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अस्पताल का पीआईसीयू वार्ड ओवरलोड, बुखार से तपकर मासूम ने तोड़ा दम

Tue, 28 Jun 2022 12:21 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 28 Jun 2022 12:21 AM IST
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Masoom died in Govenment hospital
जिला अस्पताल के पीआईसीयू मासूम ने तोड़ा दम
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महराजगंज। जिला अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। बेड से ज्यादा मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। ऐसे में व्यवस्था चरमरा गई है। दुश्वारियों के बीच मरीजों को सेहतमंद बनाने की कोशिश में चिकित्सक जुटे हैं। सोमवार को दोपहर बाद मरीजों से भरे पीआईसीयू वार्ड में एक मासूम की मौत हो गई। परिजनों ने चिकित्सकों समेत स्टाफ पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया।
जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल में प्रमुख वार्ड मरीजों से भरे हैं। सबसे खराब हालत नवजात शिशु देखभाल यूनिट की है, यहां 26 बेड पर 52 बच्चों का इलाज किया जा रहा है। पीआईसीयू/संक्रामक रोग वार्ड में 15 बेड पर 20 मासूमों का इलाज हो रहा है। रविवार शाम को मधवलिया गांव के आयुष्मान (8) को तेज बुखार एवं शरीर में अकड़न होने पर जिला अस्पताल ले जाया गया। यहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे पीआईसीयू वार्ड में भर्ती कर दिया। सोमवार दोपहर में उसकी मौत हो गई। परिजनों ने कहा कि क्षमता से कहीं ज्यादा बच्चों के भर्ती होने के कारण चिकित्सक सभी मरीजों का ढंग से इलाज नहीं कर पा रहे हैं। मृत मासूम के पिता नागेंद्र ने आरोप लगाया कि जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण बच्चे की मौत हो गई। उधर, अस्पताल में इन दिनों ओपीडी में भी भीड़ लग रही है। पर्ची काउंटर से लेकर जांच कराने तक दुश्वारियां झेलनी पड़ रहीं हैं। पैथालाजी एवं एक्सरे अल्ट्रासाउंड कराने में घंटो गुजर जा रहे हैं।
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जिला अस्पताल में प्रमुख वार्डों की स्थिति पर एक नजर
वार्ड का नाम कुल बेड की संख्या भरे हुए बेड रिक्त बेड
इमरजेंसी 16 07 09
सिनियर सिटिजन वार्ड 08 05 03
एसएनसीयू वार्ड 26 52 0
मेडिकल वार्ड 16 04 12
सर्जिकल वार्ड 33 21 12
पीआईसीयू एईएस 15 20 0
एनआरसी 10 03 07
महिला वार्ड 30 07 23
प्राइवेट वार्ड 04 04 0
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बच्चे की हालत ज्यादा खराब होने पर उसे जिला अस्पताल लाया गया था, उसे तेज बुखार था। चिकित्सकों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन उसकी मौत हो गई। चिकित्सक पूरी जिम्मेदारी के साथ इलाज में जुटे हैं, लापरवाही का आरोप बेबुनियाद है। अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों में बेहतर करने की कोशिश जा रही है।
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डॉ. एएम भाष्कर, सीएमएस
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