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Maharajganj News: नागपंचमी आज, शुरू होगा त्योहारों का दौर

Mon, 28 Jul 2025 09:00 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Mon, 28 Jul 2025 09:00 PM IST
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Nag Panchami today, the festive season will begin
महराजगंज। त्योहारों का दौर आज नागपंचमी से प्रारंभ हो रहा है। सावन की नागपंचमी तिथि के बाद रक्षाबंधन, कृष्ण जन्मोत्सव इत्यादि त्योहार पड़ेंगे। नागपंचमी पर जनपद के मंदिरों में गाय का दूध और धान का लावा चढ़ाने की परंपरा है।
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मंदिरों और गांव सीवान में ग्रामीण बड़ी संख्या में हिस्सा लेते हैं। शाम को जलाशयों के आसपास गुड़िया (नये कपड़ों से बनी पुतरी) पीटने की परंपरा भी निभाई जाएगी। इस दौरान बहने अपने भाइयों को चना और अमरूद क प्रसाद भी देंगी। ज्योतिषविद् पं. विंध्यवासिनी पांडेय ने बताया कि पंचमी तिथि 28 जुलाई रात्रि 11:30 बजे लग रही है, लेकिन सनातन में सूर्योदय के मायने हैं इसलिए यह 29 यानी आज मनाई जाएगी।
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नागपंचमी पर्व द्वापर की समाप्ति के लगभग महाराज जन्मेजय के नागयज्ञ से शुरू होने की बात पुराण बताते हैं। जन्मेजय के पिता महाराज परीक्षित को तक्षक के दंश से मृत्यु का श्राप मिला था। इसलिए मृत्यु तक्षक के दंश से हुई। जन्मेजय ने इसका बदला सभी नागों से लेने के लिए नागयज्ञ शुरू करा दिया। यज्ञ में नाग खिंचते चले आ रहे थे।
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इस यज्ञ से बड़ी अनहोनी की आशंका बनी, क्योंकि वासुकी जहां भगवान शिव के गले की शोभा बढ़ाता है वहीं शेषनाग श्री हरि को विश्राम देते हैं। परिस्थिति वश ऋषि आस्तिक से देवताओं ने सहायता लेकर नाग यज्ञ रुकवाने में सफलता पाई। सावन की पंचमी तिथि उस दिन थी जब आस्तिक मुनि के चलते नागों का विध्वंस रुक सका, जिसके उपलक्ष्य में पंचमी मनाते हैं।
सावन की सप्तमी को आस्तिक पूजा भी ग्रामीण करते हैं। कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए नाग पंचमी पर लावा दूध चढ़ाया जाता है। गाय के गोबर को अभिमंत्रित कर घरों की घेराबंदी भी पुरोहित करते हैं, जिससे घर में रहने वाले नागों से सुरक्षित रहें। तरह-तरह के पकवान बनाकर पहले घर के इष्ट को अर्पित किया जाता है।


कालसर्प दोष से मिलती है राहत
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक जिनकी कुंडली में कालसर्प दोष होता है उनके लिए नागपंचमी बहुत महत्वपूर्ण है। इस दिन रुद्राभिषेक के बाद अष्टधातु से बनी नाग प्रतिमा जल में प्रवाहित करने से इस दोष का समन हो जाता है।
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