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Maharajganj News: भोटेकोशी झील में फिर हलचल से 72 घंटे का अलर्ट, गंडक का जलस्तर स्थिर होने से राहत
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शुक्रवार की सुबह झील में हलचल के बाद 72 घंटे का अलर्ट
सोहगीबरवा समेत सीमावर्ती गांवों में एसडीआरएफ-एनडीआरएफ और पुलिस कर रही निगरानी
निचलौल। तिब्बत-नेपाल सीमा पर स्थित भोटेकोशी नदी में 26 अगस्त को आई बाढ़ के कारण नदी का प्रवाह बाधित होने से बनी झील में शुक्रवार की सुबह फिर से हलचल हुई। देर शाम को मिली अपडेट में इसकी पुष्टि हुई हालांकि झील फटी नहीं है। वहीं गंडक का जलस्तर स्थिर होने से स्थानीय लोगों को राहत मिली है। इसके बावजूद जनपद में 72 घंटे की अलर्ट के तहत प्रशासन सतर्क है।
जानकारी के अनुसार, भोटेकोशी झील में हलचल की सूचना के बाद नेपाल से भारत आने वाली नारायणी-गंडक नदी के जलस्तर को लेकर सीमावर्ती गांवों में चिंता फिर बढ़ गई। प्रशासन की ओर से 72 घंटे में कभी भी संभावित खतरे की सूचना प्रसारित किए जाने के बाद शनिवार को भी सोहगीबरवा और आसपास के क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाई गई है।
हालांकि बुधवार से शनिवार शाम तक गंडक नदी का जलस्तर लगभग स्थिर बना हुआ है। लेकिन नेपाल से तेज बहाव के साथ मलबा आने की आशंका के चलते खतरा पूरी तरह टला नहीं है। नेपाल प्रशासन ने निचले तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों, यात्रियों और राहत-बचाव कार्य में लगे कर्मियों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
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गंडक बैराज से निकलने वाले पानी के तेज बहाव के साथ नेपाल की ओर से मलबा, मानव और पशुओं के शव बहकर आने से पहले हड़कंप की स्थिति बनी थी। अब भारतीय क्षेत्र में बैराज से पानी का बहाव कम होने के कारण नदी में जमा मलबे और शवों से दुर्गंध फैल रही है। बृहस्पतिवार को गंडक नदी के टेलफाल और भेड़िहारी क्षेत्र से एसडीआरएफ की टीम ने एक पुरुष और तीन महिलाओं के शव बरामद किए थे।
बैराज पर 99,900 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज
शनिवार शाम चार बजे वाल्मीकिनगर बैराज पर 99,900 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया। शुक्रवार की अपेक्षा शनिवार शाम तक जलस्तर स्थिर रहने से ग्रामीणों और प्रशासन ने राहत की सांस ली है।
टापू क्षेत्र में टीमें तैनात, गांवों में पैदल गश्त
बाढ़ की किसी भी विषम परिस्थिति से निपटने और ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस और राजस्व विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। सबसे अधिक संवेदनशील टापू क्षेत्र सोहगीबरवा, शिकारपुर और भोथहा में टीमें तैनात की गई हैं। दियारा क्षेत्र में ग्रामीणों को भयभीत न होने और सतर्क रहने के लिए गांवों में पैदल गश्त कर रात में भी जागरूक रहने की अपील की जा रही है।
इंडो-नेपाल सीमा से लगे निचलौल विकासखंड के गेड़हवा, भेड़िहारी, कनमिशवा, बड़ेया, डोमा, चरभरिया, कलनही, चंदा गुलरभार समेत अन्य गांवों के प्रधानों और संभ्रांत नागरिकों से लगातार संपर्क बनाए रखने की जिम्मेदारी राजस्व निरीक्षकों और बीट सिपाहियों को सौंपी गई है। एसडीएम ने बताया कि 72 घंटे तक टीमें लगातार निगरानी अभियान चलाएंगी। फिलहाल पिछले दिनों की अपेक्षा शनिवार को स्थिति सामान्य रही।
सीओ रविंद्र कुमार सिंह ने बताया कि पुलिस बल से लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है। 72 घंटे के अलर्ट को देखते हुए पुलिस को सतर्क किया गया है। सुरक्षा और निगरानी में लगी टीमें पूरी मुस्तैदी से कार्य कर रही हैं और किसी भी स्थिति से निपटने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है।
वर्जन
आधिकारिक सूचना के अनुसार 72 घंटे तक संभावित खतरे को देखते हुए अलर्ट जारी है। राहत-बचाव कार्य में लगी टीमों को अलग-अलग टोलियों में बांटकर जिम्मेदारियां तय की गई हैं। पानी और जंगल के बीच स्थित होने के कारण सोहगीबरवा क्षेत्र में हर समय बाढ़ की आशंका बनी रहती है। प्रशासन किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क और तैयार है।
- सिद्धार्थ गुप्ता, एसडीएम
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सोहगीबरवा समेत सीमावर्ती गांवों में एसडीआरएफ-एनडीआरएफ और पुलिस कर रही निगरानी
निचलौल। तिब्बत-नेपाल सीमा पर स्थित भोटेकोशी नदी में 26 अगस्त को आई बाढ़ के कारण नदी का प्रवाह बाधित होने से बनी झील में शुक्रवार की सुबह फिर से हलचल हुई। देर शाम को मिली अपडेट में इसकी पुष्टि हुई हालांकि झील फटी नहीं है। वहीं गंडक का जलस्तर स्थिर होने से स्थानीय लोगों को राहत मिली है। इसके बावजूद जनपद में 72 घंटे की अलर्ट के तहत प्रशासन सतर्क है।
जानकारी के अनुसार, भोटेकोशी झील में हलचल की सूचना के बाद नेपाल से भारत आने वाली नारायणी-गंडक नदी के जलस्तर को लेकर सीमावर्ती गांवों में चिंता फिर बढ़ गई। प्रशासन की ओर से 72 घंटे में कभी भी संभावित खतरे की सूचना प्रसारित किए जाने के बाद शनिवार को भी सोहगीबरवा और आसपास के क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाई गई है।
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हालांकि बुधवार से शनिवार शाम तक गंडक नदी का जलस्तर लगभग स्थिर बना हुआ है। लेकिन नेपाल से तेज बहाव के साथ मलबा आने की आशंका के चलते खतरा पूरी तरह टला नहीं है। नेपाल प्रशासन ने निचले तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों, यात्रियों और राहत-बचाव कार्य में लगे कर्मियों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
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गंडक बैराज से निकलने वाले पानी के तेज बहाव के साथ नेपाल की ओर से मलबा, मानव और पशुओं के शव बहकर आने से पहले हड़कंप की स्थिति बनी थी। अब भारतीय क्षेत्र में बैराज से पानी का बहाव कम होने के कारण नदी में जमा मलबे और शवों से दुर्गंध फैल रही है। बृहस्पतिवार को गंडक नदी के टेलफाल और भेड़िहारी क्षेत्र से एसडीआरएफ की टीम ने एक पुरुष और तीन महिलाओं के शव बरामद किए थे।
बैराज पर 99,900 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज
शनिवार शाम चार बजे वाल्मीकिनगर बैराज पर 99,900 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया। शुक्रवार की अपेक्षा शनिवार शाम तक जलस्तर स्थिर रहने से ग्रामीणों और प्रशासन ने राहत की सांस ली है।
टापू क्षेत्र में टीमें तैनात, गांवों में पैदल गश्त
बाढ़ की किसी भी विषम परिस्थिति से निपटने और ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस और राजस्व विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। सबसे अधिक संवेदनशील टापू क्षेत्र सोहगीबरवा, शिकारपुर और भोथहा में टीमें तैनात की गई हैं। दियारा क्षेत्र में ग्रामीणों को भयभीत न होने और सतर्क रहने के लिए गांवों में पैदल गश्त कर रात में भी जागरूक रहने की अपील की जा रही है।
इंडो-नेपाल सीमा से लगे निचलौल विकासखंड के गेड़हवा, भेड़िहारी, कनमिशवा, बड़ेया, डोमा, चरभरिया, कलनही, चंदा गुलरभार समेत अन्य गांवों के प्रधानों और संभ्रांत नागरिकों से लगातार संपर्क बनाए रखने की जिम्मेदारी राजस्व निरीक्षकों और बीट सिपाहियों को सौंपी गई है। एसडीएम ने बताया कि 72 घंटे तक टीमें लगातार निगरानी अभियान चलाएंगी। फिलहाल पिछले दिनों की अपेक्षा शनिवार को स्थिति सामान्य रही।
सीओ रविंद्र कुमार सिंह ने बताया कि पुलिस बल से लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है। 72 घंटे के अलर्ट को देखते हुए पुलिस को सतर्क किया गया है। सुरक्षा और निगरानी में लगी टीमें पूरी मुस्तैदी से कार्य कर रही हैं और किसी भी स्थिति से निपटने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है।
वर्जन
आधिकारिक सूचना के अनुसार 72 घंटे तक संभावित खतरे को देखते हुए अलर्ट जारी है। राहत-बचाव कार्य में लगी टीमों को अलग-अलग टोलियों में बांटकर जिम्मेदारियां तय की गई हैं। पानी और जंगल के बीच स्थित होने के कारण सोहगीबरवा क्षेत्र में हर समय बाढ़ की आशंका बनी रहती है। प्रशासन किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क और तैयार है।
- सिद्धार्थ गुप्ता, एसडीएम