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पति को दस वर्ष सश्रम कारावास
अमर उजाला ब्यूराे
Updated Sun, 26 Mar 2017 12:26 AM IST
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महराजगंज। अपर सत्र न्यायाधीश योगेंद्र राम गुप्ता ने सोनौली थाना के ग्राम त्रिलोकपुर पहुनी टोला में गवने के सात दिन के अंदर ही विवाहिता की गला कस कर हत्या के मामले में दोषी पाए जाने पर पति संदीप यादव को दस वर्ष सश्रम कारावास, ससुर उमाशंकर यादव, सास वसंती एवं ननद राधा उर्फ अनुराधा को सात-सात वर्ष के सश्रम कारावास के साथ ही साथ कुल अस्सी हजार रुपये का अर्थदंड से दंडित किया है।
इसके साथ ही चारों अभियुक्तों को तीन वर्ष सश्रम, दहेज प्रतिषेध अधिनियम में दो-दो वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित किया है। पत्रावली से मिली जानकारी के अनुसार वादी मुकदमा सत्यनरायन यादव पुत्र नोहर प्रसाद निवासी वार्ड नंबर तीन विकास नगर थाना फरेंदा जनपद महराजगंज ने थाना सोनौली में सूचना दी कि उसने अपनी पुत्री इंद्रकला का विवाह तीन वर्ष पूर्व संदीप यादव पुत्र उमाशंकर निवासी पहुनी टोला त्रिलोकपुर थाना सोनौली जनपद महराजगंज के साथ किया था।
गवना 13 मई 2013 को हुआ था। वादी की छोटी पुत्री संध्या गवने में इंद्रकला के साथ गई थी। वह 20 मई 2013 को पांच बजे शाम को वापस आ गई। उसी रात 10.30 बजे समधी उमाशंकर का फोन आया कि आपकी पुत्री फांसी लगाकर मर गई है।
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वादी उसी रात वहां गया तो देखा कि उसकी पुत्री विस्तर पर मृत पड़ी है। वादी की छोटी पुत्री संध्या ने बताया कि उसके जीजा, सास, ससुर व ननद दीदी को बाइक के लिए मारते पीटते और गाली गुप्ता देते रहते थे। तहरीर के आधार पर 21 मई को दहेज प्रतिषेध अधिनियम में मुकदमा पंजीकृत कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रेषित किया। सहायक शासकीय अधिवक्ता कमाल सिद्दीकी ने 10 गवाहों को पेश कर सजा की मांग की। न्यायालय द्वारा पत्रावली, सबूतों व बयानों के आधार पर अपने 35 पृष्ठीय विस्तृत फैसले में सजा सुनाई है।
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इसके साथ ही चारों अभियुक्तों को तीन वर्ष सश्रम, दहेज प्रतिषेध अधिनियम में दो-दो वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित किया है। पत्रावली से मिली जानकारी के अनुसार वादी मुकदमा सत्यनरायन यादव पुत्र नोहर प्रसाद निवासी वार्ड नंबर तीन विकास नगर थाना फरेंदा जनपद महराजगंज ने थाना सोनौली में सूचना दी कि उसने अपनी पुत्री इंद्रकला का विवाह तीन वर्ष पूर्व संदीप यादव पुत्र उमाशंकर निवासी पहुनी टोला त्रिलोकपुर थाना सोनौली जनपद महराजगंज के साथ किया था।
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गवना 13 मई 2013 को हुआ था। वादी की छोटी पुत्री संध्या गवने में इंद्रकला के साथ गई थी। वह 20 मई 2013 को पांच बजे शाम को वापस आ गई। उसी रात 10.30 बजे समधी उमाशंकर का फोन आया कि आपकी पुत्री फांसी लगाकर मर गई है।
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वादी उसी रात वहां गया तो देखा कि उसकी पुत्री विस्तर पर मृत पड़ी है। वादी की छोटी पुत्री संध्या ने बताया कि उसके जीजा, सास, ससुर व ननद दीदी को बाइक के लिए मारते पीटते और गाली गुप्ता देते रहते थे। तहरीर के आधार पर 21 मई को दहेज प्रतिषेध अधिनियम में मुकदमा पंजीकृत कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रेषित किया। सहायक शासकीय अधिवक्ता कमाल सिद्दीकी ने 10 गवाहों को पेश कर सजा की मांग की। न्यायालय द्वारा पत्रावली, सबूतों व बयानों के आधार पर अपने 35 पृष्ठीय विस्तृत फैसले में सजा सुनाई है।