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करोड़ों खर्च कर बने महिला अस्पताल में पेयजल व्यवस्था नदारद
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करोड़ों रुपये खर्च कर बने महिला अस्पताल में पीने के पानी की व्यवस्था ही नहीं है।
- फोटो : MAHARAJGANJ
करोड़ों खर्च कर बने महिला अस्पताल में पेयजल व्यवस्था नदारद
पानी खरीद कर प्यास बुझाते हैं कर्मचारी और इलाज के लिए आने वाली महिलाएं
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। महिलाओं के स्वास्थ्य की बेहतरी की दृष्टि से शासन ने महिला अस्पताल बनवाने में करोड़ों रुपया खर्च कर दिया, लेकिन यहां शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं की गई है। एक तरफ जिम्मेदार जलजनित रोगों से बचाव के लिए जागरूकता कार्यक्रम पर पैसा बहा रहे हैं वहीं दूसरी तरफ अस्पताल में इलाज के लिए आने वाली महिला मरीजों व कर्मियों को शुद्ध पेयजल तक नहीं मिल पा रहा है। महिलाओं व कर्मियों को यहां पानी खरीद कर अपनी प्यास बुझानी पड़ रही है।
महिला अस्पताल में प्रतिदिन इलाज के लिए 150-200 महिलाएं आती हैं। अस्पताल में तीन महिला डॉक्टरों के अलावा 12 लोग अपनी सेवा दे रहे हैं। सभी को पानी खरीद कर पीना पड़ता है। अस्पताल परिसर में पानी की व्यवस्था न होने से महिला मरीज हों अथवा तीमारदार सभी को मुश्किलें उठानी पड़ रही हैं। यही नहीं, कर्मियों तक के लिए पेयजल की व्यवस्था न होना, इसलिए गंभीर बात है क्योंकि एक तरफ जिम्मेदार शुद्ध जल के सेवन के लिए लोगों को प्रेरित कर रहे हैं वहीं सार्वजनिक जगह पर पीने के शुद्ध पानी का प्रबंध तक नहीं है।
शनिवार को चेहरी क्षेत्र से अपनी पत्नी का इलाज कराने आए मनोहर ने कहा कि जैसे तैसे कर स्वास्थ्य विभाग द्वारा महिला अस्पताल में मरीजों का इलाज तो शुरू कर दिया गया लेकिन यहां बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं। पीने के लिए पानी तक की व्यवस्था न होना गंभीर मामला है। सीएमएस डॉ आरबी राम ने कहा कि अस्पताल में इलाज के लिए आने वाली महिलाओं के लिए पेयजल की व्यवस्था की जाती है। अस्पताल के सभी तल पर वाटर कूलर लगा है, लेकिन अभी संचालित नहीं है। जल्द ही इसे सुचारु रूप से संचालित करने की व्यवस्था की जाएगी।
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जांच के लिए लगाना पड़ता है चक्कर
महिला अस्पताल में आने वाली गर्भवती महिलाओं को जांच कराने के लिए जगह-जगह चक्कर लगाना पड़ता है। अस्पताल में आकस्मिक सेवा भी नहीं शुरू की गई है। छोटी जांच हो अथवा बड़ी, महिला अस्पताल में किसी की भी सुविधा उपलब्ध नहीं है।
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गर्भवती महिलाओं को परेशानी अधिक
इलाज के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं को अस्पताल से नालियों को पार कर निकलना पड़ता है। नालियों पर ढक्कन न लगाए जाने से महिलाओं को परेशानी तो होती ही है, उन्हें गिरने का भी डर बना रहता है।जिम्मेदार समस्या के प्रति गंभीर नहीं हैं।
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पानी खरीद कर प्यास बुझाते हैं कर्मचारी और इलाज के लिए आने वाली महिलाएं
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। महिलाओं के स्वास्थ्य की बेहतरी की दृष्टि से शासन ने महिला अस्पताल बनवाने में करोड़ों रुपया खर्च कर दिया, लेकिन यहां शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं की गई है। एक तरफ जिम्मेदार जलजनित रोगों से बचाव के लिए जागरूकता कार्यक्रम पर पैसा बहा रहे हैं वहीं दूसरी तरफ अस्पताल में इलाज के लिए आने वाली महिला मरीजों व कर्मियों को शुद्ध पेयजल तक नहीं मिल पा रहा है। महिलाओं व कर्मियों को यहां पानी खरीद कर अपनी प्यास बुझानी पड़ रही है।
महिला अस्पताल में प्रतिदिन इलाज के लिए 150-200 महिलाएं आती हैं। अस्पताल में तीन महिला डॉक्टरों के अलावा 12 लोग अपनी सेवा दे रहे हैं। सभी को पानी खरीद कर पीना पड़ता है। अस्पताल परिसर में पानी की व्यवस्था न होने से महिला मरीज हों अथवा तीमारदार सभी को मुश्किलें उठानी पड़ रही हैं। यही नहीं, कर्मियों तक के लिए पेयजल की व्यवस्था न होना, इसलिए गंभीर बात है क्योंकि एक तरफ जिम्मेदार शुद्ध जल के सेवन के लिए लोगों को प्रेरित कर रहे हैं वहीं सार्वजनिक जगह पर पीने के शुद्ध पानी का प्रबंध तक नहीं है।
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शनिवार को चेहरी क्षेत्र से अपनी पत्नी का इलाज कराने आए मनोहर ने कहा कि जैसे तैसे कर स्वास्थ्य विभाग द्वारा महिला अस्पताल में मरीजों का इलाज तो शुरू कर दिया गया लेकिन यहां बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं। पीने के लिए पानी तक की व्यवस्था न होना गंभीर मामला है। सीएमएस डॉ आरबी राम ने कहा कि अस्पताल में इलाज के लिए आने वाली महिलाओं के लिए पेयजल की व्यवस्था की जाती है। अस्पताल के सभी तल पर वाटर कूलर लगा है, लेकिन अभी संचालित नहीं है। जल्द ही इसे सुचारु रूप से संचालित करने की व्यवस्था की जाएगी।
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जांच के लिए लगाना पड़ता है चक्कर
महिला अस्पताल में आने वाली गर्भवती महिलाओं को जांच कराने के लिए जगह-जगह चक्कर लगाना पड़ता है। अस्पताल में आकस्मिक सेवा भी नहीं शुरू की गई है। छोटी जांच हो अथवा बड़ी, महिला अस्पताल में किसी की भी सुविधा उपलब्ध नहीं है।
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गर्भवती महिलाओं को परेशानी अधिक
इलाज के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं को अस्पताल से नालियों को पार कर निकलना पड़ता है। नालियों पर ढक्कन न लगाए जाने से महिलाओं को परेशानी तो होती ही है, उन्हें गिरने का भी डर बना रहता है।जिम्मेदार समस्या के प्रति गंभीर नहीं हैं।