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Maharajganj News: अब जेल में बंदी करेंगे अध्ययन, बढ़ाएंगे ज्ञान
Mon, 25 Nov 2024 05:33 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Mon, 25 Nov 2024 05:33 AM IST
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महराजगंज। जिला कारागार के बंदी जेल में रहकर भी अपने ज्ञान का दायरा बढ़ा सकेंगे। अध्ययन में रुचि रखने वाले कैदियों को अब जेल में दैनिक समाचार पत्र, पत्रिकाएं ही नहीं साहित्य, इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम और ख्यातिलब्ध लेखकों की किताबें भी मिल सकेंगी। इसके लिए लाइब्रेरी की स्थापना की जा रही है।
शासन की ओर से इसके लिए 15 लाख रुपए अवमुक्त किए गए हैं। दिसंबर के अंत तक इसे पूर्ण कराने में जेल प्रशासन जुटा हुआ है।महराजगंज जिला कारागार के भीतर बंदियों को अब अपने ज्ञान का दायरा बढ़ाने का भरपूर मौका मिलेगा।
जेल में स्थापित की जा रही लाइब्रेरी में न सिर्फ वह बैठकर पसंद की किताबों को पढ़ पाएंगे, बल्कि उसे जारी कराकर अपने बैरक में भी ले जाकर पढ़ सकेंगे। कारागार की लाइब्रेरी में नियमित समाचारपत्र व पत्रिका मंगवाने के प्रबंध के साथ विभिन्न विषयों से जुड़ी ऐतिहासिक, साहित्यिक, समसामयिक और पुराने लेखकों की किताबें भी उपलब्ध रहेंगी।
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मौजूदा समय में लाइब्रेरी के लिए 3000 पुस्तकों की खेप पहुंच चुकी है, जिसमें ऐतिहासिक व स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी किताबें और मुंशी प्रेमचंद, फणीश्वरनाथ रेणु, हजारी प्रसाद द्विवेदी, मंटो, रवींद्र कालिया की पुस्तकें हैं। दूसरी और तीसरी खेप में जेल प्रशासन की ओर से 10 हजार पुस्तकों का ऑर्डर दिया गया है, जिसमें हर प्रकार की ज्ञानवर्धक और सुधारवादी दृष्टिकोण की पुस्तकों का समावेश होगा।
कारागार के भीतर दो कमरों में लाइब्रेरी की व्यवस्था के लिए इंतजाम किए जा रहे हैं। एक कमरे में जहां किताबों को करीने से अल्फाबेट के अनुसार पुस्तकों को रखने की व्यवस्था रहेगी, वहीं दूसरे कमरे में कैदियों के बैठकर पढ़ने का इंतजाम रहेगा। कारागार की नई व्यवस्था से सिर्फ कैदियों को ही नहीं बल्कि कर्मियों को भी अपना ज्ञान बढ़ाने का मौका मिल सकेगा।
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शासन की ओर से इसके लिए 15 लाख रुपए अवमुक्त किए गए हैं। दिसंबर के अंत तक इसे पूर्ण कराने में जेल प्रशासन जुटा हुआ है।महराजगंज जिला कारागार के भीतर बंदियों को अब अपने ज्ञान का दायरा बढ़ाने का भरपूर मौका मिलेगा।
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जेल में स्थापित की जा रही लाइब्रेरी में न सिर्फ वह बैठकर पसंद की किताबों को पढ़ पाएंगे, बल्कि उसे जारी कराकर अपने बैरक में भी ले जाकर पढ़ सकेंगे। कारागार की लाइब्रेरी में नियमित समाचारपत्र व पत्रिका मंगवाने के प्रबंध के साथ विभिन्न विषयों से जुड़ी ऐतिहासिक, साहित्यिक, समसामयिक और पुराने लेखकों की किताबें भी उपलब्ध रहेंगी।
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मौजूदा समय में लाइब्रेरी के लिए 3000 पुस्तकों की खेप पहुंच चुकी है, जिसमें ऐतिहासिक व स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी किताबें और मुंशी प्रेमचंद, फणीश्वरनाथ रेणु, हजारी प्रसाद द्विवेदी, मंटो, रवींद्र कालिया की पुस्तकें हैं। दूसरी और तीसरी खेप में जेल प्रशासन की ओर से 10 हजार पुस्तकों का ऑर्डर दिया गया है, जिसमें हर प्रकार की ज्ञानवर्धक और सुधारवादी दृष्टिकोण की पुस्तकों का समावेश होगा।
कारागार के भीतर दो कमरों में लाइब्रेरी की व्यवस्था के लिए इंतजाम किए जा रहे हैं। एक कमरे में जहां किताबों को करीने से अल्फाबेट के अनुसार पुस्तकों को रखने की व्यवस्था रहेगी, वहीं दूसरे कमरे में कैदियों के बैठकर पढ़ने का इंतजाम रहेगा। कारागार की नई व्यवस्था से सिर्फ कैदियों को ही नहीं बल्कि कर्मियों को भी अपना ज्ञान बढ़ाने का मौका मिल सकेगा।