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होर्डिंग लगाकर पराली न जलाने के लिए किया जा रहा जागरूक

Sat, 27 Nov 2021 12:18 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 27 Nov 2021 12:18 AM IST
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Parali not fired in Feild - awarness to people
होर्डिंग लगाकर पराली न जलाने के लिए किया जा रहा जागरूक
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नौतनवां (महराजगंज)। खेतों में पराली जलाने से प्रदूषित हो रहे वातावरण और फसल पैदावार पर पड़ रहे दुष्प्रभाव को देखते हुए कृषि विभाग ने गहरी चिंता व्यक्त की है।
विभाग की ओर से तहसील परिसर में होर्डिंग लगाकर बाकायदा किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान और न जलाने से होने वाले लाभ के प्रति विस्तृत रूप से जानकारी देते हुए उन्हें जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही होर्डिंग के माध्यम से पराली के सदुपयोग तथा स्वयं के उपयोग में न आने पर निकटस्थ निराश्रित गोशाला में पराली दान कर दानी बनने का भी सुझाव सुझाया गया है।
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एसडीएम राम सजीवन मौर्य ने बताया कि पराली जलाना एक अपराध की श्रेणी में आता है। इसके अलावा सबसे गौर करने वाली बात यह है कि पराली जलाने से खेत की उर्वरा शक्ति खत्म होती है। जिसके बाद किसानों को जहां पैदावार में कमी का सामना करना पड़ता है तो वहीं अवशेष जलाने से पर्यावरण भी काफी प्रदूषित होता है। उन्होंने कहा कि किसानों को स्वयं जागरूक होते हुए पराली न जलाकर कृषि विभाग की ओर से जारी किए गए दिशा निर्देश का पालन कर उसका सदुपयोग करना चाहिए।
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पराली न जलाने के फायदे
पराली न जलाने से खेत की जलधारण क्षमता और खेत में जीवांश की मात्रा बढ़ती है। खेत उपजाऊ बनता है और फसलों की उपज भी अधिक होती है। और सबसे अहम बात पराली न जलाकर खुद को अपराध करने से बचाया और पर्यावरण को प्रदूषित करने से भी सुरक्षित रखा जा सकता है जो समाजहित में सबसे सराहनीय कदम है।
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पराली जलाने से होने वाले नुकसान
फसल कटाई के बाद फसल अवशेष (पराली) जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है तो वहीं खेत में मौजूद केंचुए भी मर जाते है। लाभदायक जीवाणुओं की क्रियाशीलता कम हो जाती है और खेत धीरे-धीरे कर अपनी उर्वरा शक्ति खो देती है। जिससे फसलों की पैदावार में कमी आने लगती है।

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पराली का ऐसे करें सदुपयोग
फसल अवशेष (पराली) को बेकार समझ कर जलाने से बचने वाले किसान उससे अपनी आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर सकते हैं। कृषि विभाग के मुताबिक पराली न जलाकर किसान फसल अवशेष को जुताई करके इन-सीटू प्रबंधन के यंत्रों से छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर जुताई करके मिट्टी में मिलाएं और यूरिया डालकर सिंचाई कर सकते हैं। इसके अलावा फसल अवशेष को कंपोस्ट या वर्मी कंपोस्ट भी बना सकते हैं।
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