नेपाल में भी फैक्ट्री लगाया है। नेपाल में सामान नेपाली मुद्रा में मिलते हैं। ठीक वही समान भारत में भारतीय मुद्रा में बिकते हैं। इसके बीच के अंतर को तस्करों द्वारा बड़े ही आसानी से भुनाया जा रहा है। नेपाली करेंसी में सामान खरीदकर भारत में भारतीय मुद्रा में बेचते हैं। नेपाल का 100 मुद्रा भारत का 62 रुपये होता है। इसमें आसानी से एक पीस पर 30 से 40 रुपये का मुनाफा मिल जाता है।
फुटकर बाजारों में नेपाल से तस्करी कर लाए गए सामान आसानी से खप जाते हैं। इसकी पहचान आसान नहीं होती है। एक ही कंपनी भारत व नेपाल दोनों जगहों के लिए सामान तैयार करती है। पगडंडियों से इस सामान को सोनौली, कोल्हुई बाजार, ठूठीबारी, झुलनीपुर आदि क्षेत्र में स्टॉक करते हैं। इसके बाद यहां से सीमावर्ती गांव, कस्बे और गोरखपुर में सप्लाई देते हैं। अपर पुलिस अधीक्षक आतिश कुमार सिंह ने कहा है कि बीते दिन बरामदगी हुई थी। सीमावर्ती क्षेत्र में कड़ी निगरानी की जा रही है।