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दो नेपाली महिलाओं को सजा
अमर उजाला ब्यूरो /महराजगंज
Updated Wed, 23 Dec 2015 12:11 AM IST
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गैंगेस्टर एक्ट के मामले में कोर्ट ने दो नेपाली महिलाओं को चार-चार साल की सजा और अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड न देने पर दोनों को अलग से एक-एक महीने सजा भुगतनी होगी।
सोनौली के तत्कालीन इंस्पेक्टर महेश राम गौतम ने कई मामलों में संलिप्त पाए जाने पर निर्मला और कुमारी थापा निवासी बुटवल, नेपाल को 25 मई 2011 को उत्तर प्रदेश गिरोह बंद व समाज विरोधी क्रिया कलाप की धारा में चालान किया था।
मामले में सहायक अधिवक्ता फौजदारी अशोक कुमार त्रिपाठी ने बहस करते हुए समाज विरोधी अपराध के लिए सजा की मांग की। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश योगेंद्र राम गुप्त ने दोनों अभियुक्तों को चार-चार साल की सजा और पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया।
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हरिजन उत्पीड़न के 21 साल पुराने मामले में कोर्ट ने पिता व दो पुत्रों को तीन वर्ष की सजा और पांच-पांच हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड न देने पर एक-एक साल का अलग से कारावास भुगतना पड़ेगा।
सदर कोतवाली क्षेत्र के बरवां विद्यापति निवासी विजय ने चार अक्टूबर 1994 को मुकदमा दर्ज कराया था कि सुबह सात बजे राकेश उसके सहन का खूंटा ढीला कर रहा था। मना करने पर रामानंद व उसके पुत्र राकेश व हरेन्द्र जाति सूचक शब्दों का प्रयोग किया। विरोध करने पर पीटकर घायल कर दिया। सहायक शासकीय अधिवक्ता राही मासूम रजा ने तीन गवाहों को पेश किया और सजा की मांग की।
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सोनौली के तत्कालीन इंस्पेक्टर महेश राम गौतम ने कई मामलों में संलिप्त पाए जाने पर निर्मला और कुमारी थापा निवासी बुटवल, नेपाल को 25 मई 2011 को उत्तर प्रदेश गिरोह बंद व समाज विरोधी क्रिया कलाप की धारा में चालान किया था।
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मामले में सहायक अधिवक्ता फौजदारी अशोक कुमार त्रिपाठी ने बहस करते हुए समाज विरोधी अपराध के लिए सजा की मांग की। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश योगेंद्र राम गुप्त ने दोनों अभियुक्तों को चार-चार साल की सजा और पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया।
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हरिजन उत्पीड़न के 21 साल पुराने मामले में कोर्ट ने पिता व दो पुत्रों को तीन वर्ष की सजा और पांच-पांच हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड न देने पर एक-एक साल का अलग से कारावास भुगतना पड़ेगा।
सदर कोतवाली क्षेत्र के बरवां विद्यापति निवासी विजय ने चार अक्टूबर 1994 को मुकदमा दर्ज कराया था कि सुबह सात बजे राकेश उसके सहन का खूंटा ढीला कर रहा था। मना करने पर रामानंद व उसके पुत्र राकेश व हरेन्द्र जाति सूचक शब्दों का प्रयोग किया। विरोध करने पर पीटकर घायल कर दिया। सहायक शासकीय अधिवक्ता राही मासूम रजा ने तीन गवाहों को पेश किया और सजा की मांग की।