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Maharajganj News: बगैर पंजीकरण चल रहे कई पैथोलॉजी-अस्पताल
Wed, 09 Apr 2025 12:58 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Wed, 09 Apr 2025 12:58 AM IST
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परतावल में संचालित पैथालॉजी को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने किया सील।
महराजगंज। सख्ती के बाद भी जिले में बगैर पंजीकरण के अस्पताल और पैथोलॉजी संचालित हो रहे हैं। इनसे हर माह करोड़ों में धंधा हो रहा है।
जांच से लेकर इलाज कराने तक दलालों के मजबूत नेटवर्क में मरीज फंस जाते हैं। बीते दिन स्वास्थ्य विभाग ने बगैर पंजीकरण के अस्पताल और पैथोलॉजी सील किया था।
जानकारी के अनुसार, जिले में वर्तमान में 106 निजी नर्सिंग होम, 89 पैथोलॉजी लैब, 12 जनरल क्लिनिक, 23 डेंटल क्लिनिक, 22 एक्स-रे सेंटर और 54 अल्ट्रासाउंड सेंटर पंजीकृत हैं, लेकिन छोटे-बड़े चौराहों, गलियों और मोहल्लों में बिना किसी मानक के अस्पताल खुल गए हैं।
इनमें अधिकांश में न तो योग्य चिकित्सक हैं और न ही आवश्यक मेडिकल उपकरण या भवन संबंधी ढांचा मौजूद है। सूत्रों की माने तो बगैर पंजीकरण के अस्पतालों की पोल तभी खुलती है, जब शिकायत की जाती है। कार्रवाई के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।
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बीते साल भी तमाम कार्रवाई हुई, लेकिन इस पर प्रभावी अंकुश नहीं लग सका। छोटे-छोटे कस्बे चौराहों पर नामी डॉक्टरों का बोर्ड लगाकर लोगों को गुमराह किया जाता है। शहर में ही बीते दिन बगैर पंजीकरण के अस्पताल की ओटी सील हुई है। इसमें न तो डॉक्टर मिले न ही प्रशिक्षित स्टाफ। सूत्र बताते हैं कि छापा की सूचना पहले ही लग गई थी, इस वजह से कोई नहीं मिला।
यही हाल पैथोलॉजी का रहा। दो साल से शिकारपुर में संचालित हो रही पैथोलॉजी को लेकर जिम्मेदारों ने जांच करने की जहमत नहीं उठाई। सूत्रों की माने तो जिम्मेदारों की मेहरबानी से बगैर पंजीकरण वाले अस्पताल पैथोलॉजी संचालित हो रहे हैं। हर माह करोड़ों में यहां से धंधा हो रहा है।
अस्पताल में मरीज को भर्ती कराने से लेकर डिस्चार्ज कराने तक, अलग-अलग रेट तय है। दलाल कमीशन के लालच में मरीजों को बिना पंजीकरण वाले अस्पताल में भर्ती करा देते हैं। यहां लैब से खून जांच में भी खेल हो रहा है। सूत्रों की माने तो तमाम लैब ऐसे हैं, जहां ठीक ढंग की मशीन भी नहीं है। उसकी रिपोर्ट भी ठीक नहीं आती है।
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जांच से लेकर इलाज कराने तक दलालों के मजबूत नेटवर्क में मरीज फंस जाते हैं। बीते दिन स्वास्थ्य विभाग ने बगैर पंजीकरण के अस्पताल और पैथोलॉजी सील किया था।
जानकारी के अनुसार, जिले में वर्तमान में 106 निजी नर्सिंग होम, 89 पैथोलॉजी लैब, 12 जनरल क्लिनिक, 23 डेंटल क्लिनिक, 22 एक्स-रे सेंटर और 54 अल्ट्रासाउंड सेंटर पंजीकृत हैं, लेकिन छोटे-बड़े चौराहों, गलियों और मोहल्लों में बिना किसी मानक के अस्पताल खुल गए हैं।
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इनमें अधिकांश में न तो योग्य चिकित्सक हैं और न ही आवश्यक मेडिकल उपकरण या भवन संबंधी ढांचा मौजूद है। सूत्रों की माने तो बगैर पंजीकरण के अस्पतालों की पोल तभी खुलती है, जब शिकायत की जाती है। कार्रवाई के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।
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बीते साल भी तमाम कार्रवाई हुई, लेकिन इस पर प्रभावी अंकुश नहीं लग सका। छोटे-छोटे कस्बे चौराहों पर नामी डॉक्टरों का बोर्ड लगाकर लोगों को गुमराह किया जाता है। शहर में ही बीते दिन बगैर पंजीकरण के अस्पताल की ओटी सील हुई है। इसमें न तो डॉक्टर मिले न ही प्रशिक्षित स्टाफ। सूत्र बताते हैं कि छापा की सूचना पहले ही लग गई थी, इस वजह से कोई नहीं मिला।
यही हाल पैथोलॉजी का रहा। दो साल से शिकारपुर में संचालित हो रही पैथोलॉजी को लेकर जिम्मेदारों ने जांच करने की जहमत नहीं उठाई। सूत्रों की माने तो जिम्मेदारों की मेहरबानी से बगैर पंजीकरण वाले अस्पताल पैथोलॉजी संचालित हो रहे हैं। हर माह करोड़ों में यहां से धंधा हो रहा है।
अस्पताल में मरीज को भर्ती कराने से लेकर डिस्चार्ज कराने तक, अलग-अलग रेट तय है। दलाल कमीशन के लालच में मरीजों को बिना पंजीकरण वाले अस्पताल में भर्ती करा देते हैं। यहां लैब से खून जांच में भी खेल हो रहा है। सूत्रों की माने तो तमाम लैब ऐसे हैं, जहां ठीक ढंग की मशीन भी नहीं है। उसकी रिपोर्ट भी ठीक नहीं आती है।