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बुद्ध से जुड़ा है टीले का इतिहास, खुदाई के बाद खुलेगा राज
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देवदह स्थित टीले का निरीक्षण करती इतिहासकारों व पुरातत्वविदों की टीम।
- फोटो : MAHARAJGANJ
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बुद्ध से जुड़ा है टीले का इतिहास, खुदाई से खुलेगा राज
नालंदा से भी महत्वपूर्ण तथ्य मिलने के आसार
तथागत के कदमों तले सम्मेलन के इतिहासकार व पुरातत्व विदों का जमावड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
लक्ष्मीपुर (महराजगंज)। बनर्सिहा खुर्द स्थित तथाकथित देवदह में शनिवार को ‘तथागत के कदमों तले’ सम्मेलन का आयोजन किया गया। देवदह के प्रमाणिकता को लेकर इतिहासकारों और पुरातत्व विदों ने मंथन किया। उन्होंने टीले देवदह एवं रामग्राम आदि होने का राज खुदाई के बाद खुलने की बात कही।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डीएम अमरनाथ उपाध्याय ने कहा कि टीले को लेकर अपार संभावना है। लामा लोट जंग ने कहा कि देवदह महामाया का मायका से जुड़ा स्थल है। इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए शासन की कवायद महत्वपूर्ण कदम है। नालंदा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रविंद्र पंत ने बताया कि टीले का इतिहास 600 ईसा पूर्व से जुड़ा है। इसकी खुदाई के बाद नालंदा से भी महत्वपूर्ण तथ्य मिलने के आसार है। चंडीगढ़ से आए इतिहासकार सुरेंद्र एस तलवार, डॉ. कृष्णदेव राय और प्रोफेसर रमेश ने बताया कि तथाकथित देवदह का टीला बुद्ध से जुड़ा है। इस दौरान पुरातत्व विद सचिन पायलट व नरसिंह त्यागी, पुलिस अधीक्षक रोहित सिंह सजवान, सीडीओ पवन अग्रवाल, बेसिक शिक्षा अधिकारी जगदीश प्रसाद शुक्ल, बीडीओ अनिल कुमार यादव, सीएचसी लक्ष्मीपुर अधीक्षक डॉ. दिवाकर राय, ग्राम प्रधान सुयश त्रिपाठी, अरविंद पटेल, शिव टहल, विजय बहादुर चौहान आदि मौजूद रहे।
बिना मुआवजा नहीं छोड़ेंगे भूमि
लक्ष्मीपुर। देवदह को विकसित करने के क्रम में शासन की ओर कवायद तेज होने के बाद किसान भी लामबंद होने लगे हैं। उनका कहना है कि वे बिना मुआवजा जमीन नहीं छोड़ेंगे। प्रशासन ने मनमानी की तो आंदोलन होगा। देवदह के सीमांकन को लेकर नवंबर-2017 में पुरातत्व विभाग ने देवदह का सीमांकन किया था। इसमें करीब 80 एकड़ जमीन किसानों की शामिल है, जिसे किसान किसी भी दशा में छोड़ने को तैयार नहीं है। उनका कहना है कि यदि शासन- प्रशासन ने मनमानी की कोशिश की गई तो किसान व्यापक आंदोलन करेंगे।
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नालंदा से भी महत्वपूर्ण तथ्य मिलने के आसार
तथागत के कदमों तले सम्मेलन के इतिहासकार व पुरातत्व विदों का जमावड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
लक्ष्मीपुर (महराजगंज)। बनर्सिहा खुर्द स्थित तथाकथित देवदह में शनिवार को ‘तथागत के कदमों तले’ सम्मेलन का आयोजन किया गया। देवदह के प्रमाणिकता को लेकर इतिहासकारों और पुरातत्व विदों ने मंथन किया। उन्होंने टीले देवदह एवं रामग्राम आदि होने का राज खुदाई के बाद खुलने की बात कही।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डीएम अमरनाथ उपाध्याय ने कहा कि टीले को लेकर अपार संभावना है। लामा लोट जंग ने कहा कि देवदह महामाया का मायका से जुड़ा स्थल है। इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए शासन की कवायद महत्वपूर्ण कदम है। नालंदा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रविंद्र पंत ने बताया कि टीले का इतिहास 600 ईसा पूर्व से जुड़ा है। इसकी खुदाई के बाद नालंदा से भी महत्वपूर्ण तथ्य मिलने के आसार है। चंडीगढ़ से आए इतिहासकार सुरेंद्र एस तलवार, डॉ. कृष्णदेव राय और प्रोफेसर रमेश ने बताया कि तथाकथित देवदह का टीला बुद्ध से जुड़ा है। इस दौरान पुरातत्व विद सचिन पायलट व नरसिंह त्यागी, पुलिस अधीक्षक रोहित सिंह सजवान, सीडीओ पवन अग्रवाल, बेसिक शिक्षा अधिकारी जगदीश प्रसाद शुक्ल, बीडीओ अनिल कुमार यादव, सीएचसी लक्ष्मीपुर अधीक्षक डॉ. दिवाकर राय, ग्राम प्रधान सुयश त्रिपाठी, अरविंद पटेल, शिव टहल, विजय बहादुर चौहान आदि मौजूद रहे।
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बिना मुआवजा नहीं छोड़ेंगे भूमि
लक्ष्मीपुर। देवदह को विकसित करने के क्रम में शासन की ओर कवायद तेज होने के बाद किसान भी लामबंद होने लगे हैं। उनका कहना है कि वे बिना मुआवजा जमीन नहीं छोड़ेंगे। प्रशासन ने मनमानी की तो आंदोलन होगा। देवदह के सीमांकन को लेकर नवंबर-2017 में पुरातत्व विभाग ने देवदह का सीमांकन किया था। इसमें करीब 80 एकड़ जमीन किसानों की शामिल है, जिसे किसान किसी भी दशा में छोड़ने को तैयार नहीं है। उनका कहना है कि यदि शासन- प्रशासन ने मनमानी की कोशिश की गई तो किसान व्यापक आंदोलन करेंगे।
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