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डीएम को हाईकोर्ट ने दिया नोटिस
अमर उजाला ब्यूराे
Updated Fri, 10 Mar 2017 12:20 AM IST
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महराजगंज। सोहगी बरवां वन्य जीव प्रभाग के वाइल्ड लाइफ सेंचुरी सीमा के 10 किमी दायरे में वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट की अनदेखी कर शस्त्र लाइसेंस जारी करने के मामले में जिलाधिकारी द्वारा जारी किए गए थे।
कानून वन विभाग से एनओसी लेकर ही सेन्चुरी क्षेत्र के 10 किमी दायरे में आने वाले क्षेत्र के लोगो को शस्त्र लाइसेंस दिए जाए। मगर इस नियम को दरकिनार कर शस्त्र लाइसेंस दे दिया गया। इस मसले को लेकर हाई कोर्ट ने डीएम को अवमानना नोटिस जारी करते हुए डेढ़ महीने के अंदर सभी दस्तावेजों के साथ तलब किया है।
आरटीआई कार्यकर्ता अनिल कुमार गुप्ता की टीम ने इस मुद्दे को लेकर जनसूचना अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी। जनसूचना अधिकार के तहत मिली जानकारी में यह तथ्य सामने आया कि सेंचुरी क्षेत्र में ज्यादा शस्त्र लाइसेंस जारी हुए है। पांच वन सेंचुरी क्षेत्रों में 100 से ज्यादा शस्त्र लाइसेंस जारी होने की बात सामने आई है।
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महराजगंज में तैनात रहे डीएफओ एके कश्यप ने भी डीएम को भेजे गए पत्र में वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट की धारा 34 में प्रक्रिया का पालन न होने से वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 का उल्लंघन होना बताया है। डीएफओ के पत्र का जवाब भी जिलाधिकारी की ओर से नहीं भेजा गया। इस मामले को लेकर आरटीआई कार्यकर्ता अनिल कुमार गुप्ता की टीम ने हाईकोर्ट में कंटेमंट दाखिल किया। जिस पर हाई कोर्ट ने डीएम को अवमानना नोटिस जारी करते हुए डेढ़ माह के अंदर सभी दस्तावेजों समेत तलब किया है। इस संबंध में डीएम वीके सिंह ने कहा कि उन्हें नोटिस की जानकारी नहीं है।
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कानून वन विभाग से एनओसी लेकर ही सेन्चुरी क्षेत्र के 10 किमी दायरे में आने वाले क्षेत्र के लोगो को शस्त्र लाइसेंस दिए जाए। मगर इस नियम को दरकिनार कर शस्त्र लाइसेंस दे दिया गया। इस मसले को लेकर हाई कोर्ट ने डीएम को अवमानना नोटिस जारी करते हुए डेढ़ महीने के अंदर सभी दस्तावेजों के साथ तलब किया है।
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आरटीआई कार्यकर्ता अनिल कुमार गुप्ता की टीम ने इस मुद्दे को लेकर जनसूचना अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी। जनसूचना अधिकार के तहत मिली जानकारी में यह तथ्य सामने आया कि सेंचुरी क्षेत्र में ज्यादा शस्त्र लाइसेंस जारी हुए है। पांच वन सेंचुरी क्षेत्रों में 100 से ज्यादा शस्त्र लाइसेंस जारी होने की बात सामने आई है।
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महराजगंज में तैनात रहे डीएफओ एके कश्यप ने भी डीएम को भेजे गए पत्र में वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट की धारा 34 में प्रक्रिया का पालन न होने से वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 का उल्लंघन होना बताया है। डीएफओ के पत्र का जवाब भी जिलाधिकारी की ओर से नहीं भेजा गया। इस मामले को लेकर आरटीआई कार्यकर्ता अनिल कुमार गुप्ता की टीम ने हाईकोर्ट में कंटेमंट दाखिल किया। जिस पर हाई कोर्ट ने डीएम को अवमानना नोटिस जारी करते हुए डेढ़ माह के अंदर सभी दस्तावेजों समेत तलब किया है। इस संबंध में डीएम वीके सिंह ने कहा कि उन्हें नोटिस की जानकारी नहीं है।